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सुदामा चरित्र कथा से भक्त भावविभोर
अमर उजाला जालौन
Updated Mon, 17 Jul 2017 12:02 AM IST
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-भागवत कथा सुनाते पं. अनुज शास्त्री
- फोटो : अमर उजाला
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कोंच। गुदरिया मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा प्रवक्ता पं. अनुज शास्त्री ने सुदामा चरित्र की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि सुदामा श्रीकृष्ण के गुरु भाई और परम भक्त हैं जिन्होंने बिना किसी कामना के परमात्मा में अडिग विश्वास रखते हुए उनकी भक्ति की।
कथावाचक पं. अनुज शास्त्री ने भगवान द्वारिकाधीश के विवाहों का वर्णन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने रुक्मिणी हरण भगवान द्वारिकाधीश के सत्यभामा, कालिंद्री, जाम्बबंती आदि से भी विवाहों की कथा विस्तार से सुनाते हुये कहा कि इस प्रकार उन्होंने सोलह हजार एक सौ आठ विवाह किए। उन्होंने सुदामा चरित्र का मार्मिक चित्रण कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान द्वारिकाधीश और सुदामा की मित्रता हमें मैत्री संबंधों के साथ आदर्श मित्रधर्म की भी शिक्षा देती है। उन्होंने कहा कि परमात्मा का नाम स्मरण ही कलिकाल में प्राणिमात्र को भवसागर से पार कर देता है। परमात्मा किसी न किसी रूप में इस धरा पर अवतार धारण करते हैं। कथा व्यास बताते हैं कि परमात्मा का वास सब जगह है, बस जरूरत है उसे पहचानने की। जो भी उसे सच्चे मन से याद करता है उसे वे अवश्य ही दर्शन देते हैं। परीक्षित मुकेश विदुआ ने भागवत जी की आरती उतारी और अंत में प्रसाद वितरित किया गया।
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कथावाचक पं. अनुज शास्त्री ने भगवान द्वारिकाधीश के विवाहों का वर्णन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने रुक्मिणी हरण भगवान द्वारिकाधीश के सत्यभामा, कालिंद्री, जाम्बबंती आदि से भी विवाहों की कथा विस्तार से सुनाते हुये कहा कि इस प्रकार उन्होंने सोलह हजार एक सौ आठ विवाह किए। उन्होंने सुदामा चरित्र का मार्मिक चित्रण कर श्रोताओं को भावुक कर दिया। उन्होंने कहा कि भगवान द्वारिकाधीश और सुदामा की मित्रता हमें मैत्री संबंधों के साथ आदर्श मित्रधर्म की भी शिक्षा देती है। उन्होंने कहा कि परमात्मा का नाम स्मरण ही कलिकाल में प्राणिमात्र को भवसागर से पार कर देता है। परमात्मा किसी न किसी रूप में इस धरा पर अवतार धारण करते हैं। कथा व्यास बताते हैं कि परमात्मा का वास सब जगह है, बस जरूरत है उसे पहचानने की। जो भी उसे सच्चे मन से याद करता है उसे वे अवश्य ही दर्शन देते हैं। परीक्षित मुकेश विदुआ ने भागवत जी की आरती उतारी और अंत में प्रसाद वितरित किया गया।
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