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भगवान शिव की कथा है अलौकिक
Updated Wed, 06 Jun 2018 12:16 AM IST
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सुजानगंज। श्री राम कथा ज्ञान यज्ञ में गोस्वामी जी लिखते हैं कि विचरहि महि अईहै हरि सकल लोक अभिराम। भगवान शिव सुख के धाम हैं। लेकिन हरि को ह्रदय में धारण करके ऐसे ही विचरण कर रहे भगवान शिव ध्यान में बैठे थे। आंखें खोलकर देखा सामने प्रभु राम प्रकट हुए हैं। प्रभु राम कहते हैं आज मैं आपके पास कुछ मांगने आया हूं और आप ही मेरी इच्छा को पूरी कर सकते हैं। जिस पर भगवान शिव मुस्कुरा दिए। भगवान शिव कहते हैं कि माता पिता गुरु और हरि इनके वचन पर विचार मत करो। इनका आदेश तुरंत मान लेना चाहिए। इनके वचन में हमारा हित होगा। उक्त बातें पंडित धीरज जी महाराज ने मुस्तफाबाद बाजार के हनुमान मंदिर पर चल रहे पांच दिवसीय श्री राम कथा के दूसरे दिन मंगलवार को कहीं। कहा कि भगवान शिव की कथा अलौकिक है।
उन्होंने कहा कि प्रभु राम की आज्ञा मानकर भगवान शिव माता पार्वती से विवाह करने के लिए उद्धृत हो गए। राजा हिमाचल के यहां माता सती ने पार्वती रूप में जन्म लिया। संत नारद जी का वहां पर पदार्पण होता है। संत कहते हैं विश्वास को प्राप्त करने के लिए तपस्या करनी पड़ती है। यदि श्रद्धा को प्राप्त करना है तो निरंतर चलना पड़ता है। भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए श्रद्धा रूपी पार्वती तपस्या कर रही हैं। भगवान शिव के विवाह के लिए बैल पर सवार होकर जाते हैं। बैल धर्म की मूर्ति है। तात्पर्य यह है कि विवाह करने जाओ तो धर्म को साथ में लेकर जाओ। भगवान शिव ने हाथ में त्रिशूल धारण किया है। त्रिशूल का अर्थ है काम, क्रोध और लोभ। इनको जकड़कर इस तरह रखें जिससे हमारे जीवन में कभी किसी प्रकार की समस्या न हो। विवाह में प्रथम गणेश जी का पूजन हुआ। इस अवसर पर संतोष कुमार मिश्र, कैलाश यादव, सभापति यादव, पप्पू जायसवाल, पब्बर हलवाई, डा. प्यारे लाल मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि प्रभु राम की आज्ञा मानकर भगवान शिव माता पार्वती से विवाह करने के लिए उद्धृत हो गए। राजा हिमाचल के यहां माता सती ने पार्वती रूप में जन्म लिया। संत नारद जी का वहां पर पदार्पण होता है। संत कहते हैं विश्वास को प्राप्त करने के लिए तपस्या करनी पड़ती है। यदि श्रद्धा को प्राप्त करना है तो निरंतर चलना पड़ता है। भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए श्रद्धा रूपी पार्वती तपस्या कर रही हैं। भगवान शिव के विवाह के लिए बैल पर सवार होकर जाते हैं। बैल धर्म की मूर्ति है। तात्पर्य यह है कि विवाह करने जाओ तो धर्म को साथ में लेकर जाओ। भगवान शिव ने हाथ में त्रिशूल धारण किया है। त्रिशूल का अर्थ है काम, क्रोध और लोभ। इनको जकड़कर इस तरह रखें जिससे हमारे जीवन में कभी किसी प्रकार की समस्या न हो। विवाह में प्रथम गणेश जी का पूजन हुआ। इस अवसर पर संतोष कुमार मिश्र, कैलाश यादव, सभापति यादव, पप्पू जायसवाल, पब्बर हलवाई, डा. प्यारे लाल मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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