{"_id":"60cf86128ebc3e2e076fc371","slug":"water-temple-river-month-god-trust-orai-news-knp635428066","type":"story","status":"publish","title_hn":"निर्जला एकादशी आज, करें दानपुण्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निर्जला एकादशी आज, करें दानपुण्य
विज्ञापन
कालपी। गंगा दशहरा पर यमुना नदी में सुबह से ही श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पूजन व दान किया। इसके बाद मंदिरों में दर्शन कर भगवान से कल्याण की कामना की। वहीं सोमवार को निर्जला एकादशी के व्रत को लेकर तैयारी जोरों पर है। दुकानदारों ने सुराही, पंखा, मटका आदि बड़ी संख्या में एकत्र किया हैं।
बता दें कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल की दशमी तिथि को मां गंगा धरा पर आईं थीं। तभी से इस दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। रविवार को गंगा दशहरा पर यमुना के अलग अलग घाटों पर लोग पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई। गंगा दशहरा पर दान का विशेष महत्व है। इस कारण लोगों ने स्नान के बाद दानपुण्य भी किया। घाटों पर स्थित व आसपास के मंदिरों में जाकर हवन पूजन कर कल्याण की कामना की। उधर, मां वनखंडी देवी मंदिर के महंत जमुनादास महाराज ने बताया कि सोमवार को निर्जला एकादशी है। निर्जला एकादशी को सभी एकादशी तिथियों में श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन व्रत का विशेष महत्व है। निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इसदिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। निर्जला एकादशी का व्रत जीवन में जल के महत्व को बताता है। इस व्रत में अन्न के साथ जल का भी त्याग किया जाता है। जल की एक भी बूंद इस व्रत के दौरान ग्रहण नहीं की जाती है। इसलिए इस एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है।
विज्ञापन
बता दें कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल की दशमी तिथि को मां गंगा धरा पर आईं थीं। तभी से इस दिन को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। रविवार को गंगा दशहरा पर यमुना के अलग अलग घाटों पर लोग पहुंचे और आस्था की डुबकी लगाई। गंगा दशहरा पर दान का विशेष महत्व है। इस कारण लोगों ने स्नान के बाद दानपुण्य भी किया। घाटों पर स्थित व आसपास के मंदिरों में जाकर हवन पूजन कर कल्याण की कामना की। उधर, मां वनखंडी देवी मंदिर के महंत जमुनादास महाराज ने बताया कि सोमवार को निर्जला एकादशी है। निर्जला एकादशी को सभी एकादशी तिथियों में श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन व्रत का विशेष महत्व है। निर्जला एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। इसदिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। निर्जला एकादशी का व्रत जीवन में जल के महत्व को बताता है। इस व्रत में अन्न के साथ जल का भी त्याग किया जाता है। जल की एक भी बूंद इस व्रत के दौरान ग्रहण नहीं की जाती है। इसलिए इस एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है।
विज्ञापन