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ललितपुर: ट्रेन की कपलिंग पर बैठकर आठ दिनों तक भटकती रही मासूम नेहा, घर लौटी तो छलक पड़े मां के आंसू
Mon, 14 Dec 2020 01:05 PM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला नेटवर्क, ललितपुर
अमर उजाला नेटवर्क, ललितपुर
Published by: प्राची प्रियम
Updated Mon, 14 Dec 2020 01:05 PM IST
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नेहा के लौटने से खुश परिजन
- फोटो : अमर उजाला
खेल-खेल में ट्रेन पर चढ़ी 14 वर्षीय किशोरी नेहा रविवार को दोपहर में अपने घर पहुंच गई। उसके आते ही परिवार में खुशी छा गई। मां अपनी पुत्री को देखते ही रो पड़ी और उसे गले लगा लिया। इसके बाद उसके परिजन उसे लेकर कोतवाली चले गए, जहां पुलिस ने उससे पूछताछ की। दोपहर बाद उसकी मां उसे लेकर मंदिर गई और बेटी के लौटने पर प्रसाद चढ़ाया।
कोतवाली के अंतर्गत ग्राम सभा खांदी के मजरा गनेशपुरा निवासी रामजी लाल कुशवाहा की 14 वर्षीय किशोरी जो मानसिक रूप से कमजोर बताई जा रही है। एक दिसंबर को खेल-खेल में ट्रेन की कपलिंग पर बैठकर कानपुर पहुंच गई थी। जो आठ दिन कई ट्रेनों की कपलिंग पर घूमती रही।
उसे कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस से उतार कर चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया गया था। जैसे ही नेहा के कानपुर में मिलने की सूचना उसके पिता रामजी लाल को मिली, वह उसे लेने अपने कुछ परिजनों के साथ कानपुर के लिए शुक्रवार को घर से निकल पड़े।
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कोरोना गाइड लाइन के तहत शुक्रवार को तालबेहट रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में उन लोगों को चढ़ने नहीं दिया गया। इस कारण वह शनिवार को कानपुर गए। रविवार को जब नेहा के पिता रामजी लाल उसे लेकर अपने घर पहुंचे तो पूरे परिवार में खुशी छा गई। परिजनों के अलावा ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रघुराज यादव सहित आसपास के लोग रामजी के घर पहुंचे।
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कोतवाली के अंतर्गत ग्राम सभा खांदी के मजरा गनेशपुरा निवासी रामजी लाल कुशवाहा की 14 वर्षीय किशोरी जो मानसिक रूप से कमजोर बताई जा रही है। एक दिसंबर को खेल-खेल में ट्रेन की कपलिंग पर बैठकर कानपुर पहुंच गई थी। जो आठ दिन कई ट्रेनों की कपलिंग पर घूमती रही।
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उसे कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस से उतार कर चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया गया था। जैसे ही नेहा के कानपुर में मिलने की सूचना उसके पिता रामजी लाल को मिली, वह उसे लेने अपने कुछ परिजनों के साथ कानपुर के लिए शुक्रवार को घर से निकल पड़े।
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कोरोना गाइड लाइन के तहत शुक्रवार को तालबेहट रेलवे स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में उन लोगों को चढ़ने नहीं दिया गया। इस कारण वह शनिवार को कानपुर गए। रविवार को जब नेहा के पिता रामजी लाल उसे लेकर अपने घर पहुंचे तो पूरे परिवार में खुशी छा गई। परिजनों के अलावा ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रघुराज यादव सहित आसपास के लोग रामजी के घर पहुंचे।
आर्थिक तंगी के चलते परिजन नहीं करा पा रहे हैं उसका उपचार
घर में नेहा के दादा पूरन कुशवाहा जो सेवानिवृत्त रेल कर्मचारी हैं। उन्होंने बताया कि उनके चार पुत्र हैं। सभी अलग रहते हैं। सभी के पास दो एकड़ से कम खेती है। रामजी मजदूरी करता है। नेहा तीन बहन और एक भाई है। नेहा सबसे बड़ी है और बेटा शिवम सबसे छोटा है।
कक्षा सात तक पढ़ाई करने के बाद नेहा ने पढ़ना छोड़ दिया। एक बार उसे लेकर उपचार के लिए सीएचसी गए थे लेकिन लाभ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि वह किसी योग्य मानसिक चिकित्सक से उसका उपचार कराना चाहते हैं लेकिन इतना पैसा उनके पास नहीं है। तंगी के कारण नेहा का इलाज नहीं करा पा रहे हैं।
कक्षा सात तक पढ़ाई करने के बाद नेहा ने पढ़ना छोड़ दिया। एक बार उसे लेकर उपचार के लिए सीएचसी गए थे लेकिन लाभ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि वह किसी योग्य मानसिक चिकित्सक से उसका उपचार कराना चाहते हैं लेकिन इतना पैसा उनके पास नहीं है। तंगी के कारण नेहा का इलाज नहीं करा पा रहे हैं।