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Jalaun News: पालिका का कारनामा, नाली पर ही बना दी इंटरलॉकिंग सड़क
Sat, 29 Mar 2025 12:39 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
Updated Sat, 29 Mar 2025 12:39 AM IST
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कोंच। नगर पालिका की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां खेतों की सिंचाई के लिए बनी सरकारी गूल (नाली) पर ही इंटरलॉकिंग सड़क बना दी गई। इस अनियमितता की पुष्टि एसडीएम द्वारा गठित जांच टीम ने भी कर दी है। यह जांच नगरपालिका के पूर्व सभासद द्वारा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव से की गई ऑनलाइन शिकायत के बाद कराई गई थी।
पूर्व सभासद अनिल पटेरिया ने 27 फरवरी को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी कि मौजा कोंच बदनपुरा के गाटा संख्या 2016 और 2093 में दर्ज सरकारी गूल को नष्ट कर इंटरलॉकिंग सड़क बना दी गई है। इस पर एसडीएम ज्योति सिंह ने मामले की जांच के लिए तहसीलदार कोंच और पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता अरुण कुमार की एक संयुक्त टीम गठित की।
जांच टीम ने मौके पर स्थलीय निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार की, जिसमें पाया गया कि सरकारी राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाली (गूल) के आंशिक भाग पर सीसी रोड/इंटरलॉकिंग का निर्माण किया गया है। जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वार्ड सभासद महेंद्र सिंह कुशवाहा ने जनसुविधा के नाम पर सड़क निर्माण का अनुरोध किया था, जिसके आधार पर यह कार्य कराया गया।
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इस पूरे मामले पर नगरपालिका के ईओ पवन किशोर मौर्य ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि वहां गूल थी। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि तत्कालीन एसडीएम की जांच और स्वीकृति के बाद ही इंटरलॉकिंग सड़क डाली गई थी। इस मामले ने नगर पालिका की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सरकारी संपत्तियों का इसी तरह से दुरुपयोग होता रहेगा या फिर इस पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, यह देखना अब बाकी है।
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पूर्व सभासद अनिल पटेरिया ने 27 फरवरी को ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी कि मौजा कोंच बदनपुरा के गाटा संख्या 2016 और 2093 में दर्ज सरकारी गूल को नष्ट कर इंटरलॉकिंग सड़क बना दी गई है। इस पर एसडीएम ज्योति सिंह ने मामले की जांच के लिए तहसीलदार कोंच और पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता अरुण कुमार की एक संयुक्त टीम गठित की।
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जांच टीम ने मौके पर स्थलीय निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट तैयार की, जिसमें पाया गया कि सरकारी राजस्व अभिलेखों में दर्ज नाली (गूल) के आंशिक भाग पर सीसी रोड/इंटरलॉकिंग का निर्माण किया गया है। जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वार्ड सभासद महेंद्र सिंह कुशवाहा ने जनसुविधा के नाम पर सड़क निर्माण का अनुरोध किया था, जिसके आधार पर यह कार्य कराया गया।
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इस पूरे मामले पर नगरपालिका के ईओ पवन किशोर मौर्य ने कहा कि उन्हें जानकारी नहीं थी कि वहां गूल थी। उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि तत्कालीन एसडीएम की जांच और स्वीकृति के बाद ही इंटरलॉकिंग सड़क डाली गई थी। इस मामले ने नगर पालिका की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सरकारी संपत्तियों का इसी तरह से दुरुपयोग होता रहेगा या फिर इस पर कोई ठोस कार्रवाई होगी, यह देखना अब बाकी है।