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छह दिन कॉलेज में काम, एक दिन गरीबों के नाम

Thu, 30 Sep 2021 11:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 30 Sep 2021 11:21 PM IST
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Work in college for six days, one day in the name of the poor
जफराबाद। अपने लिए जिए तो क्या जिए तू जी एक दिल जमाने के लिए....कहने को तो ये फिल्मी गाना है पर इस गाने की सार्थकता देखनी तो जिले के सिरकोनी के बहरीपुर गांव में आइए। यहां के प्रो. राय साहब यादव अपनी मां की याद में असहाय और गरीबों की सेवा कर रहे हैं। नि:शुल्क तो नहीं कहेंगे लेकिन महज पांच रुपये की मामूली फीस लेकर जिसे कोई भी आराम से अदा कर सक ता है। अपने इस नेक काम के जरिए वे अब तक 20 हजार से अधिक लोगों को नई जिंदगी दे चुके हैं। क्षेत्र ही नहीं जिले के लोगों के लिए वह एक मिसाल बन चुके हैं।
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बहरीपुर गांव निवासी प्रो. राय साहब यादव राजकीय लाल बहादुर होम्योपैथिक कॉलेज फाफामऊ इलाहाबाद में मानव शरीर संरचना के प्रोफेसर हैं। डॉ. राय साहब प्रत्येक रविवार को अपने गांव आते हैं। वहां अपने आवास पर मरीजों को देखक र होम्योपैथ से उनका उपचार कर रहे हैं। रविवार के दिन सुबह से लेकर रात दस बजे तक उनके यहां मरीजों की भीड़ लगी रहती है। प्रो. राय साहब बताते हैं कि यह सेवा वो अपनी मां फुलदेई की याद में कर रहे हैं। उनका कहना है कि गरीब की सेवा से बेहद सुख मिलता है। मरीजों के स्वस्थ होने से मन को बेहद आनंद मिलता है। वह परिवार के साथ प्रयागराज में रहते हैं। उनके तीन बच्चे हैं, जो मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। सप्ताह में एक दिन रविवार को छुट्टी मिलती है। शनिवार को रात में गरीबों की सेवा करने के लिए प्रयागराज से अपने निजी साधन से पैतृक गांव बहरीपुर पहुंच जाते हैं। हर रविवार को वह लगभग 400 मरीजों को देखते हैं। एक वर्ष में अब तक लगभग 20 हजार मरीजों का इलाज कर चुके हैं। उपचार लेने के लिए दूरदराज से लोग आते हैं। महज पांच रुपये में दवा लेकर चले जाते हैं। राय साहब ने पढ़ाई निजाम होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, झारखंड से सन् 1990 में पूरा की। उसके बाद उनका चयन इलाहाबाद के मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर हो गया है।
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केस-1
-राजेपुर क्षेत्र के रविंद्र सिंह (55) कमर की हड्डी के बीच फासला आ जाने से बहुत परेशान थे। तमाम जगहों से इलाज कर निराश हो चुके थे। मेरे यहां इलाज लेने आए। अब स्वस्थ हो चुके हैं।
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केस दो--
भगरी गांव निवासी राजमणि यादव को हार्ट से संबंधित बीमारी थी। वह भी इलाज कर स्वस्थ हो चुकी है। चित्रसेन नाम के मरीज के गले में कैंसर था। अब सामान्य जिंदगी जी रहे हैं।

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इनसेट--
फीस का पांच रुपये भी जाता है गरीबों के लिए
जफराबाद। प्रो. ने बताया कि प्रत्येक रविवार को लगभग 400 मरीज को देखते हैं। कुछ मरीज तो 5 रुपये भी देने में असमर्थ रहते हैं। इस शुल्क से लगभग दो हजार रुपए एकत्रित होते हैं। एकत्रित पैसे से गरीब परिवार को सहयोग देता हूं। मैं जीवित रहूंगा इसी तरीके से गरीबों का उपचार कर सेवा करता रहूंगा। इतना ही नहीं मेरे तीन बच्चे मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। मेरी इच्छा है कि मेरे बाद मेरे बच्चे भी इसी तरह गरीबों की सेवा करते रहें। सेवा से मुझे बहुत आनंद मिलता है।
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