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हादसे में बुझ गया घर का इकलौता चिराग
Updated Tue, 23 Oct 2018 12:10 AM IST
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जलालपुर। शाहगंज के पास सड़क हादसे में नेवादा गांव निवासी दीपक की मौत की खबर कानोकान पूरे गांव में फैल गई थी लेकिन दीपक की मां को सिर्फ यह बताया गया था कि वह हादसे में घायल हो गया है। शाम को पोस्टमार्टम के बाद शव घर पहुंचा तो मां बेटे के शव से लिपटकर बेसुध सी हो गई। पूरे गांव में कोहराम मच गया।
नगर कोतवाली क्षेत्र के प्रेमराजपुर मोहल्ला निवासी दीपक मौर्य उर्फ गोलू (20) के पिता मुन्नालाल मौर्य की मौत उस समय हो गई थी जब दीपक महज छह वर्ष का था। दीपक की परवरिश और उसकी पढ़ाई लिखाई अच्छे से हो सके इसके लिए उसके नाना मोतीलाल ने बेटी शीला को अपने घर जलालपुर थाना क्षेत्र के नेवादा गांव बुला लिया। इसी बीच शीला को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नौकरी मिल गई। पति की मौत के बाद बेटे के साथ ही उनका जीवन कट रहा था। दीपक पढ़ने में भी होनहार था। पूरे परिवार को उससे काफी उम्मीदें भी थी। सोमवार को शाहगंज के पास हुए सड़क हादसे में शीला के जीवन का दीपक हमेसा के लिए बुझ गया। शीला ने बेटे को सुबह चार बजे ही चाय नाश्ता बनाकर दिया और परीक्षा में अच्छे अंक लाने का आशीर्वाद देकर घर से भेजा था। लेकिन शीला को क्या पता था कि वह अपने इस कलेजे के टुकड़े को आखिरी बार भेज रही है।
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नगर कोतवाली क्षेत्र के प्रेमराजपुर मोहल्ला निवासी दीपक मौर्य उर्फ गोलू (20) के पिता मुन्नालाल मौर्य की मौत उस समय हो गई थी जब दीपक महज छह वर्ष का था। दीपक की परवरिश और उसकी पढ़ाई लिखाई अच्छे से हो सके इसके लिए उसके नाना मोतीलाल ने बेटी शीला को अपने घर जलालपुर थाना क्षेत्र के नेवादा गांव बुला लिया। इसी बीच शीला को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की नौकरी मिल गई। पति की मौत के बाद बेटे के साथ ही उनका जीवन कट रहा था। दीपक पढ़ने में भी होनहार था। पूरे परिवार को उससे काफी उम्मीदें भी थी। सोमवार को शाहगंज के पास हुए सड़क हादसे में शीला के जीवन का दीपक हमेसा के लिए बुझ गया। शीला ने बेटे को सुबह चार बजे ही चाय नाश्ता बनाकर दिया और परीक्षा में अच्छे अंक लाने का आशीर्वाद देकर घर से भेजा था। लेकिन शीला को क्या पता था कि वह अपने इस कलेजे के टुकड़े को आखिरी बार भेज रही है।
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