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12 साल में भी शुरू नहीं हुआ पोस्ट हार्वेस्टिंग सेंटर
अमर उजाला ब्यूरो , जौनपुर
Updated Thu, 14 May 2015 12:28 AM IST
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फलों के जूस और अचार तैयार करने के लिए पोस्ट हार्वेस्ट ट्रेनिंग सेंटर की शुरुआत 12 साल बाद भी नहीं हो सकी। इसके लिए लाखों की मशीनें 2003 में ही मंगा ली र्गइं थीं।
मशीनें जंग खा रही हैं। हैरत की बात यह कि उद्यान मंत्री पारसनाथ यादव के गृह जिले में ही यह महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ रही है।
फलों के जूस व अचार तैयार करने का प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की ओर से 2003 में कृषि विविधिकरण परियोजना उद्यान घटक द्वारा संचालित पोस्ट हार्वेस्टिंग सेंटर का निर्माण कराया गया था।
जिससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों को प्रायोगिक जानकारी दी जा सके। साथ ही उत्पादन कर विभाग आर्थिक स्त्रोत भी बढ़ा सकेें।
विभागीय सूत्रों की मानें तो ट्रेनिंग भवन का निर्माण एवं मशीनों को स्थापित करने में लाखों रुपये खर्च हो गए। इसमें 80 लाख की लागत से डब्बा बनाने व सील करने, बोतल बंद करने, पाउच पैकिंग आदि की मशीनें और एक्झास्ट टैंक,
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फ्रीजर, रासायनिक लेबोरेटेरिज, ब्वायलर जनरेटर व भौतिक तुला आदि लगाई गई थीं, लेकिन यह मशीनें जब से लगी हैं तब से इनका कोई उपयोग नही किया गया।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो मशीनों को चालू करने के लिए बिजली एवं अन्य संशाधनों के लिए 20 लाख रुपये खर्च होंगे। इसका प्रस्ताव शासन को कई बार भेजा गया, लेकिन धन नही मिलने से सेंटर शुरू नही हो सका।
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मशीनें जंग खा रही हैं। हैरत की बात यह कि उद्यान मंत्री पारसनाथ यादव के गृह जिले में ही यह महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ रही है।
फलों के जूस व अचार तैयार करने का प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की ओर से 2003 में कृषि विविधिकरण परियोजना उद्यान घटक द्वारा संचालित पोस्ट हार्वेस्टिंग सेंटर का निर्माण कराया गया था।
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जिससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों को प्रायोगिक जानकारी दी जा सके। साथ ही उत्पादन कर विभाग आर्थिक स्त्रोत भी बढ़ा सकेें।
विभागीय सूत्रों की मानें तो ट्रेनिंग भवन का निर्माण एवं मशीनों को स्थापित करने में लाखों रुपये खर्च हो गए। इसमें 80 लाख की लागत से डब्बा बनाने व सील करने, बोतल बंद करने, पाउच पैकिंग आदि की मशीनें और एक्झास्ट टैंक,
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फ्रीजर, रासायनिक लेबोरेटेरिज, ब्वायलर जनरेटर व भौतिक तुला आदि लगाई गई थीं, लेकिन यह मशीनें जब से लगी हैं तब से इनका कोई उपयोग नही किया गया।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो मशीनों को चालू करने के लिए बिजली एवं अन्य संशाधनों के लिए 20 लाख रुपये खर्च होंगे। इसका प्रस्ताव शासन को कई बार भेजा गया, लेकिन धन नही मिलने से सेंटर शुरू नही हो सका।