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Jalaun News: खूबियों से भरे गांव...खोलेंगे समृद्धि के नये द्वार
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फोटो - 25 अकोढ़ी गांव का शारदा मंदिर। सोशल मीडिया
जालौन। धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक महत्व की तमाम विरासतों को अपने में समेटे यह जिला भी जल्द ही देश दुनिया की निगाहों में आकर चमक उठेगा। समय की गर्द में धुंधला रहीं जिले की खूबियां पर्यटन मानचित्र पर आकर तरक्की के नये द्वार भी खोलेंगीं।
यह सब संभव होने जा रहा है जिले में लागू हुई ‘मेरे गांव मेरी धरोहर’ योजना से। इसके तहत जिले के गांवों में छिपी धार्मिक आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को अब नई पहचान मिलेगी। ‘मेरे गांव मेरी धरोहर’ योजना के तहत गांवों के प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक स्थल, तालाब, मेलों और पारंपरिक कला को डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। अभी तक जिले के 1136 गांव चिन्हित किए जा चुके हैं। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वे कर प्रमुख धरोहरों का विवरण एकत्र किया जा रहा है। सत्यापन के बाद इन जानकारियों को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को गांवों की विशेषताओं की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
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अधिकारियों के अनुसार, कई गांवों में मौजूद प्राचीन मंदिर, बावड़ियां और अन्य ऐतिहासिक स्थल उपेक्षा के कारण गुमनामी में हैं। डिजिटल दस्तावेजीकरण के माध्यम से न केवल इनकी पहचान बढ़ेगी, बल्कि संरक्षण और सुंदरीकरण के प्रयासों को भी गति मिलेगी।
ग्रामीण पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं को गाइड, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और आवास जैसी सेवाओं में रोजगार मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि शेष गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि जिले की संपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर को एक मंच पर लाकर विकास की नई संभावनाएं तलाशी जा सकें।
पर्यटन के साथ बढ़ेगा रोजगार
योजना के लागू होने से गांवों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय युवाओं को गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प बिक्री, खानपान और आवास जैसी सेवाओं में रोजगार मिल सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे दुकानदारों और स्वयं सहायता समूहों को भी इसका लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गांवों की सांस्कृतिक पहचान को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया जाए तो यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है।
सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा संरक्षण
योजना का एक उद्देश्य लुप्त होती परंपराओं और धरोहरों का संरक्षण भी है। कई गांवों में मौजूद प्राचीन मंदिर, बावड़ियां और तालाब उपेक्षा के कारण जर्जर हो रहे हैं। पोर्टल पर पंजीकरण के बाद इन स्थलों के संरक्षण और सुंदरीकरण की दिशा में भी कदम उठाए जा सकेंगे।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में शेष गांवों को भी योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि जिले की समस्त सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को एक मंच पर लाया जा सके।
वर्जन....
गांवों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाकर 1136 गांवों को चिह्नित भी कर लिया गया है। योजना के माध्यम से जिले के लोगों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। इससे जनपद के ग्रामीण अंचल पर्यटन मानचित्र पर उभर सकते हैं। -राम अयोध्या प्रसाद गुप्ता, डीपीआरओ
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यह सब संभव होने जा रहा है जिले में लागू हुई ‘मेरे गांव मेरी धरोहर’ योजना से। इसके तहत जिले के गांवों में छिपी धार्मिक आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को अब नई पहचान मिलेगी। ‘मेरे गांव मेरी धरोहर’ योजना के तहत गांवों के प्राचीन मंदिर, ऐतिहासिक स्थल, तालाब, मेलों और पारंपरिक कला को डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। अभी तक जिले के 1136 गांव चिन्हित किए जा चुके हैं। प्रशासन का मानना है कि इस पहल से ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
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योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर सर्वे कर प्रमुख धरोहरों का विवरण एकत्र किया जा रहा है। सत्यापन के बाद इन जानकारियों को पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिससे पर्यटकों को गांवों की विशेषताओं की जानकारी आसानी से मिल सकेगी।
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अधिकारियों के अनुसार, कई गांवों में मौजूद प्राचीन मंदिर, बावड़ियां और अन्य ऐतिहासिक स्थल उपेक्षा के कारण गुमनामी में हैं। डिजिटल दस्तावेजीकरण के माध्यम से न केवल इनकी पहचान बढ़ेगी, बल्कि संरक्षण और सुंदरीकरण के प्रयासों को भी गति मिलेगी।
ग्रामीण पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं को गाइड, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और आवास जैसी सेवाओं में रोजगार मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि शेष गांवों को भी चरणबद्ध तरीके से योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि जिले की संपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर को एक मंच पर लाकर विकास की नई संभावनाएं तलाशी जा सकें।
पर्यटन के साथ बढ़ेगा रोजगार
योजना के लागू होने से गांवों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। इससे स्थानीय युवाओं को गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प बिक्री, खानपान और आवास जैसी सेवाओं में रोजगार मिल सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे दुकानदारों और स्वयं सहायता समूहों को भी इसका लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गांवों की सांस्कृतिक पहचान को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया जाए तो यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकता है।
सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा संरक्षण
योजना का एक उद्देश्य लुप्त होती परंपराओं और धरोहरों का संरक्षण भी है। कई गांवों में मौजूद प्राचीन मंदिर, बावड़ियां और तालाब उपेक्षा के कारण जर्जर हो रहे हैं। पोर्टल पर पंजीकरण के बाद इन स्थलों के संरक्षण और सुंदरीकरण की दिशा में भी कदम उठाए जा सकेंगे।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में शेष गांवों को भी योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि जिले की समस्त सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को एक मंच पर लाया जा सके।
वर्जन....
गांवों की विस्तृत प्रोफाइल तैयार कर उन्हें पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। इसके लिए स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाकर 1136 गांवों को चिह्नित भी कर लिया गया है। योजना के माध्यम से जिले के लोगों को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। इससे जनपद के ग्रामीण अंचल पर्यटन मानचित्र पर उभर सकते हैं। -राम अयोध्या प्रसाद गुप्ता, डीपीआरओ