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हाउस टैक्स पर आपतियां तीन सितंबर तक मांगी-Cordination
Updated Wed, 08 Aug 2018 09:56 PM IST
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हाउस टैक्स ज्यादा है तो आपत्ति करें
नगर निगम ने तीन सितंबर तक मांगी, 16 साल बाद शुरू हुई प्रक्रिया, डोर-टू-डोर जा रहे नोटिस
- दरें नहीं बढ़ीं, लेकिन मकान के क्षेत्रफल में फेरबदल से बढ़ेगा टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अगर आपको अपने भवन का हाउस टैक्स ज्यादा लगता है तो तीन सितंबर तक इस पर नगर निगम कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराएं। नगर निगम गठन के बाद दूसरी बार हाउस टैक्स पर आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियों के लिए मकान स्वामियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जो डोर-टू-डोर बांटे जाने लगे हैं। खास बात यह है कि 16 साल बाद रिवाइज हो रहे हाउस टैक्स की दरें नहीं बढ़ाई गई हैं। लेकिन, यदि मकान के क्षेत्रफल में फेरबदल किया गया होगा तो टैक्स बढ़ना तय है।
नगर निगम का गठन 2002 में हुआ था। उसी समय हाउस टैक्स की दरें निर्धारित की गई थीं। नियमानुसार प्रत्येक चार साल में हाउस टैक्स निर्धारित किया जाना चाहिए, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण ऐसा नहीं हो सका है। इतना ही नहीं प्रत्येक वर्ष हाउस टैक्स में कम से कम पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होनी चाहिए थी, जो संभव नहीं हो सकी। इस तरह करीब 16 साल का समय बीत गया। शासन ने हाउस टैक्स नहीं बढ़ाने को गंभीरता से लिया और टैक्स निर्धारण के लिए सख्ती बरती, जिसका नतीजा यह हुआ कि नगर निगम ने मकान का क्षेत्रफल, निर्मित एरिया, यदि खाली प्लाट है तो उसका एरिया समेत कुल क्षेत्रफल का वार्षिक मूल्यांकन कर एक लाख 11 हजार मकान स्वामियों के नाम से नोटिस जारी किए और आपत्तियां मांग ली हैं।
स्वकर निर्धारण का मौका दिया गया
नगर निगम अधिनियम-1959 के तहत भवन स्वामियाें से पहले स्वकर निर्धारण के लिए समय दिया था। इसमें मकान स्वामियों को मौका दिया गया था कि यदि उन्होंने अपने मकानों के क्षेत्रफल में फेरबदल किया हो, नया निर्माण कराया हो तो वह स्वत: कर निर्धारण कर सकते हैं। लेकिन, मकान स्वामियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और सिर्फ 175 मकान स्वामियों ने ही इसमें रुचि दिखाई थी। इस कारण नगर निगम ने अब सभी मकान स्वामियों से आपत्तियां मांग ली हैं।
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ऑनलाइन देख सकते हैं
यदि किसी मकान स्वामी को नगर निगम का नोटिस नहीं मिलता है और वह अपने मकान के हाउस टैक्स पर कोई आपत्ति दर्ज कराना चाहता है अथवा हाउस टैक्स देखना चाहता है तो वह नगर निगम की वेबसाइट www.jhansipropertytax.com पर देख सकते हैं। नगर निगम के सभी पटल सहायक, क्षेत्रीय वार्ड लिपिक के पास भी हाउस टैक्स की सूची है। उसे संबंधित मकान स्वामी देख सकता है और आपत्ति दर्ज करा सकता है।
यह साक्ष्य लगाएं
यदि किसी मकान स्वामी को हाउस टैक्स पर आपत्ति दर्ज करानी है तो वह नगर निगम में आवेदन करे, जिस पर अपना नाम, मकान संख्या, मोहल्ला, मोबाइल नंबर, ई मेल आईडी, जन्मतिथि, नोटिस संख्या अवश्य अंकित करे, ताकि उसे इधर-उधर न भटकना पड़े। प्रमाणित साक्ष्य/पूर्ण विवरण नक्शा संलग्न कर लिखित रूप से नगर निगम कार्यालय के भूतल पर खिड़की नंबर दो पर जमा कर रिसीविंग ले सकते हैं।
यह अंतिम मौका
जिस मकान स्वामी को अपने हाउस टैक्स पर कोई आपत्ति है तो वह तीन सितंबर तक लिखित रूप से आवेदन कर आपत्ति दर्ज करा सकता है। इसके बाद कोई सुनवाई नहीं होगी और प्रस्तावित वार्षिक मूल्यांकन की पुष्टि कर अभिलेखों में दर्ज कर दी जाएगी।
- प्रताप सिंह भदौरिया, नगर आयुक्त
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नगर निगम ने तीन सितंबर तक मांगी, 16 साल बाद शुरू हुई प्रक्रिया, डोर-टू-डोर जा रहे नोटिस
- दरें नहीं बढ़ीं, लेकिन मकान के क्षेत्रफल में फेरबदल से बढ़ेगा टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अगर आपको अपने भवन का हाउस टैक्स ज्यादा लगता है तो तीन सितंबर तक इस पर नगर निगम कार्यालय में आपत्ति दर्ज कराएं। नगर निगम गठन के बाद दूसरी बार हाउस टैक्स पर आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियों के लिए मकान स्वामियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जो डोर-टू-डोर बांटे जाने लगे हैं। खास बात यह है कि 16 साल बाद रिवाइज हो रहे हाउस टैक्स की दरें नहीं बढ़ाई गई हैं। लेकिन, यदि मकान के क्षेत्रफल में फेरबदल किया गया होगा तो टैक्स बढ़ना तय है।
नगर निगम का गठन 2002 में हुआ था। उसी समय हाउस टैक्स की दरें निर्धारित की गई थीं। नियमानुसार प्रत्येक चार साल में हाउस टैक्स निर्धारित किया जाना चाहिए, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण ऐसा नहीं हो सका है। इतना ही नहीं प्रत्येक वर्ष हाउस टैक्स में कम से कम पांच प्रतिशत की बढ़ोत्तरी होनी चाहिए थी, जो संभव नहीं हो सकी। इस तरह करीब 16 साल का समय बीत गया। शासन ने हाउस टैक्स नहीं बढ़ाने को गंभीरता से लिया और टैक्स निर्धारण के लिए सख्ती बरती, जिसका नतीजा यह हुआ कि नगर निगम ने मकान का क्षेत्रफल, निर्मित एरिया, यदि खाली प्लाट है तो उसका एरिया समेत कुल क्षेत्रफल का वार्षिक मूल्यांकन कर एक लाख 11 हजार मकान स्वामियों के नाम से नोटिस जारी किए और आपत्तियां मांग ली हैं।
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स्वकर निर्धारण का मौका दिया गया
नगर निगम अधिनियम-1959 के तहत भवन स्वामियाें से पहले स्वकर निर्धारण के लिए समय दिया था। इसमें मकान स्वामियों को मौका दिया गया था कि यदि उन्होंने अपने मकानों के क्षेत्रफल में फेरबदल किया हो, नया निर्माण कराया हो तो वह स्वत: कर निर्धारण कर सकते हैं। लेकिन, मकान स्वामियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और सिर्फ 175 मकान स्वामियों ने ही इसमें रुचि दिखाई थी। इस कारण नगर निगम ने अब सभी मकान स्वामियों से आपत्तियां मांग ली हैं।
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ऑनलाइन देख सकते हैं
यदि किसी मकान स्वामी को नगर निगम का नोटिस नहीं मिलता है और वह अपने मकान के हाउस टैक्स पर कोई आपत्ति दर्ज कराना चाहता है अथवा हाउस टैक्स देखना चाहता है तो वह नगर निगम की वेबसाइट www.jhansipropertytax.com पर देख सकते हैं। नगर निगम के सभी पटल सहायक, क्षेत्रीय वार्ड लिपिक के पास भी हाउस टैक्स की सूची है। उसे संबंधित मकान स्वामी देख सकता है और आपत्ति दर्ज करा सकता है।
यह साक्ष्य लगाएं
यदि किसी मकान स्वामी को हाउस टैक्स पर आपत्ति दर्ज करानी है तो वह नगर निगम में आवेदन करे, जिस पर अपना नाम, मकान संख्या, मोहल्ला, मोबाइल नंबर, ई मेल आईडी, जन्मतिथि, नोटिस संख्या अवश्य अंकित करे, ताकि उसे इधर-उधर न भटकना पड़े। प्रमाणित साक्ष्य/पूर्ण विवरण नक्शा संलग्न कर लिखित रूप से नगर निगम कार्यालय के भूतल पर खिड़की नंबर दो पर जमा कर रिसीविंग ले सकते हैं।
यह अंतिम मौका
जिस मकान स्वामी को अपने हाउस टैक्स पर कोई आपत्ति है तो वह तीन सितंबर तक लिखित रूप से आवेदन कर आपत्ति दर्ज करा सकता है। इसके बाद कोई सुनवाई नहीं होगी और प्रस्तावित वार्षिक मूल्यांकन की पुष्टि कर अभिलेखों में दर्ज कर दी जाएगी।
- प्रताप सिंह भदौरिया, नगर आयुक्त