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गोशालाओं का संचालन ठप, अन्ना मवेशी सड़कों पर
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जालौन। ब्लॉक क्षेत्र के अधिकांश गांवों में गोशाला का संचालन बंद हो चुका है। लगभग एक माह पहले से ही गोशालाओं से मवेशियों को खुला छोड़ दिया गया है। गोशालाओं से छोड़े गए मवेशी सड़कों, गांव की गलियों व खेतों पर चारे, पानी की तलाश में भटक रहे हैं। इस कारण अन्ना मवेशी वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का सबब बने हुए हैं।
ब्लॉक क्षेत्र की 62 ग्राम पंचायतों में अधिकांश ग्राम पंचायतों में लगभग 50 गोशालाएं हैं। अप्रैल में खेतों की फसल कटने के बाद जिम्मेदारों ने गोशालाओं के संचालन पर ध्यान नहीं दिया। यही कारण रहा है कि ब्लॉक क्षेत्र की अधिकांश गोशालाओं में मवेशी नहीं है। इन मवेशियों को अन्ना छोड़ दिया गया है। ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम अकोढ़ी, सींगपुरा, धनौरा, नारायणपुरा, कुठौंदा आदि गांवों में गोशालाएं खाली हैं। कुछ गोशालाओं में 20-30 से लेकर एक सैकड़ा तक मवेशी थे। इस गोशालाओं से खुले छोड़े गए मवेशी अब गांवों, खेतों और सड़कों पर विचरण कर रहे हैं। गर्मी के मौसम में भूखे, प्यासे मवेशी अपना पेट भरने के लिए इधर, उधर पहुंच जाते हैं। यह हाल तब है जबकि शासन से गोशालाओं में मवेशियों के चारे भूसे के लिए धनराशि भी आवंटित होती है एवं ग्रामीण भी सहयोग के लिए तैयार रहते हैं। क्षेत्र के गजेद्र सिंह, अशफाक, अवधेश कहते हैं कि अन्ना विचरण करते जानकर कई बार स्वयं हादसे का शिकार होते हैं। उन्होंने गोशालाओं का संचालन शुरू कराने की मांग की।
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ब्लॉक क्षेत्र की 62 ग्राम पंचायतों में अधिकांश ग्राम पंचायतों में लगभग 50 गोशालाएं हैं। अप्रैल में खेतों की फसल कटने के बाद जिम्मेदारों ने गोशालाओं के संचालन पर ध्यान नहीं दिया। यही कारण रहा है कि ब्लॉक क्षेत्र की अधिकांश गोशालाओं में मवेशी नहीं है। इन मवेशियों को अन्ना छोड़ दिया गया है। ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम अकोढ़ी, सींगपुरा, धनौरा, नारायणपुरा, कुठौंदा आदि गांवों में गोशालाएं खाली हैं। कुछ गोशालाओं में 20-30 से लेकर एक सैकड़ा तक मवेशी थे। इस गोशालाओं से खुले छोड़े गए मवेशी अब गांवों, खेतों और सड़कों पर विचरण कर रहे हैं। गर्मी के मौसम में भूखे, प्यासे मवेशी अपना पेट भरने के लिए इधर, उधर पहुंच जाते हैं। यह हाल तब है जबकि शासन से गोशालाओं में मवेशियों के चारे भूसे के लिए धनराशि भी आवंटित होती है एवं ग्रामीण भी सहयोग के लिए तैयार रहते हैं। क्षेत्र के गजेद्र सिंह, अशफाक, अवधेश कहते हैं कि अन्ना विचरण करते जानकर कई बार स्वयं हादसे का शिकार होते हैं। उन्होंने गोशालाओं का संचालन शुरू कराने की मांग की।
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