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परीक्षकों को तीन बजे के बाद मिली उत्तर पुस्तिकाएं
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पूर्वांचल विश्वविद्यालय में चल रहे मूल्यांकन में फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को दूसरे विश्वविद्यालय से आए परीक्षकों को मूल्यांकन के लिए दोपहर बाद करीब तीन बजे उत्तर पुस्तिकाएं दी गई। जिसे लेकर मूल्यांकन केंद्र पर अफरा तफरी का माहौल रहा। कुलपति से शिकायत के बाद उन्हें मूल्यांकन के लिए बुलाया गया।
बुधवार को सुबह दूसरे विवि से आए परीक्षकों ने उत्तर पुस्तिका नहीं मिलने पर हंगामा खड़ा कर दिया। परीक्षकों ने कुलपति से शिकायत कर भेदभाव बरतने का आरोप लगाया। विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारी अपने चहेतों को पहले बाहर से आए परीक्षकों को डाकेट देकर उन्हें मूल्यांकन करने की अनुमति दे रहे हैं। वे सभी 9 बजे से आए हुए हैं लगभग 100 की संख्या में हैं। जिन्हें 3 बजे डाकेट दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण विश्वविद्यालय लगातार इस फर्जीवाड़े से जूझ रहा है। अभी हाल में ही फर्जी परीक्षकों को पकड़ा गया था। जिसकी कार्यवाही पूरी नहीं हुई। परीक्षा नियंत्रक बीएन सिंह से बात करने पर उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्हें पता नहीं है। कोआर्डिनेटर से इसकी जानकारी करें।
परीक्षकों को नहीं मिला चाय और नास्ता
बुधवार को हिंदी का मूल्यांकन शुरू होने के बाद केंद्र पर अफरा तफरी मच गई। हालत यह हो गई की मूल्यांकन कर रहे परीक्षक पानी, चाय और नाश्ता के लिए तरस गए। मूल्यांकन को लेकर करीब तीन बजे तक हंगामा होता रहा है। विवि प्रशासन की लापरवाही के चलते परीक्षकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। उमस भरी गर्मी में परीक्षकों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। नास्ता की व्यवस्था में लगे कर्मचारियों ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि कितने परीक्षक आज मूल्यांकन करेंगे। परीक्षा नियंत्रक वीएन सिंह ने कहा कि मुझे जानकारी नहीं है। कल मेस वाले को बुलाकर मामले की जानकारी करूंगा।
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बुधवार को सुबह दूसरे विवि से आए परीक्षकों ने उत्तर पुस्तिका नहीं मिलने पर हंगामा खड़ा कर दिया। परीक्षकों ने कुलपति से शिकायत कर भेदभाव बरतने का आरोप लगाया। विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारी अपने चहेतों को पहले बाहर से आए परीक्षकों को डाकेट देकर उन्हें मूल्यांकन करने की अनुमति दे रहे हैं। वे सभी 9 बजे से आए हुए हैं लगभग 100 की संख्या में हैं। जिन्हें 3 बजे डाकेट दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण विश्वविद्यालय लगातार इस फर्जीवाड़े से जूझ रहा है। अभी हाल में ही फर्जी परीक्षकों को पकड़ा गया था। जिसकी कार्यवाही पूरी नहीं हुई। परीक्षा नियंत्रक बीएन सिंह से बात करने पर उन्होंने बताया कि इस संबंध में उन्हें पता नहीं है। कोआर्डिनेटर से इसकी जानकारी करें।
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परीक्षकों को नहीं मिला चाय और नास्ता
बुधवार को हिंदी का मूल्यांकन शुरू होने के बाद केंद्र पर अफरा तफरी मच गई। हालत यह हो गई की मूल्यांकन कर रहे परीक्षक पानी, चाय और नाश्ता के लिए तरस गए। मूल्यांकन को लेकर करीब तीन बजे तक हंगामा होता रहा है। विवि प्रशासन की लापरवाही के चलते परीक्षकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। उमस भरी गर्मी में परीक्षकों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। नास्ता की व्यवस्था में लगे कर्मचारियों ने यह कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उन्हें यह नहीं बताया गया कि कितने परीक्षक आज मूल्यांकन करेंगे। परीक्षा नियंत्रक वीएन सिंह ने कहा कि मुझे जानकारी नहीं है। कल मेस वाले को बुलाकर मामले की जानकारी करूंगा।
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