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पारदर्शी कोच से दिखेंगे खूबरसूरत नजारे
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पारदर्शी कोच से दिखेंगे प्रकृति के खूबसूरत नजारे
झांसी। अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही रेल मंडल में खूबसूरत नजारे देखने के लिए कांच की छत वाला पारदर्शी कोच (विस्टाडोम) ट्रेन में लगा दिखाई देगा। रेलवे बोर्ड ने मंडल प्रशासन से ऐसे स्थलों की सूची मांगी है, जहां पर्यटन की दृष्टि से यात्रियों को प्रकृति के मनोरम दृश्य दिखा सकें।
देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह से प्रयास चल रहे हैं। इसी पहल के तहत पर्यटन मंत्रालय कांच के विशेष कोचों का निर्माण चेन्नई के कोच कारखाने में करा रहा है। इन कोचों की विशेषता है कि इनकी छत कांच की होती है और खिड़कियों पर भी बड़े-बड़े कांच लगे रहते हैं। इन कोचों में बैठने के बाद लगता है कि जैसे बाहर की प्रकृति और मनोरम दृश्यों के बीच से ही आप गुजर रहे हों। अभी विशाखापट्टनम से किरंदुल, विशाखापट्टनम से अराकू और दादर से मड़गांव के बीच पैसेंजर ट्रेन में यह विशेष कोच लगाए जा रहे हैं। इस प्रयोग के सकारात्मक परिणाम आने के बाद रेलवे बोर्ड की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (एनएफआर एवं टूरिज्म) स्मिता रावत ने सभी जोन को पत्र लिखकर इन कोचों को चलाने की संभावनाओं के बारे में पूछा है। इस योजना में झांसी रेल मंडल भी शामिल गया हैं। मंडल रेल प्रशासन से पूछा गया है कि यहां पर ऐसे कौन से दर्शनीय पर्यटक स्थल हैं, जहां से ट्रेनें गुजरती हैं। उम्मीद है कि जल्द ही यह कोच मंडल रेल प्रशासन को मिल जाएंगे।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विस्टाडोम कोच चलाने के प्रयास चल रहे हैं। रेलवे बोर्ड से मांगी गई जानकारियां एकत्रित की जा रही हैं। - मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
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ऐसे होते हैं विस्टाडोम कोच
चेन्नई की इंट्रीगल कोच फैक्ट्री में इन कोचों को विशेष डिजाइन का तैयार किया जा रहा है। इस कोच की खिड़कियां बड़े-बड़े कांचों को लगाकर तैयार होती हैं। साथ ही, कोच की छत होती है। कोच में लग्जरी कुर्सियां बैठने के लिए लगी रहती हैं। कोच वातानुकूलित होता है। इस कोच में बैठकर आप बाहर के सभी नजारों को चारों तरफ से देख सकते हैं।
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झांसी। अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही रेल मंडल में खूबसूरत नजारे देखने के लिए कांच की छत वाला पारदर्शी कोच (विस्टाडोम) ट्रेन में लगा दिखाई देगा। रेलवे बोर्ड ने मंडल प्रशासन से ऐसे स्थलों की सूची मांगी है, जहां पर्यटन की दृष्टि से यात्रियों को प्रकृति के मनोरम दृश्य दिखा सकें।
देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह से प्रयास चल रहे हैं। इसी पहल के तहत पर्यटन मंत्रालय कांच के विशेष कोचों का निर्माण चेन्नई के कोच कारखाने में करा रहा है। इन कोचों की विशेषता है कि इनकी छत कांच की होती है और खिड़कियों पर भी बड़े-बड़े कांच लगे रहते हैं। इन कोचों में बैठने के बाद लगता है कि जैसे बाहर की प्रकृति और मनोरम दृश्यों के बीच से ही आप गुजर रहे हों। अभी विशाखापट्टनम से किरंदुल, विशाखापट्टनम से अराकू और दादर से मड़गांव के बीच पैसेंजर ट्रेन में यह विशेष कोच लगाए जा रहे हैं। इस प्रयोग के सकारात्मक परिणाम आने के बाद रेलवे बोर्ड की एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर (एनएफआर एवं टूरिज्म) स्मिता रावत ने सभी जोन को पत्र लिखकर इन कोचों को चलाने की संभावनाओं के बारे में पूछा है। इस योजना में झांसी रेल मंडल भी शामिल गया हैं। मंडल रेल प्रशासन से पूछा गया है कि यहां पर ऐसे कौन से दर्शनीय पर्यटक स्थल हैं, जहां से ट्रेनें गुजरती हैं। उम्मीद है कि जल्द ही यह कोच मंडल रेल प्रशासन को मिल जाएंगे।
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पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विस्टाडोम कोच चलाने के प्रयास चल रहे हैं। रेलवे बोर्ड से मांगी गई जानकारियां एकत्रित की जा रही हैं। - मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी।
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ऐसे होते हैं विस्टाडोम कोच
चेन्नई की इंट्रीगल कोच फैक्ट्री में इन कोचों को विशेष डिजाइन का तैयार किया जा रहा है। इस कोच की खिड़कियां बड़े-बड़े कांचों को लगाकर तैयार होती हैं। साथ ही, कोच की छत होती है। कोच में लग्जरी कुर्सियां बैठने के लिए लगी रहती हैं। कोच वातानुकूलित होता है। इस कोच में बैठकर आप बाहर के सभी नजारों को चारों तरफ से देख सकते हैं।