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किला में बढ़े रेट पर सैलानियों की प्रतिक्रिया-City
Updated Wed, 08 Aug 2018 08:56 PM IST
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पैसे ज्यादा ले रहे तो कुछ सुविधाएं भी दो
किले और रानी महल की टिकट महंगी होने से नाखुश हैं सैलानी
स्थानीय लोगों का भी आना हो सकता है प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ऐतिहासिक किले और रानीमहल की टिकट महंगी होने से यहां आने वाले सैलानी नाखुश हैं। उनका कहना है कि सुविधा के नाम पर यहां पीने का पानी भी हर जगह उपलब्ध नहीं है, ऐसे में टिकट महंगा करना गलत है। इसका प्रभाव स्थानीय लोगों के आवागमन पर भी पड़ सकता है।
केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इन दोनों संरक्षित स्मारकों में टिकट दर 15 से बढ़ाकर 25 रुपये कर दिए हैं। बुधवार को सभी सैलानियों के नए दर पर टिकट काटे गए। सर्वेक्षण विभाग के इस फैसले से सैलानी संतुष्ट नजर नहीं आए। टिकट खिड़की पर कर्मचारियों से कई सैलानियों ने अंसतोष जताया। आईटीआई क्षेत्र निवासी लक्की वर्मा अपने परिजनों के पांच सदस्यों के साथ किला घूमने आए, लेकिन टिकट के बढ़े हुए दाम के कारण वापस लौट गए। उनका कहना था कि इतना पैसा देने से अच्छा कहीं और घूम ले। इसी प्रकार का विचार अन्य सैलानी भी रखते है।
मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट हो
पूरे किला में घूमा, कहीं भी मोबाइल चार्जिंग का प्वाइंट नहीं मिला। टायलेट भी गंदा दिखा। अगर पैसा बढ़ाया है, तो सुविधा भी देनी चाहिए। इस समस्या के बारे में सर्वेक्षण विभाग को ट्वीटर से बतायेंगे।
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सुनील कुमार, सैलानी दिल्ली
संरक्षण तो हो सही ढंग से
किले में कई जगह मधुमक्खी के छत्ते हैं। इसकी दीवारों में भी दरारे हैं। स्मारक की देखरेख सही ढंग से होनी चाहिए। डस्टबिन की भी कमी है। सफाई का भी अभाव है।
सौरव गोयल, सैलानी दिल्ली
विभाग का फैसला गलत
टिकट का रेट बढ़ना गलत है। सरकार के इस फैसले से सर्वाधिक प्रभावित ग्रामीण अंचलों व स्थानीय लोग होंगे। जो अपने रिश्तेदारों व परिजनों को लेकर किला व रानी महल घुमाने लाते है।
महेंद्र रायकवार, निवासी झांसी
कमरों में आती है बदबू
किले में बने कमरों में भयंकर बदबू आती है। उनमें प्रवेश करने की भी इच्छा नहीं होती है। इसके अलावा पर्यटक बैंच की भी बेहद कमी है। सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए।
अहमद खान, सैलानी दमोह
ये भी हैं समस्याएं
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- फसाड लाइट है खराब
- बंदरों का है आतंक
- गाइड का अभाव
- टायलेट गंदा
- किला की दीवारों पर उगी घास व बेल
- रानी महल की दीवारों पर रंगरोगन का अभाव
7 - अतिक्रमण
8 - महल की खिड़कियों पर लगा दीमक
9 - किला की तलहटी में गंदगी के ढेर
मुख्यालय से बढे़ है
टिकट के रेट केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के मुख्यालय से बढे़ है। इसके अलावा कई अन्य सुविधाएं भी किला में बढ़ाई जा रही है। कैफेटेरिया की योजना है। फसाड़ लाइट जेडीए के है, जो वह नए सिरे से तैयार कर रहा है।
पीकेके रेड्डी संरक्षा अधिकारी एवं किला प्रभारी
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पैसे ज्यादा ले रहे तो कुछ सुविधाएं भी दो
किले और रानी महल की टिकट महंगी होने से नाखुश हैं सैलानी
स्थानीय लोगों का भी आना हो सकता है प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। ऐतिहासिक किले और रानीमहल की टिकट महंगी होने से यहां आने वाले सैलानी नाखुश हैं। उनका कहना है कि सुविधा के नाम पर यहां पीने का पानी भी हर जगह उपलब्ध नहीं है, ऐसे में टिकट महंगा करना गलत है। इसका प्रभाव स्थानीय लोगों के आवागमन पर भी पड़ सकता है।
केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इन दोनों संरक्षित स्मारकों में टिकट दर 15 से बढ़ाकर 25 रुपये कर दिए हैं। बुधवार को सभी सैलानियों के नए दर पर टिकट काटे गए। सर्वेक्षण विभाग के इस फैसले से सैलानी संतुष्ट नजर नहीं आए। टिकट खिड़की पर कर्मचारियों से कई सैलानियों ने अंसतोष जताया। आईटीआई क्षेत्र निवासी लक्की वर्मा अपने परिजनों के पांच सदस्यों के साथ किला घूमने आए, लेकिन टिकट के बढ़े हुए दाम के कारण वापस लौट गए। उनका कहना था कि इतना पैसा देने से अच्छा कहीं और घूम ले। इसी प्रकार का विचार अन्य सैलानी भी रखते है।
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मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट हो
पूरे किला में घूमा, कहीं भी मोबाइल चार्जिंग का प्वाइंट नहीं मिला। टायलेट भी गंदा दिखा। अगर पैसा बढ़ाया है, तो सुविधा भी देनी चाहिए। इस समस्या के बारे में सर्वेक्षण विभाग को ट्वीटर से बतायेंगे।
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सुनील कुमार, सैलानी दिल्ली
संरक्षण तो हो सही ढंग से
किले में कई जगह मधुमक्खी के छत्ते हैं। इसकी दीवारों में भी दरारे हैं। स्मारक की देखरेख सही ढंग से होनी चाहिए। डस्टबिन की भी कमी है। सफाई का भी अभाव है।
सौरव गोयल, सैलानी दिल्ली
विभाग का फैसला गलत
टिकट का रेट बढ़ना गलत है। सरकार के इस फैसले से सर्वाधिक प्रभावित ग्रामीण अंचलों व स्थानीय लोग होंगे। जो अपने रिश्तेदारों व परिजनों को लेकर किला व रानी महल घुमाने लाते है।
महेंद्र रायकवार, निवासी झांसी
कमरों में आती है बदबू
किले में बने कमरों में भयंकर बदबू आती है। उनमें प्रवेश करने की भी इच्छा नहीं होती है। इसके अलावा पर्यटक बैंच की भी बेहद कमी है। सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए।
अहमद खान, सैलानी दमोह
ये भी हैं समस्याएं
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- फसाड लाइट है खराब
- बंदरों का है आतंक
- गाइड का अभाव
- टायलेट गंदा
- किला की दीवारों पर उगी घास व बेल
- रानी महल की दीवारों पर रंगरोगन का अभाव
7 - अतिक्रमण
8 - महल की खिड़कियों पर लगा दीमक
9 - किला की तलहटी में गंदगी के ढेर
मुख्यालय से बढे़ है
टिकट के रेट केंद्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के मुख्यालय से बढे़ है। इसके अलावा कई अन्य सुविधाएं भी किला में बढ़ाई जा रही है। कैफेटेरिया की योजना है। फसाड़ लाइट जेडीए के है, जो वह नए सिरे से तैयार कर रहा है।
पीकेके रेड्डी संरक्षा अधिकारी एवं किला प्रभारी