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हवा हो रही जहरीली, दोषी कौन?

Tue, 04 Jun 2019 02:24 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 04 Jun 2019 02:24 AM IST
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हवा हो रही जहरीली, दोषी कौन?
धुएं से प्रदूषित हो रही है शहर की हवा
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झांसी। शहर की हवा में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बात की तस्दीक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पिछले पांच साल के आंकड़ों से की जा सकती है। बावजूद, इसके नियंत्रण के उपाय नहीं किए जा रहे हैं। स्थिति ये है कि शहर में रोजाना 300 टन कचरा निकलता है, लेकिन इसके निस्तारण का समुचित प्रबंध नहीं है। आए दिन कचरे के ढेरों में आग लग जाती है, जिससे निकलने वाला धुआं हवा में जहर घोलने का काम करता है। बावजूद, प्रदूषण विभाग चुप्पी साधे हुए हैं।
शहर से निकलने वाला कचरा पहले नगर निगम द्वारा तीन डंपिंग जोन में ले जाया जाता था, लेकिन सीपरी बाजार और सूजे खां खिड़की के पास के डंपिंग जोन में अब कचरा फेंकने की जगह नहीं बची है, जिससे ये बंद हो गए हैं। अब केवल एक ही पंचवटी के पास ही कचरा डंप किया जा रहा है। कचरे के निस्तारण के लिए साल 2016 में नगर निगम द्वारा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाया गया था। लेकिन, ये एक साल ही चल पाया। प्लांट में आग लगने की वजह से ये बंद हो गया था। इसके बाद ये दुबारा शुरू नहीं हो पाया। अब हालात ये हैं कि कचरे के ढेरों में आए दिन आग लग जाती है। गर्मी में ये समस्या और भी बढ़ गई है। इससे निकलने वाला जहरीला धुआं वातावरण को प्रदूषित कर रहा है।
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स्थिति ये है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने झांसी को वायु प्रदूषण के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के कारण ‘नॉन एटेंनमेंट सिटीज’ की श्रेणी में रखा है। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि झांसी पांच वर्षों से अधिक समय से नेशनल एंबिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड (एनएएक्यूएस) को प्राप्त करने में असफल रहा। बीते पांच साल के आंकड़े दर्शाते हैं कि झांसी में प्रदूषण मापने की इकाई पीएम-10 बढ़कर 100 से ऊपर ही है और इस साल इसके बढ़ने की आशंका है। प्रदूषण विभाग की रिपोर्ट में स्पष्ट है कि यह प्रदूषण धुएं से बढ़ा है।
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धनराशि मिली, पर नहीं हुआ काम
एनजीटी के कड़े आदेश पर नगर निगम 14वें वित्त आयोग से प्राप्त निधि से कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिस वेस्ट मैनेजमेंट (निर्माण ढहाने के बाद निकले वाले मलबे को रिसाइकिल के लायक बनाना) की पांच करोड़ रुपये की योजना पर मोहर लगा जा चुका है, पर इस योजना को भी अब तक धरातल पर नहीं उतारा गया है। जबकि, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. वीके दुबे के अनुसार सबसे ज्यादा प्रदूषण धूल के कणों का है। इसे रोकने में ये प्लांट कारगर साबित होगा।


मेरे कार्यकाल में कचरा निस्तारंण प्लांट की स्थापना हुई थी और उसमें पॉलीथिन व अन्य कचरे को रिसाइकिल करने का काम शुरू हो चुका था। बाद में प्लांट बंद हो गया, जो अब भी बंद पड़ा है।

- किरन वर्मा, पूर्व महापौर

कचरा निस्तारण प्लांट और कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिस वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पर अध्ययन किया जा रहा है। जल्द ही उस पर काम शुरू होगा। कचरा निस्तारण प्लांट से बिजली उत्पादन करने की योजना भी शामिल है।
- रामतीर्थ सिंघल, महापौर
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