फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jaunpur News ›   प्रखर प्रतिभा के धनी थे डॉ. लालजी

प्रखर प्रतिभा के धनी थे डॉ. लालजी

Tue, 12 Dec 2017 12:44 AM IST
Updated Tue, 12 Dec 2017 12:44 AM IST
विज्ञापन
प्रखर प्रतिभा के धनी थे डॉ. लालजी
डा. लालजी सिंह की शवयात्रा में शामिल लोग
सिकरारा। वैज्ञानिक डॉ. लालजी सिंह के निधन पर उनके करीबी काफी दुखी हैं। करीबियों ने उनके साथ बिताए पलों को याद करते हुए संस्मरण सुनाए और डॉ. सिंह को प्रखर प्रतिभा का धनी बताया।
विज्ञापन

क्षेत्र के देवपुर निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रामजी सिंह ने कहा कि डॉ. सिंह कठिन परिस्थितियों में भी साहस के साथ अनुकूल माहौल बनाने में माहिर थे। उनके तारापुर कालोनी के उप निवास पर हुई हत्या की घटना में उन्होंने छोटे भाई राम अचल को उन्होंने संभाला था और उनके बेटे राहुल की स्मृति में गांव में पीजी कालेज की स्थापना कराई थी।
विज्ञापन

सहपाठी रहे इंटर कालेज शेरवा से सेवानिवृत्त प्रवक्ता रामनगर निवासी रामआश्रय सिंह ने कहा कि लालजी सिंह हर कक्षा में अव्वल रहते थे। समय के पाबंद तथा सादगी पसंद परिश्रमी छात्र के रूप में उनकी पहचान थी। वह शिक्षकों के प्रिय बन जाते थे। लोग उनको पैदल प्रतापगंज जाते देखकर घड़ी का समय मिलाते थे। वे हर काम विधिवत करते थे। छात्र जीवन में पीटी प्रदर्शन में भी कमांडर की भूमिका बेहतर निभाते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

शेरवा बाजार निवासी मिष्ठान विक्रेता छोटेलाल मोदनवाल ने कहा कि लालजी कभी अनावश्यक बैठकर समय नहीं बिताते थे। उनके साथ उन्होंने प्राइमरी से आठवीं तक पढ़ाई की। वे गणित, अंग्रेजी, विज्ञान जैसे कठिन विषयों में पूर्णांक ही हासिल करते थे। तत्कालीन प्रधानाध्यापक राजपति सिंह उनका उदाहरण देकर अन्य बच्चों को प्रेरित करते थे। डॉ. सिंह साथ के गरीब बच्चों को कापी, पेंसिल आदि देकर उनकी मदद करते थे। कुछ को अपने हिस्से का नाश्ता भी खिला दिया करते थे। आज वे हमारे बीच नहीं हैं तो उनके साथ बिताए हर पल याद आ रहे हैं। टेकारी निवासी सेवानिवृत्त प्रवक्ता धर्मदेव सिंह तीन दिन पहले हैदराबाद घूमने गये थे। उन्होंने दूरभाष पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बताया कि वे लालजी से मिलने के लिए फोन पर समय लिए थे। उन्हें सोमवार को डा. सिंह अपने आवास पर बुलाया था लेकिन दुर्भाग्य से अब हम कभी नहीं मिल पाएंगे। वे अपने विचारों, सामाजिक सरोकारों तथा देश के लिए किए गए कार्यों के लिए याद किए जाएंगेे।

डॉ. लालजी सिंह के निधन से पूरा जनपद स्तब्ध और गम में है। सोमवार को डॉ. सिंह के शव के पास काफी देर तक स्तब्ध खड़ी उनकी चार साल की पौत्री अरेना के शब्दों ने वहां उपस्थित लोगों को झकझोर कर रख दिया। जैसे ही बेटे अभिषेक के साथ परिजनों अर्थी को उठाना चाहा। अरेना अर्थी पकड़ कर जोर जोर से चीखने लगी। तोतली भाषा में कहा मेले बब्बा को मत ले जाओ, मैं भी इनके साथ चलूंगी। अभिषेक ने बच्ची को गोदी में ले लिया और देर तक खुद रोना बंद कर उसे पुचकारते रहे। यह दृश्य वहां उपस्थित हर एक को झकझोर गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed