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अंतरात्मा में झांककर बीयू को आगे बढ़ाने की सोचें-City
Updated Mon, 30 Oct 2017 09:27 PM IST
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कुलसचिव ने ली एसएफएस शिक्षकों की ‘क्लास’
बोले, अंतरात्मा में झांककर बीयू को आगे बढ़ाने की सोचें
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की बैठक के बाद कुलसचिव सीपी तिवारी ने सोमवार को स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत (एसएफएस) कार्यरत शिक्षकों की बैठक की। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वह अपनी अंतरात्मा में झांककर सोचें कि विश्वविद्यालय को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं।
गांधी ऑडिटोरियम में दोपहर एक बजे से एसएफएस शिक्षकों की बैठक शुरू हुई। सबसे पहले सभी शिक्षकों का कुलसचिव ने परिचय जाना। कर्मचारियों की बैठक की तरह इस बार कुलसचिव ने सख्त लहजे का तो प्रयोग नहीं किया लेकिन इशारों-इशारों में शिक्षकों को कर्तव्य बोध जरूर करा दिया। शिक्षकों को संबोधित करते हुए बोले कि परिजन शिक्षण संस्थानों की साख को ध्यान में रखकर अपने बच्चों का प्रवेश कराते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय के उत्थान के लिए सबको प्रयासरत रहना चाहिए। सभी शिक्षक अपने दायित्व समझते हैं, इसलिए छात्र-छात्राओं को अधिक से अधिक ज्ञानवान बनाएं। विश्वविद्यालय में छोटे से कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी तक का महत्व है। आपसी सद्भाव के साथ काम करें। चूंकि, वह सिटी मजिस्ट्रेट भी हैं, इसलिए उन्होंने बतौर प्रशासनिक अधिकारी शिक्षकों की समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया।
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कुलसचिव ने ली एसएफएस शिक्षकों की ‘क्लास’
बोले, अंतरात्मा में झांककर बीयू को आगे बढ़ाने की सोचें
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की बैठक के बाद कुलसचिव सीपी तिवारी ने सोमवार को स्ववित्त पोषित योजनांतर्गत (एसएफएस) कार्यरत शिक्षकों की बैठक की। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वह अपनी अंतरात्मा में झांककर सोचें कि विश्वविद्यालय को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं।
गांधी ऑडिटोरियम में दोपहर एक बजे से एसएफएस शिक्षकों की बैठक शुरू हुई। सबसे पहले सभी शिक्षकों का कुलसचिव ने परिचय जाना। कर्मचारियों की बैठक की तरह इस बार कुलसचिव ने सख्त लहजे का तो प्रयोग नहीं किया लेकिन इशारों-इशारों में शिक्षकों को कर्तव्य बोध जरूर करा दिया। शिक्षकों को संबोधित करते हुए बोले कि परिजन शिक्षण संस्थानों की साख को ध्यान में रखकर अपने बच्चों का प्रवेश कराते हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय के उत्थान के लिए सबको प्रयासरत रहना चाहिए। सभी शिक्षक अपने दायित्व समझते हैं, इसलिए छात्र-छात्राओं को अधिक से अधिक ज्ञानवान बनाएं। विश्वविद्यालय में छोटे से कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी तक का महत्व है। आपसी सद्भाव के साथ काम करें। चूंकि, वह सिटी मजिस्ट्रेट भी हैं, इसलिए उन्होंने बतौर प्रशासनिक अधिकारी शिक्षकों की समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया।
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