जौनपुर जेल में बवाल: सात सदस्यीय टीम ने शुरू की उपद्रव की जांच, ड्रोन कैमरे में दिखी भयावह तस्वीर
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला जेल में शुक्रवार को हुए भारी बवाल के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में है। सात सदस्यीय टीम ने जेल के अंदर तोड़फोड़ और आगजनी मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी।
विस्तार
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिला जेल में शुक्रवार को सजायाफ्ता कैदी की मौत के बाद हुए तोड़फोड़ और आगजनी के मामले की जांच के लिए सात सदस्यीय टीम गठित की गई है। जांच कमेटी में शामिल एडीएम भू राजस्व राजकुमार द्विवेदी, एडीएम वित्त रामप्रकाश और पांच मजिस्ट्रेट सुबह ही जेल में पहुंच गए। जेल प्रशासन से पूरे प्रकरण की विस्तार से जानकारी ली। टीम ने नुकसान का जायजा लिया।
शनिवार सुबह डीएम मनीष कुमार वर्मा और एसपी राजकरन नय्यर भी घंटों जेल में रहे। उपद्रवियों की ओर से जेल में तोड़ी गई दीवार की मरम्मत कराने के लिए सीमेंट और बालू जेल में भेजा गया है। दीवार की मरम्मत का काम शुरू करा दिया गया है। जेल के आसपास भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
बीते दिन जिला जेल में हुए बवाल के वक्त अंदर की गतिविधि की जानकारी के लिए पुलिस ने ड्रोन कैमरे की मदद ली। कैमरे से जब अंदर की स्थिति दिखी तो अफसर भी सन्न रह गए। बैरकों से बाहर आए बंदियों ने पूरे जेल पर कब्जा जमाने के बाद प्रवेश के रास्ते बंद कर दिए थे। उन्होंने गैस सिलिंडर को भी अपने कब्जे में ले लिया था। उसमें आग लगाने की आशंका से सुरक्षाकर्मी सकते में आ गए थे। देर रात जब मामला शांत हुआ तो बंदियों से इसे वापस ले लिया गया है।
अति संवेदनशील जेल में तीन गुना बंदी
उत्तर प्रदेश के अति संवेदनशील जेलों में शामिल जौनपुर जिला जेल में क्षमता से तीन गुना बंदी है। करीब डेढ़ सौ साल पुरानी जेल में साढ़े तीन सौ बंदियों-कैदियों को रखने की क्षमता है, जबकि इसमें साढ़े 12 सौ से अधिक कैदी-बंदी रहते हैं। इन दिनों कोरोना संक्रमण के चलते सवा सौ बंदियों को अंतरिम जमानत पर छोड़ा गया है। करीब एक हजार बंदी अभी भी जेल में हैं। बंदीरक्षकों की संख्या पुराने मानकों के तहत ही है।
जेल की व्यवस्था से नाराज बंदियों ने जनवरी में भी किया था हंगामा
जौनपुर जिला जेल में शुक्रवार को बवाल अचानक नहीं हुआ है। जेल की व्यवस्था से असंतुष्ट बंदियों में महीनों से गुस्सा था। इसी साल जनवरी में भी उन्होंने जेल की व्यवस्था से नाराज होकर हंगामा किया था। जेल अफसरों के हस्तक्षेप से मामला जैसे-तैसे शांत हुआ था। तब कुछ बंदियों की जेल बदलकर जेल प्रशासन यह मान चुका था कि अब सब कुछ उनके नियंत्रण में है, लेकिन बंदियों में विद्रोह की चिंगारी बरकरार थी और मौका मिलते ही वह धधक उठी।
जेल के अंदर पिछले छह साल में तीन बार ऐसे मौके आए, जब बंदियों ने जेल प्रशासन के खिलाफ बगावत कर दी। हर बार उन्हें शांत कराने में पुलिस-प्रशासन के अफसरों को नाकों चने चबाने पड़े हैं। इसके पहले वर्ष 2015 में भी जेल में ऐसे ही उपद्रव हुआ था। तब महिला बंदी रक्षक से छेड़खानी के बाद बंदी रक्षकों की पिटाई से एक बंदी की मौत हो गई थी। तब उग्र बंदियों ने साढ़े पांच घंटे तक जेल को अपने कब्जे में रखा था। फोर्स को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।