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फोरेंसिक लैब के लिए मिले दस करोड़, मार्च तक पूरा होगा काम

Tue, 20 Aug 2019 09:36 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 20 Aug 2019 09:36 PM IST
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10 crores sanctioned for forensic lab,  will complete till march
फोरेंसिक लैब के लिए मिले दस करोड़, मार्च तक पूरा होगा काम
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झांसी। बजट न मिलने से राजगढ़ स्थित पीएसी में बंद पड़ा फोरेंसिक लैब का निर्माण जल्द शुरू होगा। शासन ने इसके लिए दस करोड़ रुपये आवंटित कर दिए हैं। मार्च तक काम पूरा करने की तैयारी है। इसके बाद सबूतों की जांच करने में आसानी होगी। झांसी समेत बुंदेलखंड के सभी जनपदों को इसका लाभ मिलेगा।
फोरेंसिक लैब नहीं होने से बुंदेलखंड की पुलिस को काफी परेशानी हो रही है। घटनास्थल अथवा लाश के पास से एकत्रित सबूतों की जांच महीनों बाद भी नहीं हो पा रही है। तमाम मुकदमों की विवेचनाएं लंबित पड़ी हैं। इसे देखते हुए सरकार ने जनवरी 2016 में जिले के राजगढ़ स्थित पीएसी में फोरेंसिक लैब खोलने का निर्णय लिया था। 35 करोड़ की लागत से बनने वाली लैब का काम 2018 तक पूरा होना था लेकिन बजट समय पर न मिलने से काम पूरा नहीं हो सका। अब तक इसके लिए 21 करोड़ ही मिल सके। हाल ही में शासन ने लैब के काम के लिए दस करोड़ स्वीकृत किए हैं। रकम स्वीकृत होेने के बाद जल्द काम पूरा होने की उम्मीद है। वहीं, डीजीपी ओपी सिंह ने जल्द लैब के कुछ अनुभाग (सेक्शन) शुरू करने के निर्देश दिए हैं। संभावना है कि अगले माह तक कुछ सेक्शन शुरू हो जाएंगे। इधर, अपर परियोजना प्रबंधक आरपी सिंह ने बताया कि जैसे-जैसे बजट मिल रहा है, वैसे-वैसे काम हो रहा है। अब शासन से 10 करोड़ मिले हैं। मार्च तक फोरेंसिक लैैब का काम पूरा कर लिया जाएगा।
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ऐसे होती है जांच
पोस्टमार्टम होने के बाद विसरा संभाल कर रख लिया जाता है, जबकि नमूनों को जांच के लिए भेज दिया जाता है। विसरा का विश्लेषण अलग से होता है। जैसे जहर दिए जाने की वारदात हुई है तो इसमें सामान रखने के कंटेनर्स को भी लिया जाता है। पीड़ित से गैस्ट्रिक लावास नाम का एक नमूना लिया जाता है और इन सभी का रसायनिक विश्लेषण होता है। मान लीजिये कि भोजन में कीटनाशक मिले होने का शक हो तो फोरेंसिक लैब वाले रसायनिक विश्लेषण करते हैं। जांच में सारी सच्चाई सामने आने के बाद ही रिपोर्ट तैयार होती है।
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रिपोर्ट न आने का रहता बहाना
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह साफ नहीं होने पर विसरा सुरक्षित रखा जाता है जिसे जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाता था। लखनऊ और आगरा से रिपोर्ट आने में कई माह बीत जाते हैं, जबकि तमाम केस तो ऐसे भी रहेे, जिसकी रिपोर्ट ही नहीं आई। रिपोर्ट न आने का बहाना बनाकर पुलिस हाथ पर हाथ रखकर बैठी रहती है। लैब बनने के बाद 15 दिन के भीतर पुलिस के हाथ में रिपोर्ट होगी।
यह होगा फायदा
- पुलिस महकमे को जांच के लिए आगरा व लखनऊ तक दौड़ से बचत
- आसपास के दो दर्जन से ज्यादा जिलों को भी मिलेगा फायदा
- समय के साथ पैसे की भी बचत होगी, जल्द रिपोर्ट से काम आसान
- गुणवत्तापूर्ण जांच के लिए आधुनिक मशीनों पर काम का लाभ
इनको मिलेगा फायदा
वर्तमान में जांचों का विसरा आगरा भेजा जाता है। ऐसे में निर्माण होने के बाद इसका फायदा झांसी के साथ ललितपुर, जालौन, महोबा और हमीरपुर पुलिस को मिलेगा।
यह होंगी जांचें
- रक्त की जांच
- विसरा की जांच
- बैलेस्टिक जांच
- डाक्यूमेंट जांच
- फिजिक्स, बॉयोलॉजी जांच
- सीरोलॉजी से संबंधित जांच
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