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शिक्षा के साथ बांट रहे खुशियां
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शिक्षा के साथ बांट रहे खुशियां
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के छात्र-छात्राएं सखीपुरा मलिन बस्ती में आदिवासी बच्चों को रोजाना दो से तीन घंटे शिक्षा देने के साथ ही शिक्षण सामग्री अपने जेब खर्च से उपलब्ध कराते हैं। शुक्रवार को कक्षा के बाद बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें पिचकारियां बांटीं।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र प्रतिदिन अपनी शिक्षा ग्रहण करने के बाद रोजाना दो से तीन घंटे का समय निकालकर समाज को शिक्षित बनाने का काम कर रहे हैं। सभी अपने जेब खर्च से बच्चों को शिक्षण सामग्री जैसे पेंसिल, रबर, स्केल के साथ-साथ अभ्यास पुस्तिका भी उपलब्ध कराते हैं। उनकी यह मेहनत रंग भी ला रही है। विभाग समन्वयक डॉ. नेहा मिश्रा के निर्देशन में अब तक वह एक नहीं बल्कि क्षेत्र के 50 से अधिक बच्चों को शिक्षा दे चुके हैं।
ये वो बच्चे हैं, जिन्हें अक्षरों का ज्ञान तक नहीं था। आज सभी को अंग्रेजी, हिंदी और गणित के शब्दों का खासा ज्ञान है। उनके इस प्रयास में बच्चों के मां-बाप भी सहयोग कर रहे हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के विद्यार्थी कृष्णा वर्मा ने बताया कि प्रतिदिन सात विद्यार्थी सखीपुरा बस्ती में बच्चों को शिक्षा देने जाते हैं। वहीं, कृष्णा का कहना है कि अभी वहां एक पेड़ के नीचे क्लास लगती है। प्रयास कर रहे हैं कि कोई जमीन मिल जाए, जहां बच्चों के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्था हो। शुक्रवार को बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें पिचकारियां बांटीं।
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झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के समाज कार्य विभाग के छात्र-छात्राएं सखीपुरा मलिन बस्ती में आदिवासी बच्चों को रोजाना दो से तीन घंटे शिक्षा देने के साथ ही शिक्षण सामग्री अपने जेब खर्च से उपलब्ध कराते हैं। शुक्रवार को कक्षा के बाद बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें पिचकारियां बांटीं।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में अध्ययनरत छात्र प्रतिदिन अपनी शिक्षा ग्रहण करने के बाद रोजाना दो से तीन घंटे का समय निकालकर समाज को शिक्षित बनाने का काम कर रहे हैं। सभी अपने जेब खर्च से बच्चों को शिक्षण सामग्री जैसे पेंसिल, रबर, स्केल के साथ-साथ अभ्यास पुस्तिका भी उपलब्ध कराते हैं। उनकी यह मेहनत रंग भी ला रही है। विभाग समन्वयक डॉ. नेहा मिश्रा के निर्देशन में अब तक वह एक नहीं बल्कि क्षेत्र के 50 से अधिक बच्चों को शिक्षा दे चुके हैं।
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ये वो बच्चे हैं, जिन्हें अक्षरों का ज्ञान तक नहीं था। आज सभी को अंग्रेजी, हिंदी और गणित के शब्दों का खासा ज्ञान है। उनके इस प्रयास में बच्चों के मां-बाप भी सहयोग कर रहे हैं। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के विद्यार्थी कृष्णा वर्मा ने बताया कि प्रतिदिन सात विद्यार्थी सखीपुरा बस्ती में बच्चों को शिक्षा देने जाते हैं। वहीं, कृष्णा का कहना है कि अभी वहां एक पेड़ के नीचे क्लास लगती है। प्रयास कर रहे हैं कि कोई जमीन मिल जाए, जहां बच्चों के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्था हो। शुक्रवार को बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें पिचकारियां बांटीं।
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