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सिविक एमीनिटीज- स्मार्ट सिटी बनाने को कटेगी जेब-City
Updated Mon, 04 Sep 2017 10:32 PM IST
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सिविक एमीनिटीज
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अमर उजाला एक्सक्लूसिव
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स्मार्ट सिटी का लोगो
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स्मार्ट सिटी के लिए कटेगी ‘जनता की जेब’
सब हेड: जेडीए, जल संस्थान, बिजली व नगर निगम आय बढ़ाने के लिए लगाएंगे कर
क्रासर
- हाउस टैक्स से छूटे मकानों को दायरे में लाना होगा, मेट्रो ट्रेन की तरह लिया जा सकता अतिरिक्त टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
स्मार्ट सिटी को अमली जामा पहनाने में पैसे की कमी न हो, इसलिए जरूरी है कि नगर निगम, जलसंस्थान, जेडीए और बिजली विभाग को आमदनी के स्रोत बढ़ाने हैं। इनका बोझ आम जनता पर पड़ेगा। यह प्रत्यक्ष कर के रूप में भले ही दिखाई न दे, लेकिन जेब पर अतिरिक्त भार पड़ना तय है। इसके लिए हाउस टैक्स से छूटे मकानों को टैक्स के दायरे में लाना होगा। वहीं मेट्रो ट्रेन की तरह अतिरिक्त टैक्स भी लग सकता है। भारत सरकार ने यह जिम्मेदारी क्रिसिल कंपनी को सौंपी है, जो छह महीने में रिपोर्ट तैयार करेगी।
स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बाद शहर स्मार्ट कैसे बने, भारत सरकार ने क्रिसिल कंपनी को यह जिम्मेदारी सौंपी है। कंपनी का मानना है कि स्मार्ट सिटी की गतिविधियां शुरू होने से आसपास की जमीनों के दाम बढ़ जाएंगे। स्वाभाविक है कि दाम बढ़ेंगे तो जमीन के कारोबारियों की आय बढ़ेगी। इस आय से विभागों को क्या लाभ होगा और विभाग शहर के विकास में क्या खर्च करेंगे, इस पर कंपनी माथापच्ची कर रही है। कंपनी ने झांसी विकास प्राधिकरण, जल संस्थान, बिजली समेत अन्य राजस्व देने वाले विभाग अपनी आय बढ़ाने के लिए और क्या कर सकते हैं, इसका सर्वे शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, जीआईएस सर्वे के दौरान शहर में एक लाख दस हजार मकान चिह्नित किए गए थे। यह सर्वे करीब दस साल पहले हुआ था, इन दस सालों में मकानों की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई है। लेकिन, नगर निगम के हाउस टैक्स के दायरे में सभी मकान नहीं हैं, इसलिए टैक्स के दायरे से बाहर की संपत्तियों की गणना, इनके मालिकों का सही नाम व पता, वास्तविक निर्माण और हाउस टैक्स के अंतर का आकलन कर आय बढ़ाने के लिए सभी मकानों से हाउस टैक्स लिया जाएगा।
पुराना और नया शहर का आकलन
कंपनी एरिया वेस्ड डेवलपमेंट (क्षेत्र आधारित विकास) के तहत पुराना/ नया शहर एवं पेन सिटी परियोजना के अंतर्गत शहर में होने वाले विकास कार्यों का आकलन करेगी। यह देखा जाएगा कि सार्वजनिक शौचालयों से कितना यूजर चार्ज लिया जा सकता है। मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जाएंगी तो उनसे कितना चार्ज लिया जा सकता है।
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अंतिम निर्णय सरकार करेगी
क्रिसिल कंपनी शहर के विकास के लिए फ्रेमवर्क तैयार करेगी। इसके बाद सरकार तय करेगी कि आमदनी के लिए क्या फार्मूला अपनाना है।
- रवि पी.
डायरेक्टर, क्रिसिल
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स्मार्ट सिटी के लिए कटेगी ‘जनता की जेब’
सब हेड: जेडीए, जल संस्थान, बिजली व नगर निगम आय बढ़ाने के लिए लगाएंगे कर
क्रासर
- हाउस टैक्स से छूटे मकानों को दायरे में लाना होगा, मेट्रो ट्रेन की तरह लिया जा सकता अतिरिक्त टैक्स
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
स्मार्ट सिटी को अमली जामा पहनाने में पैसे की कमी न हो, इसलिए जरूरी है कि नगर निगम, जलसंस्थान, जेडीए और बिजली विभाग को आमदनी के स्रोत बढ़ाने हैं। इनका बोझ आम जनता पर पड़ेगा। यह प्रत्यक्ष कर के रूप में भले ही दिखाई न दे, लेकिन जेब पर अतिरिक्त भार पड़ना तय है। इसके लिए हाउस टैक्स से छूटे मकानों को टैक्स के दायरे में लाना होगा। वहीं मेट्रो ट्रेन की तरह अतिरिक्त टैक्स भी लग सकता है। भारत सरकार ने यह जिम्मेदारी क्रिसिल कंपनी को सौंपी है, जो छह महीने में रिपोर्ट तैयार करेगी।
स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलने के बाद शहर स्मार्ट कैसे बने, भारत सरकार ने क्रिसिल कंपनी को यह जिम्मेदारी सौंपी है। कंपनी का मानना है कि स्मार्ट सिटी की गतिविधियां शुरू होने से आसपास की जमीनों के दाम बढ़ जाएंगे। स्वाभाविक है कि दाम बढ़ेंगे तो जमीन के कारोबारियों की आय बढ़ेगी। इस आय से विभागों को क्या लाभ होगा और विभाग शहर के विकास में क्या खर्च करेंगे, इस पर कंपनी माथापच्ची कर रही है। कंपनी ने झांसी विकास प्राधिकरण, जल संस्थान, बिजली समेत अन्य राजस्व देने वाले विभाग अपनी आय बढ़ाने के लिए और क्या कर सकते हैं, इसका सर्वे शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, जीआईएस सर्वे के दौरान शहर में एक लाख दस हजार मकान चिह्नित किए गए थे। यह सर्वे करीब दस साल पहले हुआ था, इन दस सालों में मकानों की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई है। लेकिन, नगर निगम के हाउस टैक्स के दायरे में सभी मकान नहीं हैं, इसलिए टैक्स के दायरे से बाहर की संपत्तियों की गणना, इनके मालिकों का सही नाम व पता, वास्तविक निर्माण और हाउस टैक्स के अंतर का आकलन कर आय बढ़ाने के लिए सभी मकानों से हाउस टैक्स लिया जाएगा।
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पुराना और नया शहर का आकलन
कंपनी एरिया वेस्ड डेवलपमेंट (क्षेत्र आधारित विकास) के तहत पुराना/ नया शहर एवं पेन सिटी परियोजना के अंतर्गत शहर में होने वाले विकास कार्यों का आकलन करेगी। यह देखा जाएगा कि सार्वजनिक शौचालयों से कितना यूजर चार्ज लिया जा सकता है। मल्टीलेवल पार्किंग बनाई जाएंगी तो उनसे कितना चार्ज लिया जा सकता है।
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अंतिम निर्णय सरकार करेगी
क्रिसिल कंपनी शहर के विकास के लिए फ्रेमवर्क तैयार करेगी। इसके बाद सरकार तय करेगी कि आमदनी के लिए क्या फार्मूला अपनाना है।
- रवि पी.
डायरेक्टर, क्रिसिल