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परमात्मा कण- कण में व्याप्त
Updated Fri, 02 Nov 2018 01:08 AM IST
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जौनपुर। जिस प्रकार परमात्मा स्थूल शरीर के कण-कण में सूक्ष्म रूप से व्याप्त रहता है। उसे गति देता है, उसी प्रकार परमात्मा का अंशभूत आत्मा जीवों के स्थूल देहों में व्याप्त रहकर उन्हें जीवन तथा गति देता है। प्रवचन में स्वामी नारायणानंद तीर्थ ने विकास रामपुर के असवाँ सिद्धनाथ बाबा सिद्धार्थश्रम में चल रहे श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में यह चर्चा की। उन्होंने कहा कि जहां शक्ति है, वहां शक्ति का श्रोत दिव्य परमात्म तत्व भी है। जैसे जहां धुआं है, वहां अग्नि भी है। सृष्टि के नियम और उसकी व्यवस्था भी यही इंगित करते हैं कि उनके पीछे कोई नियामक एवं व्यवस्थापक शक्ति है। जिस प्रकार किसी राज्य में रहकर उसके प्रशासक और नियमों को न मानने से व्यक्ति की हानि और मानने से लाभ होता है, उसी प्रकार सृष्टि के नियामक और नियमों को न मानने से हानि तथा मानने से हित होता है। वास्तव में परमात्मा का अस्तित्व बुद्धि से परे होने के कारण किसी तर्क से सिद्ध नहीं किया जा सकता। वह अनुभव का विषय है। उन्होंने कहा कि परमात्मा से ही जीव का उद्गम होता है तथा उसी में जीव का विलय होता है। परमात्मा घट-घट वासी है, अंतर्यामी है, सभी की जीवन ज्योति है। परमात्मा मेरा है, मैं उसका हूं। यह नाता प्रत्येक मनुष्य के लिए परमात्मा को सुलभ बना देता है। वह ब्रह्मचारी, गृहस्थ या सन्यासी हो, स्त्री अथवा पुरूष हो, युवक अथवा वृद्ध हो, धर्मात्मा अथवा पापात्मा हो, राजा अथवा रंक हो, देश, धर्म, जाति, संप्रदाय, भाषा आदि के भेद ज्ञानामृत प्राप्ति के लिए नितांत अमान्य हैं।
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