फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   11 distric paisent one dispencry depend

ईएसआईसी डिस्पेंसिरी खुद बीमार, 11 जिलों के मरीजों के लिए एक डॉक्टर

Wed, 07 Jul 2021 01:30 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 07 Jul 2021 01:30 AM IST
विज्ञापन
11 distric paisent one dispencry depend
झांसी। मनु विहार कॉलोनी में किराए के मकान में खुली ईएसआईसी डिस्पेंसरी खुद बीमार है। कर्मचारी राज्य बीमारी निगम पॉलिसी के तहत इससे 20 हजार परिवार और एक लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं। मगर यहां पर गंभीर मरीजों का इलाज ही नहीं हो पाता है, उनके लिए ये रेफर सेंटर बना हुआ है। अस्पताल में सिर्फ एक ही डॉक्टर है।
विज्ञापन

झांसी ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के 11 से ज्यादा जिलों के मरीज ईएसआईसी डिस्पेंसिरी में इलाज कराने के लिए आते हैं। कोरोना के चलते ओपीडी में मरीजों की संख्या अभी कुछ कम हो गई है। वरना ओपीडी में 50 मरीज रोजाना आते रहे, जिनमें से पांच-छह मरीज दूसरे जनपदों से होते थे। इनमें लगभग 15 फीसदी मरीजों को रेफर करना पड़ता है। अस्पताल में मांग के अनुसार कानपुर से दवाएं तो भेज दी जाती हैं। मगर सुविधाएं और डॉक्टर कम होने से इस डिस्पेंसिरी का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। कई बार एकमात्र तैनात डॉक्टर को भी बैठक में जाना पड़ जाता है। तब मरीजों को बैठक खत्म होने तक डिस्पेंसिरी में इंतजार करना पड़ता है।
विज्ञापन

इन जिलों के मरीज आते
झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर समेत मध्य प्रदेश के आसपास के जिलों के मरीज भी यहीं इलाज कराने के लिए आते हैं, जो कि ईएसआईसी के तहत पंजीकृत हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

एलटी नहीं तो जांचे भी नहीं होती
डिस्पेंसिरी में लैब टेक्नीशियन (एलटी) नहीं है। इस कारण यहां पर जांचें भी नहीं हो पाती हैं। डॉक्टर मरीजों को जांचें लिखते हैं तो उन्हें दूसरी जगह जाकर जांच करानी पड़ती है। कई लोग तो निजी पैथोलॉजी केंद्रों से जांच कराकर ले आते हैं, क्योंकि रिपोर्ट जल्द मिल जाती है।

ये है स्टाफ की स्थिति
पदनाम सृजित कार्यरत
डॉक्टर 3 1
फार्मासिस्ट 2 2
क्लर्क 2 2
एलटी 1 0
ड्रेसर 1 2
एएनएम 1 0
डिस्पेंसिरी में आने वाले सभी मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं दी जाती हैं। जिन्हें हायर सेंटर की जरूरत पड़ती है, उन्हें ही रेफर किया जाता है। डिस्पेंसिरी का लाभ मरीजों को मिल रहा है। - डॉ. रचना पीपरी, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, ईएसआईसी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed