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इत्र, इमरती से थी पहचान, ऊनी दरी भी नहीं चढ़ी परवान

Wed, 09 Feb 2022 12:05 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 09 Feb 2022 12:05 AM IST
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Perfume was identified with Imarti, even the woolen door did not rise
जौनपुर। इत्र, इमरती, मूली, मक्का के लिए जिला चर्चित रहा है, लेकिन अब यह कारोबार सिमट गया है। एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) के तहत ऊलेन दरी और फूड प्रोसेसिंग को जिले की पहचान बनाने के लिए योजनाएं तो बनी, लेकिन धरातल पर उतर नहीं पाई है। इस कारोबार से जुड़े लोग आज भी जहां अपने दिन बहुरने के सपने देख रहे हैं। उन्हें यह आस है कि शायद देर सबेर उनको योजनाओं का लाभ मिलेगा तो वे भी अपने उत्पाद को आगे बढ़ा पाएंगे, लेकिन इनके परवान नहीं चढ़ पाने से इस कारोबार के लोगों के उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। वहीं, रोजगार की उम्मीदों को भी झटका लगा है।
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हर जिले को एक उत्पाद में पहचान दिलाने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना वर्ष 2018-19 में शुरू की थी, जिसके तहत जिले में ऊलेन दरी का चयन हुआ था। बाद में इसमें सहायक उत्पाद के तौर पर कृषि उत्पाद के तहत फूड प्रोसेसिंग को जोड़ दिया गया। इनके चयन के समय जिले में इसके उत्पादन की स्थिति और बेहतरी की संभावनाओं पर भी मंथन किया गया। भदोही जिले में कालीन और दरी के बड़े कारोबार और जिले के बरसठी, रामपुर, रामनगर और मडि़याहूं ब्लाक में पहले से दरी बनाने का कारोबार को देखते हुए जिले में भी ऊलेन दरी के कारोबार को आगे ले जाने की तैयारी शुरू हुई, लेकिन चार साल बीतने के बाद अभी तक यह कारोबार ऊंचाई प्राप्त नहीं कर पाया है। इसके तहत, अभी तक 730 लोगों को प्रशिक्षण देकर दरी बनाने का सामान दिया गया है। 30 लोगों को 70 लाख की सब्सिडी बांटी गई है और 40 लोगों को विभिन्न स्थानों पर लगने वाले प्रदर्शनी में भी प्रतिभाग कराया गया है, लेकिन इस उत्पाद को बेचने आदि का प्रबंध नहीं हो पाया है। अभी तक कामन फेसल्टी सेंटर (सीएफसी) भी शुरू नहीं हो पाया है जबकि इस व्यवसाय से पहले से जुड़े लोगों को व्यवसाय के लिए वित्तीय मदद मिलने, बिक्री के लिए बाजार और कच्चे माल की सुलभता सहित अन्य सुविधाएं मिलने की आस बंधी थी, लेकिन उनकी इस उम्मीद पर पानी फिरता दिख रहा है।
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पंजीयन और डीपीआर तक सिमटी है फूड प्रोसेसिंग
जौनपुर। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य एवं उद्योग उन्नयन (पीएमएफएमई) योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ पाई है। जिले में सिर्फ पंजीयन और डीपीआर बनाने तक सिमटी है। इस योजना का लाभ लेने के लिए पोर्टल पर 51 लोगों ने पंजीयन कराया है, जिसमें सात लोगों को उत्पाद लगाने के लिए डीपीआर भी बन गया है और तीन लोगों को बैंक में 35 फीसदी अनुदान पर 10 लाख तक का लोन लेने के लिए फाइल लगी हुई है, लेकिन अभी तक लोन मिल नहीं पाया है। बता दें कि हर जिले में कृषि आधारित व्यवसाय और उद्योग को बढ़ावा देने के मद्देनजर इस योजना का संचालन किया गया है। इसमें इकाई लगाने के लिए पर सरकार से मदद भी मिल रही है। इसकी सीमा अधिकतम 10 लाख रुपये निर्धारित है। प्रोजेक्ट लागत का अधिकतम 35 प्रतिशत सरकार की ओर से अनुदान दिया जाना है। समूह और संगठन के सदस्यों को प्रति सदस्य 40 हजार रुपये की दर से सरकारी अनुदान दिए जाने का प्राविधान है। उद्योग विभाग के निर्देशन में संचालित इस योजना को तमाम कोशिशों के बाद भी बढ़ावा नहीं मिल पा रहा।
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वर्जन
ओडीओपी के तहत ऊलेन दरी का कारोबार तेजी से बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। सीएफसी के निर्माण के लिए भूमि का चयन किया जा रहा है, जिसे शीघ्र बनवाने का कार्य किया जाएगा। साथ इसके लिए बाजार भी उपलब्ध कराया जाएगा। - हर्ष प्रताप सिंह, उपायुक्त उद्योग

पीएमएफएमई के पोर्टल पर अधिक से अधिक लोग अपना पंजीयान कराएं। अभी तक 51 लोगों ने पंजीयन कराया है। इन लोगों को योजना का लाभ दिलाने का कार्य किया जा रहा है। - हरिशंकर राम, जिला उद्यान अधिकारी
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