{"_id":"5c8eb0f4bdec2213eb73796e","slug":"131552855284-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अवैध वैंडर बेच रहे घटिया खाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अवैध वैंडर बेच रहे घटिया खाना
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अवैध वेंडर बेच रहे घटिया खाना
झांसी। बार कोड लगने के बाद जहां अवैध वेंडरों पर लगाम लगेगी, वहीं घटिया खाना परोसने वालों की भी पोल खुलेगी। बिना बार कोड वाले खाने को भी यात्री नहीं लेंगे, जिससे घटिया खाना परोेसने वालों की तादाद में भी कमी आएगी।
झांसी मंडल में अवैध वेंडरों की भरमार बढ़ती जा रही है। यह खेल झांसी से शुरू होकर बीना, ग्वालियर, उरई व बांदा तक चलता है। अधिकारियों की लाख सख्ती के बाद भी धड़ल्ले से अवैैध कारोबार जारी है। खुले मैदान औैर टूटे रेलवे क्वार्टरों पर कब्जा कर खाना तैयार किया जा रहा है। इसको अवैध वेंडर स्टेशन पर बेच रहे हैं। ऐसे में बार कोड लागू होने के बाद अवैध वेंडरों को खाना बेचना मुश्किल हो जाएगा। वर्तमान में ट्रेनों के दौरान घटिया व बासा खाना बेचने की शिकायतें लगातार रेलवे के पास आ रही हैं, जिसे देखते हुए लगाम लगाने के लिए यह कदम रेलवे ने उठाया है। झांसी स्टेशन पर आईआरसीटीसी का एक बेस किचिन है। जल्द ही यहीं से ट्रेनों में बार कोड लगाकर खाना यात्रियों को परोसा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक बार कोड से किसी तरह की छेड़छाड़ भी नहीं हो सकेगी।
यह होगा फायदा
- यात्रियों को ताजा भोजन मिलेगा।
- ट्रेनों व स्टेशनों पर यात्रियों से ओवरचार्जिंग की शिकायत दूर होगी।
- अवैध वेंडरों पर रोक लगेगी।
यह होता है बार कोड
बार कोड किसी आंकड़े या सूचना को मशीन से पढ़े जाने योग्य बनाने का तरीका है। बार कोड को वन डाइमेंशनल रेखाओं में बनाया जाता है। इसमें लाइनों के साथ लिखे अंकों की भूमिका अहम होती है। बार कोड स्कैनर में एक रीडर होता है, जो अंकों और बार कोड के जरिए उसे एक विशेष डाटा से जोड़ देता है। जो उस आइटम की कीमत और उसकी मात्रा की जानकारी बताते हैं। जीएस-1 (बारकोड गुणवत्ता जांचने का तरीका) इन अंकों की रिपॉजिटिंग करता है। बार कोड के फूड प्रोडक्ट में उपयोग के तीन बड़े फायदे हैं। इसमें असली-नकली की पहचान, वैद्यता और पता लगाना प्रमुख हैं।
विज्ञापन
साबरमती एक्सप्रेस में अवैध वेंडर यात्रियों से भिड़े
- घटिया खाना देेने पर हुआ हंगामा, अधिकारियों से शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। साबरमती एक्सप्रेस में अवैध वेंडरों द्वारा घटिया खाना बेचने पर यात्रियों से विवाद हो गया। यात्रियों ने हंगामा कर अधिकारियों से शिकायत की। झांसी आने से पहले आउटर पर उतरकर अवैध वेंडर भाग निकले।
रविवार को साबरमती एक्सप्र्रेस के कोच एस-7 में बबीना से सवार हुए अवैध वेंडरों ने एक दर्जन से अधिक यात्रियों को खाना बेचा। इसमें दो यात्रियों के खाने की थाली से दुर्गंध आ रही थी, जिस पर यात्रियों ने अवैध वेंडरों से थाली वापस करने को कहा। अवैध वेंडरों के थाली लेने से मना करने पर विवाद हो गया, जिस पर यात्रियोें ने हंगामा कर दिया। इससे यात्रियों व अवैध वैंडरों के बीच मारपीट की स्थिति पैैदा हो गई। मामला बिगड़ता देख अवैध वेंडर कोच के अंदर से भागने लगे। आउटर पर ट्रेन धीमी होने पर अवैध वेंडर उतरकर भाग गए। मोबाइल के जरिए यात्रियोें ने अधिकारियों को भी खबर दी, लेकिन अवैध वेंडर आरपीएफ के हाथ नहीं आ सके।
विज्ञापन
झांसी। बार कोड लगने के बाद जहां अवैध वेंडरों पर लगाम लगेगी, वहीं घटिया खाना परोसने वालों की भी पोल खुलेगी। बिना बार कोड वाले खाने को भी यात्री नहीं लेंगे, जिससे घटिया खाना परोेसने वालों की तादाद में भी कमी आएगी।
झांसी मंडल में अवैध वेंडरों की भरमार बढ़ती जा रही है। यह खेल झांसी से शुरू होकर बीना, ग्वालियर, उरई व बांदा तक चलता है। अधिकारियों की लाख सख्ती के बाद भी धड़ल्ले से अवैैध कारोबार जारी है। खुले मैदान औैर टूटे रेलवे क्वार्टरों पर कब्जा कर खाना तैयार किया जा रहा है। इसको अवैध वेंडर स्टेशन पर बेच रहे हैं। ऐसे में बार कोड लागू होने के बाद अवैध वेंडरों को खाना बेचना मुश्किल हो जाएगा। वर्तमान में ट्रेनों के दौरान घटिया व बासा खाना बेचने की शिकायतें लगातार रेलवे के पास आ रही हैं, जिसे देखते हुए लगाम लगाने के लिए यह कदम रेलवे ने उठाया है। झांसी स्टेशन पर आईआरसीटीसी का एक बेस किचिन है। जल्द ही यहीं से ट्रेनों में बार कोड लगाकर खाना यात्रियों को परोसा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक बार कोड से किसी तरह की छेड़छाड़ भी नहीं हो सकेगी।
विज्ञापन
यह होगा फायदा
- यात्रियों को ताजा भोजन मिलेगा।
- ट्रेनों व स्टेशनों पर यात्रियों से ओवरचार्जिंग की शिकायत दूर होगी।
- अवैध वेंडरों पर रोक लगेगी।
यह होता है बार कोड
बार कोड किसी आंकड़े या सूचना को मशीन से पढ़े जाने योग्य बनाने का तरीका है। बार कोड को वन डाइमेंशनल रेखाओं में बनाया जाता है। इसमें लाइनों के साथ लिखे अंकों की भूमिका अहम होती है। बार कोड स्कैनर में एक रीडर होता है, जो अंकों और बार कोड के जरिए उसे एक विशेष डाटा से जोड़ देता है। जो उस आइटम की कीमत और उसकी मात्रा की जानकारी बताते हैं। जीएस-1 (बारकोड गुणवत्ता जांचने का तरीका) इन अंकों की रिपॉजिटिंग करता है। बार कोड के फूड प्रोडक्ट में उपयोग के तीन बड़े फायदे हैं। इसमें असली-नकली की पहचान, वैद्यता और पता लगाना प्रमुख हैं।
विज्ञापन
साबरमती एक्सप्रेस में अवैध वेंडर यात्रियों से भिड़े
- घटिया खाना देेने पर हुआ हंगामा, अधिकारियों से शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। साबरमती एक्सप्रेस में अवैध वेंडरों द्वारा घटिया खाना बेचने पर यात्रियों से विवाद हो गया। यात्रियों ने हंगामा कर अधिकारियों से शिकायत की। झांसी आने से पहले आउटर पर उतरकर अवैध वेंडर भाग निकले।
रविवार को साबरमती एक्सप्र्रेस के कोच एस-7 में बबीना से सवार हुए अवैध वेंडरों ने एक दर्जन से अधिक यात्रियों को खाना बेचा। इसमें दो यात्रियों के खाने की थाली से दुर्गंध आ रही थी, जिस पर यात्रियों ने अवैध वेंडरों से थाली वापस करने को कहा। अवैध वेंडरों के थाली लेने से मना करने पर विवाद हो गया, जिस पर यात्रियोें ने हंगामा कर दिया। इससे यात्रियों व अवैध वैंडरों के बीच मारपीट की स्थिति पैैदा हो गई। मामला बिगड़ता देख अवैध वेंडर कोच के अंदर से भागने लगे। आउटर पर ट्रेन धीमी होने पर अवैध वेंडर उतरकर भाग गए। मोबाइल के जरिए यात्रियोें ने अधिकारियों को भी खबर दी, लेकिन अवैध वेंडर आरपीएफ के हाथ नहीं आ सके।