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गोद लेकर गांव में नहीं गईं उमा-City
Updated Sun, 18 Jun 2017 10:27 PM IST
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लोगो जरूर लगाएं
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गोद लिए गांव को भूलीं उमा भारती
सब हेड: एक साल पहले चिरगांव के करगुवां को लिया था गोद
- आवास, शौचालय की आस में ग्रामीण हुए हताश
- अपात्रों को योजनाओं का लाभ मिलने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती चिरगांव के करगुवां गांव को गोद लेने के बाद लगता है भूल गई हैं। गांव गोद लिए लगभग साल भर होने को आ रहे हैं मगर सांसद ने अब तक गांव की चौखट पर दस्तक नहीं दी है। गांव का हाल ये है कि कई गरीब किसान, मजदूरों के पास सर ढकने को पक्की छत भी नहीं है। शौचालय भी नहीं बन सके हैं। ‘अमर उजाला’ ने जब गांव जाकर हकीकत परखी तो ग्रामीणों ने दुखड़ा सुनाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सांसदों को ‘गांव’ गोद लेकर उसे ‘आदर्श’ बनाने की योजना के तहत देश भर में सांसदों ने गांव गोद लेकर उसे संवारने की कोशिश की। झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट से सांसद केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरोद्धार मंत्री उमा भारती ने लगभग एक साल पहले सात हजार की आबादी वाले चिरगांव के करगुवां गांव में विकास कराने के लिए उसे गोद ले लिया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव गोद लेने के बाद सांसद यहां नहीं आई हैं। गांव में समस्याओं का अंबार है। रूपेंद्र, जयहिंद कुमार, सावित्री देवी समेत कई ग्रामीण ऐसे हैं, जिनके पास सर ढकने को पक्की छत तक नहीं है। किसी तरह कच्चा मकान बनाकर लोग रह रहे हैं। सालों से आवास की आस लगाए ग्रामीण अब हताश हो चुके हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक सरकार द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं में लाभ अपात्रों को मिला है। ओडीएफ गांव होने के कारण इसे खुले में शौच मुक्त होना चाहिए। मगर अभी भी 300 शौचालय गांव में बनने शेष हैं। हालांकि, 100 शौचालय बनने के लिए पैसा आ चुका है। साथ ही आवासों के लिए सर्वे भी शुरू हो गया है।
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गांव एक नजर में
.......................
घर- 700
आबादी- 7,000
बीपीएल- 650
अंत्योदय- 121
ग्रामीण बोले
.................
10 साल हुए पर आवास नहीं
पैर से विकलांग और बीपीएल कार्ड धारक हूं। परिवार में सात लोग हैं। गांव में दस साल से रह रही हूं मगर अब तक आवास नहीं मिला है। अब किसी तरह मेहनत-मजदूरी कर कुछ पैसे जुटाए हैं, उनसे थोड़ा-थोड़ा आवास बनवा रही हूं।
समुद्रा रायकवार
बीस साल से नहीं है घर
गांव में रहते हुए लगभग बीस साल हो गए हैं। घर में पति, चार बेटियां और एक बेटा रहता है। बीपीएल कार्ड धारक होने के बावजूद आज तक घर में शौचालय नहीं बन सका है। इसलिए काफी परेशानी का समाना करना पड़ता है।
राजाबेटी
उमा आएं तो हम समस्याएं बताएं
उमा भारती जब चुनाव में खड़ी हुईं थीं, तब गांव में घूमकर लोगों से वोट मांगे थे। जब से गांव को गोद लिया है, तब से यहां नहीं आई हैं। अगर गांव आएंगी तो उन्हें समस्याएं बताएंगे। हो सकता है हमारा भला हो जाए।
सियाराम अहिरवार
भूमिहीन हैं, आवास भी नहीं
भूमिहीन हूं, बावजूद रहने के लिए आवास योजना का लाभ नहीं है। किसी तरह पालीथिन के नीचे अपना गुजारा कर रहा हूं। पक्की छत न होने से बारिश में बहुत परेशानी होती है। पालीथिन से पानी टपकता है।
जसवंत सिंह
सबसे की शिकायत, सुनवाई नहीं
घर में शौचालय नहीं बन सका है। हर स्तर पर अधिकारियों से मिलकर शिकायत की जा चुकी है। कहीं भी सुनवाई नहीं होती है। पता ही नहीं चलता कि सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाएं कहां चली जाती हैं।
उर्मिला वर्मा
मैंने किसी अपात्र को नहीं दिया फायदा
पिछले डेढ़ साल के अपने कार्यकाल में 166 ग्रामीणों के लिए शौचालय बनवाए हैं। अक्तूबर तक 300 और बनने हैं। इनमें से 100 शौचालय का पैसा भी आ गया है। बालू नहीं आने के कारण अब तक निर्माण रुका हुआ था, मगर अब तेजी से कार्य किया जाएगा। मैंने किसी भी अपात्र को लाभ नहीं दिया। आवासों का आवंटन 2011 में बनी बेसलाइन सर्वे के आधार पर जो पात्र मिले, वैसे हुआ। अब फिर से सर्वे शुरू हो गया है। सर्वे कार्य पूरा कर जल्द अधिकारियों को रिपोर्ट दी जाएगी।
- अमित राजपूत, प्रधान
अबकी आऊंगी तो जरूर जाऊंगी
एक सप्ताह बाद ओएसडी को करगुंवा भेजा जाएगा। पता करवाया जाएगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा या नहीं। हर हाल में पात्र को लाभ दिलाया जाएगा। मैं भी जब झांसी आऊंगी, तो गांव जरूर जाऊंगी।
- उमा भारती, सांसद एवं केंद्रीय मंत्री
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गोद लिए गांव को भूलीं उमा भारती
सब हेड: एक साल पहले चिरगांव के करगुवां को लिया था गोद
- आवास, शौचालय की आस में ग्रामीण हुए हताश
- अपात्रों को योजनाओं का लाभ मिलने का आरोप
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
सांसद और केंद्रीय मंत्री उमा भारती चिरगांव के करगुवां गांव को गोद लेने के बाद लगता है भूल गई हैं। गांव गोद लिए लगभग साल भर होने को आ रहे हैं मगर सांसद ने अब तक गांव की चौखट पर दस्तक नहीं दी है। गांव का हाल ये है कि कई गरीब किसान, मजदूरों के पास सर ढकने को पक्की छत भी नहीं है। शौचालय भी नहीं बन सके हैं। ‘अमर उजाला’ ने जब गांव जाकर हकीकत परखी तो ग्रामीणों ने दुखड़ा सुनाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सांसदों को ‘गांव’ गोद लेकर उसे ‘आदर्श’ बनाने की योजना के तहत देश भर में सांसदों ने गांव गोद लेकर उसे संवारने की कोशिश की। झांसी-ललितपुर लोकसभा सीट से सांसद केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनरोद्धार मंत्री उमा भारती ने लगभग एक साल पहले सात हजार की आबादी वाले चिरगांव के करगुवां गांव में विकास कराने के लिए उसे गोद ले लिया। ग्रामीणों ने बताया कि गांव गोद लेने के बाद सांसद यहां नहीं आई हैं। गांव में समस्याओं का अंबार है। रूपेंद्र, जयहिंद कुमार, सावित्री देवी समेत कई ग्रामीण ऐसे हैं, जिनके पास सर ढकने को पक्की छत तक नहीं है। किसी तरह कच्चा मकान बनाकर लोग रह रहे हैं। सालों से आवास की आस लगाए ग्रामीण अब हताश हो चुके हैं।
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ग्रामीणों के मुताबिक सरकार द्वारा चलाई जा रहीं विभिन्न योजनाओं में लाभ अपात्रों को मिला है। ओडीएफ गांव होने के कारण इसे खुले में शौच मुक्त होना चाहिए। मगर अभी भी 300 शौचालय गांव में बनने शेष हैं। हालांकि, 100 शौचालय बनने के लिए पैसा आ चुका है। साथ ही आवासों के लिए सर्वे भी शुरू हो गया है।
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गांव एक नजर में
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घर- 700
आबादी- 7,000
बीपीएल- 650
अंत्योदय- 121
ग्रामीण बोले
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10 साल हुए पर आवास नहीं
पैर से विकलांग और बीपीएल कार्ड धारक हूं। परिवार में सात लोग हैं। गांव में दस साल से रह रही हूं मगर अब तक आवास नहीं मिला है। अब किसी तरह मेहनत-मजदूरी कर कुछ पैसे जुटाए हैं, उनसे थोड़ा-थोड़ा आवास बनवा रही हूं।
समुद्रा रायकवार
बीस साल से नहीं है घर
गांव में रहते हुए लगभग बीस साल हो गए हैं। घर में पति, चार बेटियां और एक बेटा रहता है। बीपीएल कार्ड धारक होने के बावजूद आज तक घर में शौचालय नहीं बन सका है। इसलिए काफी परेशानी का समाना करना पड़ता है।
राजाबेटी
उमा आएं तो हम समस्याएं बताएं
उमा भारती जब चुनाव में खड़ी हुईं थीं, तब गांव में घूमकर लोगों से वोट मांगे थे। जब से गांव को गोद लिया है, तब से यहां नहीं आई हैं। अगर गांव आएंगी तो उन्हें समस्याएं बताएंगे। हो सकता है हमारा भला हो जाए।
सियाराम अहिरवार
भूमिहीन हैं, आवास भी नहीं
भूमिहीन हूं, बावजूद रहने के लिए आवास योजना का लाभ नहीं है। किसी तरह पालीथिन के नीचे अपना गुजारा कर रहा हूं। पक्की छत न होने से बारिश में बहुत परेशानी होती है। पालीथिन से पानी टपकता है।
जसवंत सिंह
सबसे की शिकायत, सुनवाई नहीं
घर में शौचालय नहीं बन सका है। हर स्तर पर अधिकारियों से मिलकर शिकायत की जा चुकी है। कहीं भी सुनवाई नहीं होती है। पता ही नहीं चलता कि सरकार की ओर से चलाई जा रही योजनाएं कहां चली जाती हैं।
उर्मिला वर्मा
मैंने किसी अपात्र को नहीं दिया फायदा
पिछले डेढ़ साल के अपने कार्यकाल में 166 ग्रामीणों के लिए शौचालय बनवाए हैं। अक्तूबर तक 300 और बनने हैं। इनमें से 100 शौचालय का पैसा भी आ गया है। बालू नहीं आने के कारण अब तक निर्माण रुका हुआ था, मगर अब तेजी से कार्य किया जाएगा। मैंने किसी भी अपात्र को लाभ नहीं दिया। आवासों का आवंटन 2011 में बनी बेसलाइन सर्वे के आधार पर जो पात्र मिले, वैसे हुआ। अब फिर से सर्वे शुरू हो गया है। सर्वे कार्य पूरा कर जल्द अधिकारियों को रिपोर्ट दी जाएगी।
- अमित राजपूत, प्रधान
अबकी आऊंगी तो जरूर जाऊंगी
एक सप्ताह बाद ओएसडी को करगुंवा भेजा जाएगा। पता करवाया जाएगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा या नहीं। हर हाल में पात्र को लाभ दिलाया जाएगा। मैं भी जब झांसी आऊंगी, तो गांव जरूर जाऊंगी।
- उमा भारती, सांसद एवं केंद्रीय मंत्री