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सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गया जनसुनवाई पोर्टल

Tue, 11 Sep 2018 12:26 AM IST
Updated Tue, 11 Sep 2018 12:26 AM IST
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सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह  गया जनसुनवाई पोर्टल
आनलाइन घोड़े दौड़ा रहे, राहत नहीं मिल रही
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खानापूर्ति हो रही जन सुनवाई पोर्टल के शिकायतों की
दफ्तर में बैठकर शिकायतों का निस्तारण कर रहे अफसर
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। जन समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल पर लोग शिकायतें दर्ज कराते हैं। मगर इसके निस्तारण में भी मनमानी की जा रही है। अफसर दफ्तर में बैठे-बैठे रिपोर्ट लगा दे रहे हैं।
फरवरी 2018 से लेकर 9 सितंबर 2018 के बीच जन सुनवाई पोर्टल पर जिले के विभिन्न विभागों से संबंधित कुल 1214 शिकायतें आई हैं। अफसरों का दावा है कि 1167 शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया है। महज 47 शिकायतें अभी लंबित हैं। इसमें 15 ऐसी शिकायतें हैं, जिसके निस्तारण से शिकायतकर्ता संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने दोबारा शिकायत की है। सोमवार को जन सुनवाई पोर्टल पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण की वस्तु स्थिति के पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
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केस: एक
रामनगर ब्लाक लोहिया गांव नोकरा निवासी राधेश्याम लोहिया ने पोर्टल पर शिकायत (संख्या -40019418017853) की कि लोहिया आवास के लाभार्थियों को आवास की मजदूरी नहीं दी जा रही है और सोलर लाइट भी नहीं लगाई गई। उनकी शिकायत पर बिना तथ्यों की पड़ताल किए ही रिपोर्ट लगा दी गई कि नोकरा गांव में लोहिया आवास के सभी लाभार्थियों को मजदूरी का भुगतान कर दिया गया है। सोलर लाइट लगाना उनके विभाग का काम नहीं है। शिकायतकर्ता राधेश्याम, जमुना, सीमा देवी, मीना दुबे, रेखा देवी आदि का कहना है कि जांच के लिए कोई गांव में नहीं आया था। उन्हें अब तक मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। केस- दो
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मडिय़ाहूं विकास खंड के कुंभ गांव निवासी ग्राम पंचायत सदस्य वीरेंद्र कुमार यादव ने जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की कि प्रधानमंत्री आवास के लाभार्थियों के चयन के लिए ग्राम पंचायत की हुई खुली बैठक में वे नहीं थे लेकिन कार्यवाही रजिस्टर पर उनका हस्ताक्षर बना दिया गया है। खंड विकास अधिकारी की ओर से दिए गए जवाब दिया गया कि बैठक में वीरेंद्र कुमार मौजूद थे। रजिस्टर पर उनके ही हस्ताक्षर हैं। हस्ताक्षर के प्रमाण के तौर पर उन्होंने सदस्यों के हस्ताक्षर वाले पेज की फोटो भी पोर्टल पर अपलोड कर दी। इस पेज पर सदस्य वीरेंद्र कुमार यादव, गुड्डी, कुलना देवी के भी हस्ताक्षर थे जबकि तीनों साक्षर नहीं हैं और अंगूठा लगाते हैं। इसकी दोबारा शिकायत हुई तो ग्राम विकास अधिकारी की ओर से अंगूठा लगा हस्ताक्षर रजिस्टर के पेज की कापी अपलोड कर दी गई।
केस-तीन
मछलीशहर के सकरा गांव निवासी अनिल पांडेय ने आईजीआरएस पर 25 जून 2018 को शिकायत (संख्या 40019418020366) में कहा कि बरईपार, गोनापार और आस पास के बाजरों में झोलाछाप डाक्टरों की भरमार हैं। झोलाछाप डाक्टर मरीजों का शोषण कर रहे हैं। इस शिकायत के जवाब में सीएमओ ने कहा है कि उनके द्वारा जांच की गई तो पता चला कि इन बाजारों में कोई झोलाछाप डाक्टर नहीं बैठता। बरईपार बाजार में सुजानगंज रोड पर आस्था क्लीनिक नाम से रजिस्टर्ड हास्पिटल है यहां डा. अबू अकरम बैठते हैं। जबकि बरईपार बाजार में मछलीशहर मार्ग पर कोई आस्था क्लीनिक नहीं है और न ही अबू अकरम नाम का कोई डाक्टर ही है।

कोट:
जन सुनवाई पोर्टल पर आ रही शिकायतों का गंभीरता से जांच कर उसका निस्तारण करने के निर्देश सभी विभागों के अफसरों को दिए गए हैं। जिन मामलों के निस्तारण से शिकायत कर्ता संतुष्ट नहीं होतो तो उसकी दोबारा जांच कराई जाती है।-आरपी मिश्र, एडीएम, वित्त एवं राजस्व
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