{"_id":"596a2d3e4f1c1ba1238b4995","slug":"11500130622-jhansi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महापौर से बातचीत-City","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महापौर से बातचीत-City
Updated Sat, 15 Jul 2017 08:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टैग: बातचीत
------------
महापौर को सिटी बस नहीं चल पाने मलाल
सब हेड: बोलीं, पांच साल में ‘क्लीन झांसी’ का संकल्प हुआ पूरा
क्रासर
पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर स्मार्ट सिटी में शामिल होने को बताई बड़ी उपलब्धि
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुकसेलर परिवार की साधारण गृहस्थ महिला किरन वर्मा ने 20 जुलाई 2012 को महापौर पद की शपथ ली थी। अपने पांच साल के कार्यकाल में क्लीन झांसी का संकल्प पूरा करने और स्मार्ट सिटी में शामिल होने को बड़ी उपलब्धि मानती हैं। महापौर को शहर में सिटी बस नहीं चला पाने का भी मलाल है।
07 अगस्त 2012 को सदन की पहली बैठक में पार्षदों ने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर जमकर हंगामा किया था। उन्होंने एक सुर में सफाई कर्मचारियों, हवलदारों एवं सफाई निरीक्षकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सबके तबादले करने, सफाई उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था और शहर को गंदगी से मुक्त करने की आवाज उठाई थी, तब उन्होंने संकल्प लिया था कि शहर को ‘क्लीन झांसी’ बनाएंगे। उनका यह संकल्प बृहस्पतिवार 04 मई 2017 को पूरा हो सका और स्वच्छता के मामले मेें शहर को प्रदेश में तीसरा स्थान मिला। ‘अमर उजाला’ ने पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर उनसे बातचीत की।
सवाल - अपने कार्यकाल को आप कैसा मानती हैं?
जवाब - उन्होंने जनहित के कार्य करने का पूरा प्रयास किया। झांसी को स्वच्छता सर्वे में उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान मिला। स्मार्ट सिटी का दर्जा मिल गया। जब मुहिम चलाई थी तो लोग हंसते थे कि इतना पिछड़ा शहर कैसे स्मार्ट सिटी बन जाएगा, लेकिन सपना पूरा हो गया।
विज्ञापन
सवाल - आपके कार्यकाल की मुख्य उपलब्धियां क्या हैं?
जवाब - कार्यकाल की मुख्य उपलब्धि शहर का स्मार्ट सिटी घोषित होना है। इसके अलावा शहर में 42 पार्क विकसित किए, 13 श्मशान घाट और 08 कब्रिस्तानों की स्थिति में सुधार आया है। पहले बरसात होने पर शव को जलाने की दिक्कत आती थी, लेकिन अब शेड बन गए हैं। कानपुर रोड पर रिसाला चुंगी से मेडिकल कॉलेज तक, जीआईसी से ग्वालियर रोड क्रासिंग तक और बीकेडी से चित्रा चौराहा पर हरित पट्टी बनवाई। इससे न केवल पर्यावरण शुद्ध रहेगा, बल्कि सड़क किनारे अतिक्रमण भी नहीं होगा। 28 शौचालय बनवाए, जिससे खुले में शौच जाने वालों में कमी आई है। कानपुर बाईपास पर पार्क और 24 लाख रुपये अष्टधातु की वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई की प्रतिमा लगवाई। एसपीआई इंटर कालेज के सामने वीरांगना झलवाई बाई पार्क को तोड़कर फिर से बनवाया और 16 लाख रुपये से वीरांगना झलकारी बाई की अष्टधातु की प्रतिमा लगवाई।
सवाल - कौन सा कार्य पूरा नहीं करा सकीं?
जवाब - मैंने अपने चुनाव घोषणा पत्र में सिटी बस चलाने का वादा किया था, लेकिन इसे पूरा नहीं कर सकीं। सदन की बैठक में सिटी बस चलाने का प्रस्ताव पारित हो गया था। बाद में प्रस्ताव को शासन के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया। जहां नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां ने 01 जनवरी 2015 को प्रस्ताव अस्वीकृत कर दिया। उनका तर्क था कि शहर की सड़कें सिटी बस स्तर की नहीं है। सड़कें इतनी चौड़ी नहीं हैं कि सिटी बस चल सकें। इसके बाद उन्होंने सड़कों पर ध्यान दिया, लेकिन समय इतना कम बचा था कि सड़कों को सिटी बस के मानक के अनुसार नहीं बनाया जा सका।
सवाल - चुनाव लड़ने की क्या रणनीति है?
जवाब - चुनाव लड़ना या न लड़ना पार्टी हाईकमान के निर्देश पर निर्भर करता है। यदि पार्टी आदेश देगी तो चुनाव जरूर लड़ेंगे अन्यथा समाजसेवा करेंगे। अपने स्तर से जरूरतमंदों की पूरी मदद करेंगी और पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।
सवाल - प्रदेश में सपा सरकार से काम पर क्या असर पड़ा?
जवाब - स्थानीय स्तर पर समाजवादी पार्टी के नेताओं का कोई दखल नहीं रहा। पौने पांच साल तक सपा कार्यकाल के दौरान पार्टी के किसी नेता ने उन्हें फोन नहीं किया। इसलिए उनके ऊपर कोई दबाव नहीं रहा। हाँ, पार्षद जरूर सदन की बैठकों में हंगामा मचाते रहे, लेकिन वह भी बात मानते थे। इसलिए उनके साथ बेहतर माहौल रहा।
कार्यकाल पूरा होने पर असमंजस
महापौर किरन वर्मा ने 20 जुलाई 2012 को शपथ ली थी। इस हिसाब से उनका कार्यकाल 20 जुलाई को पूरा हो जाना चाहिए। महापौर का तर्क है कि जिस दिन पहली सदन की बैठक हुई थी, उस दिन से कार्यकाल शुरू होता है। उनके कार्यकाल में सदन की पहली बैठक 07 अगस्त 2012 को हुई थी। इसलिए वह इसी तारीख तक कार्यकाल मानती हैं।
शासन के निर्देश का इंतजार
नगर आयुक्त प्रताप सिंह भदौरिया भी कार्यकाल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर सके। उनका कहना था कि महापौर के कार्यकाल के बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं, शासन के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। जैसा निर्देश आएगा, उसी हिसाब से निर्णय लिया जाएगा।
विज्ञापन
------------
महापौर को सिटी बस नहीं चल पाने मलाल
सब हेड: बोलीं, पांच साल में ‘क्लीन झांसी’ का संकल्प हुआ पूरा
क्रासर
पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर स्मार्ट सिटी में शामिल होने को बताई बड़ी उपलब्धि
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
बुकसेलर परिवार की साधारण गृहस्थ महिला किरन वर्मा ने 20 जुलाई 2012 को महापौर पद की शपथ ली थी। अपने पांच साल के कार्यकाल में क्लीन झांसी का संकल्प पूरा करने और स्मार्ट सिटी में शामिल होने को बड़ी उपलब्धि मानती हैं। महापौर को शहर में सिटी बस नहीं चला पाने का भी मलाल है।
07 अगस्त 2012 को सदन की पहली बैठक में पार्षदों ने शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर जमकर हंगामा किया था। उन्होंने एक सुर में सफाई कर्मचारियों, हवलदारों एवं सफाई निरीक्षकों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सबके तबादले करने, सफाई उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था और शहर को गंदगी से मुक्त करने की आवाज उठाई थी, तब उन्होंने संकल्प लिया था कि शहर को ‘क्लीन झांसी’ बनाएंगे। उनका यह संकल्प बृहस्पतिवार 04 मई 2017 को पूरा हो सका और स्वच्छता के मामले मेें शहर को प्रदेश में तीसरा स्थान मिला। ‘अमर उजाला’ ने पांच साल का कार्यकाल पूरा होने पर उनसे बातचीत की।
विज्ञापन
सवाल - अपने कार्यकाल को आप कैसा मानती हैं?
जवाब - उन्होंने जनहित के कार्य करने का पूरा प्रयास किया। झांसी को स्वच्छता सर्वे में उत्तर प्रदेश में तीसरा स्थान मिला। स्मार्ट सिटी का दर्जा मिल गया। जब मुहिम चलाई थी तो लोग हंसते थे कि इतना पिछड़ा शहर कैसे स्मार्ट सिटी बन जाएगा, लेकिन सपना पूरा हो गया।
विज्ञापन
सवाल - आपके कार्यकाल की मुख्य उपलब्धियां क्या हैं?
जवाब - कार्यकाल की मुख्य उपलब्धि शहर का स्मार्ट सिटी घोषित होना है। इसके अलावा शहर में 42 पार्क विकसित किए, 13 श्मशान घाट और 08 कब्रिस्तानों की स्थिति में सुधार आया है। पहले बरसात होने पर शव को जलाने की दिक्कत आती थी, लेकिन अब शेड बन गए हैं। कानपुर रोड पर रिसाला चुंगी से मेडिकल कॉलेज तक, जीआईसी से ग्वालियर रोड क्रासिंग तक और बीकेडी से चित्रा चौराहा पर हरित पट्टी बनवाई। इससे न केवल पर्यावरण शुद्ध रहेगा, बल्कि सड़क किनारे अतिक्रमण भी नहीं होगा। 28 शौचालय बनवाए, जिससे खुले में शौच जाने वालों में कमी आई है। कानपुर बाईपास पर पार्क और 24 लाख रुपये अष्टधातु की वीरांगना महारानी लक्ष्मी बाई की प्रतिमा लगवाई। एसपीआई इंटर कालेज के सामने वीरांगना झलवाई बाई पार्क को तोड़कर फिर से बनवाया और 16 लाख रुपये से वीरांगना झलकारी बाई की अष्टधातु की प्रतिमा लगवाई।
सवाल - कौन सा कार्य पूरा नहीं करा सकीं?
जवाब - मैंने अपने चुनाव घोषणा पत्र में सिटी बस चलाने का वादा किया था, लेकिन इसे पूरा नहीं कर सकीं। सदन की बैठक में सिटी बस चलाने का प्रस्ताव पारित हो गया था। बाद में प्रस्ताव को शासन के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया। जहां नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां ने 01 जनवरी 2015 को प्रस्ताव अस्वीकृत कर दिया। उनका तर्क था कि शहर की सड़कें सिटी बस स्तर की नहीं है। सड़कें इतनी चौड़ी नहीं हैं कि सिटी बस चल सकें। इसके बाद उन्होंने सड़कों पर ध्यान दिया, लेकिन समय इतना कम बचा था कि सड़कों को सिटी बस के मानक के अनुसार नहीं बनाया जा सका।
सवाल - चुनाव लड़ने की क्या रणनीति है?
जवाब - चुनाव लड़ना या न लड़ना पार्टी हाईकमान के निर्देश पर निर्भर करता है। यदि पार्टी आदेश देगी तो चुनाव जरूर लड़ेंगे अन्यथा समाजसेवा करेंगे। अपने स्तर से जरूरतमंदों की पूरी मदद करेंगी और पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।
सवाल - प्रदेश में सपा सरकार से काम पर क्या असर पड़ा?
जवाब - स्थानीय स्तर पर समाजवादी पार्टी के नेताओं का कोई दखल नहीं रहा। पौने पांच साल तक सपा कार्यकाल के दौरान पार्टी के किसी नेता ने उन्हें फोन नहीं किया। इसलिए उनके ऊपर कोई दबाव नहीं रहा। हाँ, पार्षद जरूर सदन की बैठकों में हंगामा मचाते रहे, लेकिन वह भी बात मानते थे। इसलिए उनके साथ बेहतर माहौल रहा।
कार्यकाल पूरा होने पर असमंजस
महापौर किरन वर्मा ने 20 जुलाई 2012 को शपथ ली थी। इस हिसाब से उनका कार्यकाल 20 जुलाई को पूरा हो जाना चाहिए। महापौर का तर्क है कि जिस दिन पहली सदन की बैठक हुई थी, उस दिन से कार्यकाल शुरू होता है। उनके कार्यकाल में सदन की पहली बैठक 07 अगस्त 2012 को हुई थी। इसलिए वह इसी तारीख तक कार्यकाल मानती हैं।
शासन के निर्देश का इंतजार
नगर आयुक्त प्रताप सिंह भदौरिया भी कार्यकाल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर सके। उनका कहना था कि महापौर के कार्यकाल के बारे में कुछ नहीं कह सकते हैं, शासन के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। जैसा निर्देश आएगा, उसी हिसाब से निर्णय लिया जाएगा।