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हत्या में अभियुक्त को आजीवन कारावास
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हत्या में अभियुक्त को आजीवन कारावास
झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश/न्यायालय कक्ष संख्या तीन सुरेंद्र कुमार सिंह द्वितीय की अदालत ने महिला से शादी करने का प्रयास विफल होने पर की गई हत्या का दोष साबित होने पर अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मृदुलकांत श्रीवास्तव ने बताया कि लालसिंह ने एसएसपी को शिकायती पत्र देते हुए बताया था कि उसकी पुत्री गीता की शादी थाना समथर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कड़ूरा में हुई थी। पति सुरेश की मृत्यु होने पर गीता अपने दोनों लड़के प्रमोद व संजय के साथ रह रही थी। सुरेश के मामा का लड़का मुकेश रिश्तेदारी होने के कारण घर आता-जाता रहता था।
27 फरवरी 2016 को गीता घर पर अकेली थी। ग्राम अमाह थाना दबोह जिला भिंड मप्र निवासी मुकेश पुत्र प्रकाश अहिरवार जो एक दिन पहले से उसके घर में रुका था। गीता को अकेली समझ वह उससे शादी करने के लिए दबाव डालने लगा। विरोध करने पर छीना झपटी करते हुए उसने मिट्टी के तेल गीता के ऊपर उड़ेल कर आग लगा दी। चीख-पुकार सुनकर घर के बाहर से दोनों पुत्र व गांव के लोग आ गए, जिसके बाद मुकेश मौके से भाग निकला। गीता को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां उपचार के दौरान नौ फरवरी को दम तोड़ दिया। मुकेश के खिलाफ धारा 302 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया। जहां सुनवाई बाद मृतका पूर्व बयानों के आधार पर न्यायालय ने मुकेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया, जिसे अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई।
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झांसी। अपर सत्र न्यायाधीश/न्यायालय कक्ष संख्या तीन सुरेंद्र कुमार सिंह द्वितीय की अदालत ने महिला से शादी करने का प्रयास विफल होने पर की गई हत्या का दोष साबित होने पर अभियुक्त को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
पैरवी कर रहे सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मृदुलकांत श्रीवास्तव ने बताया कि लालसिंह ने एसएसपी को शिकायती पत्र देते हुए बताया था कि उसकी पुत्री गीता की शादी थाना समथर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कड़ूरा में हुई थी। पति सुरेश की मृत्यु होने पर गीता अपने दोनों लड़के प्रमोद व संजय के साथ रह रही थी। सुरेश के मामा का लड़का मुकेश रिश्तेदारी होने के कारण घर आता-जाता रहता था।
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27 फरवरी 2016 को गीता घर पर अकेली थी। ग्राम अमाह थाना दबोह जिला भिंड मप्र निवासी मुकेश पुत्र प्रकाश अहिरवार जो एक दिन पहले से उसके घर में रुका था। गीता को अकेली समझ वह उससे शादी करने के लिए दबाव डालने लगा। विरोध करने पर छीना झपटी करते हुए उसने मिट्टी के तेल गीता के ऊपर उड़ेल कर आग लगा दी। चीख-पुकार सुनकर घर के बाहर से दोनों पुत्र व गांव के लोग आ गए, जिसके बाद मुकेश मौके से भाग निकला। गीता को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज लाया गया, जहां उपचार के दौरान नौ फरवरी को दम तोड़ दिया। मुकेश के खिलाफ धारा 302 के तहत आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया गया। जहां सुनवाई बाद मृतका पूर्व बयानों के आधार पर न्यायालय ने मुकेश को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने अभियुक्त पर दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया, जिसे अदा न करने पर छह माह के अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई गई।
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