कोचिंग में नहीं आग बुझाने के संसाधन

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Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 May 2019 01:39 AM IST

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कोचिंग सेंटरों में हो रहा जान के साथ खिलवाड़
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झांसी। सूरत में एक कोचिंग सेंटर में लगी आग से कई छात्रों की जान चली गई। उक्त घटना को दृष्टिगत रखते हुए अमर उजाला ने शहर में संचालित 30 से अधिक कोचिंग सेंटरों की पड़ताल की। इनमें से मात्र दो सेंटर ही ऐसे मिले, जिनमें खानापूर्ति के लिए यंत्र स्थापित हैं। हालांकि, उक्त घटना को प्रशासन और शिक्षा विभाग ने गंभीरता से लेकर जांच के निर्देश जारी किए हैं।
अमर उजाला ने कई कोचिंग सेंटरों की हालत जानने के लिए बारीकी से देखा। प्रवेश लेने के जरिए कोचिंग का हाल जाना। इस दौरान हर लिहाज से कोचिंग सेंटरों को परखा गया, जो मानकों पर खरे नहीं उतरे। पता चला कि शिक्षा के नाम पर हजारों रुपये एक छात्र से एक विषय के नाम पर वसूले जा रहे हैं मगर उसके एवज में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। अधिकांश कोचिंग कांप्लेक्स या मकानों में किराए पर संचालित हैं। आलम ये है कि दुर्घटना से बचने के लिए एक भी इमरजेंसी एग्जिट नहीं है। सिर्फ सीढ़ियां हैं, वह भी संकरी। इधर, प्रशासन ने खानापूर्ति के लिए फिलहाल जांच के निर्देश जारी किए हैं। अब देखना है कि निर्देशों का पालन कितना होता है।

बता दें कि शहर में कई इलाके ऐसे हैं, जहां कोचिंग सेंटरों की मंडी है। इसमें सीपरी बाजार, आवास विकास, नंदनपुरा, खातीबाबा, नगरा, सिविल लाइंस, आतियां तालाब, ग्वालियर रोड शामिल है। इन क्षेत्रों में एक नहीं, बल्कि गली-गली में दर्जनों कोचिंग खुली हुई हैं।

कोचिंग सेंटरों का लाइव हाल
दोपहर 1:05 बजे: सीपी मिशन कंपाउंड गेट पर स्थित कांप्लेक्स में दूसरी और तीसरी मंजिल पर तीन कोचिंग सेंटर मिले। निकलने के लिए सिर्फ एकमात्र रास्ता है सीढ़ियां, वह भी संकरा। साथ ही आग बुझाने के लिए एक भी यंत्र नहीं मिला।
दोपहर 1:11 बजे: आतियां तालाब के किनारे तीन कोचिंग सेंटर प्रथम तल से तीसरे तल तक मिले। आने-जाने के लिए एकमात्र संसाधन हैं सीढ़ियां, वह भी संकरी हैं। इनमें भी आग बुझाने का एक भी यंत्र या अन्य संसाधन नहीं मिले।
दोपहर 1:14 : हनुमान मंदिर (आतियां तालाब) के पास तीन कोचिंग मिलीं। उसी रास्ते पर तीन अन्य कोचिंग पहली मंजिल पर थी, जिनमें ताला लटका था। बाहर से देखने पर पाया कि वहां पर अग्निशमन यंत्र नहीं थे।
दोपहर 1:22: गायत्री मंदिर (आतियां तालाब) के पास इंजीनियरिंग, मेडिकल की आठ-दस कोचिंग कई में ताले पड़े मिले तो कई खुले मिले। उनमें पाया गया कि निकलने का एकमात्र रास्ता है साथ ही उनमें आग बुझाने का यंत्र नहीं है। जबकि, तीनों मालों पर सैकड़ों छात्र-छात्राएं रोजाना सुबह-शाम क्लास में पहुंचते हैं।
दोपहर 1:33: शक्ति नगर में नामी कोचिंग, जिसमें एक बैच में सौ से अधिक छात्र एक साथ शामिल होते हैं। अलग-अलग विषयों के हिसाब से कई सैकड़ा छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। एडमीशन कराने के नाम पर बताया कि गणित, रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान पढ़ाने के लिए 70 हजार रुपये फीस लगेंगे। क्लास का निरीक्षण कि डिजिटल तकनीक से लैस थी पर इस हाईटेक कोचिंग पर आग बुझाने का क्लास में कोई उपकरण नहीं था। जबकि, कोचिंग ग्राउंड फ्लोर सहित तीन माले की है। सिर्फ, पार्किंग में आग बुझाने के लिए मात्र एक सिलेंडर लगा हुआ मिला।
दोपहर 1:50 बजे: आशिक चौराहा की ओर जाने वाली सड़क पर स्थित नामी कोचिंग। तंग सीढ़ियों से ऊपर चढ़े तो कई तार झूलते मिले, बिजली का सर्किट बोर्ड खुला मिला। फीस के नाम पर एक विषय के हजारों रुपये बताए। कई क्लास में सुविधा के नाम पर एक भी संसाधन नहीं मिले।
दोपहर 2:02 बजे: सिविल लाइंस में कई कोचिंग घरों में संचालित हो रही हैं। छात्र-छात्राओं का हुजूम रहता है पर सुरक्षा उपकरणों की बात करें तो यहां भी नदारद मिले।
दोपहर 2:15 बजे: 48 चैंबर्स के सामने प्रथम तल पर कई कोचिंग हैं। यहां सुरक्षा उपकरण के नाम पर आग बुझाने के लिए एक सिलेंडर था वह भी वर्ष 2016 में रीफिल कराया गया था, दीवार पर टंगा दिखा।
दोपहर: 3:50 बजे: सीपरी बाजार स्थित रामा बुक डिपो चौराहे पर कई कोचिंग प्रथम और दूसरे तल पर एक में भी अग्निशमन यंत्र नहीं मिले।

सिर्फ 120 पंजीकृत
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा कार्यालय में मात्र 120 कोचिंग सेंटर पंजीकृत हैं, जो कि कागजों में दर्ज हैं। ऑफ रिकार्ड की बात करें तो महानगर के विभिन्न इलाकों में इनकी संख्या चार गुना आंकी जा रही है तथा एक बैच में तकरीबन 25 से 100 छात्र-छात्राओं का हर घंटे बैच लगता है।

नियमों में शामिल
क्षेत्रीय उच्च शिक्षा कार्यालय में पंजीकरण कराने पहुंचने वाले संचालकों को नियम के तहत चालान जमा कराया जाता है। पंजीकरण पुस्तिका में कई नियम अंकित हैं, जिनका पालन करने के सख्त निर्देश हैं। इनमें से धारा 3 (2) में अंकित है कि कोचिंग सेंटरों में छात्र-छात्राओं की संख्या 50 से अधिक होने पर अग्निशमन यंत्र या फिर अन्य उपकरण होना अनिवार्य है। इसका पालन करने के बाद ही पंजीकरण मान्य होता है। इसके लिए कोचिंग संचालकों को अग्निशमन विभाग से एनओसी लेनी होती है।


कोचिंग सेंटरों का पंजीकरण कराते समय सारे नियम पंजीयन पुस्तिका में दर्ज हैं। शर्त पूरी करने वालों का ही पंजीकरण करा जाता है। इससे पूर्व निरीक्षण भी किया जाता है। मानक पर खरे उतरने पर ही अनुमति दी जाती है। अगर, कोई लापरवाही बरतता है तो उसकी जांच कर कार्रवाई होगी। - डॉ. संध्या रानी, क्षेत्रीय उच्च शिक्षाधिकारी।

जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखा है, जिसमें सूरत की घटना को इंगित किया गया है तथा भविष्य में इस प्रकार की घटना न हो, इसके लिए कई बिदुओं जैसे मानक, निकासी मार्ग, अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था आदि पर परीक्षण कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। - केके ओझा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक और मुख्य अग्निशमन अधिकारी को निर्देश जारी कर कोचिंग सेंटरों में आग की रोकथाम के लिए मौजूद संसाधन जैसे सिलेंडर, बालू व पानी की पर्याप्त व्यवस्था जांचने के निर्देश दिए हैं तथा सभी से आख्या मांगी गई है। - राम प्रकाश, नगर मजिस्ट्रेट।

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