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बेटियों को पढ़ाएं, दो कुलों को साक्षर बनाए
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
Updated Wed, 25 Jan 2017 11:24 PM IST
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स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में मंचासीन अतिथि।
- फोटो : अमर उजाला
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जिले में बुधवार को राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया गया। माधौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने शिक्षा पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वह बेटों की तरह बेटियों को भी बेहतर शिक्षा दिलाएं, क्योंकि लड़कियां पढ़ लिखकर जिस घर में ब्याही जाएंगी, वहां के लोगों को भी साक्षर बनाएंगी।
बेटियों की बेहतर शिक्षा और संस्कार ही परिवार की उन्नति में सहायक साबित होते हैं। स्वास्थ्य केंद्र माधौगढ़ में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि उप जिलाधिकारी सुुरेश चंद्र ने किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि आधुनिकता की भागमभाग जिंदगी में शिक्षा बेहद जरूरी हो गई है। एक ओर जहां देश में हाई टेक्नालाजी से लैस हो रहा है, दूसरी ओर शिक्षा से
वंचित रहना समाज ही नहीं, बल्कि देश के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ करना है। कहा कि हम सभी राष्ट्रीय बालिका दिवस मना रहे हैं। यह सराहनीय है। संदेश दिया कि अभिभावक बेटियों को बेहतर शिक्षा दिलाने में योगदान दें। अन्य वक्ताओं ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण इलाकों में किसान भाई बेटियों को खेती के काम में लगा देते हैं, जो उनके भविष्य के
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साथ खिलवाड़ करने से कम नहीं है। सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वह सरकार की ओर से बच्चों को निशुल्क शिक्षा दिलाने के किए जा रहे प्रयास को सफल बनाने में सहयोग दें और बेटियों का दाखिल स्कूलों में कराए। कार्यशाला को चिकित्साधिकारी विनोद राजपूत, डा. रामकरन गौर संबोधित किया। इस मौके पर विवेक सचान, संदीप दिवाकर, डा. हरेंद्र, डा. सर्वेश, मंजू सक्सेना, राजेंद्र श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
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बेटियों की बेहतर शिक्षा और संस्कार ही परिवार की उन्नति में सहायक साबित होते हैं। स्वास्थ्य केंद्र माधौगढ़ में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि उप जिलाधिकारी सुुरेश चंद्र ने किया। इसके बाद उन्होंने कहा कि आधुनिकता की भागमभाग जिंदगी में शिक्षा बेहद जरूरी हो गई है। एक ओर जहां देश में हाई टेक्नालाजी से लैस हो रहा है, दूसरी ओर शिक्षा से
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वंचित रहना समाज ही नहीं, बल्कि देश के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ करना है। कहा कि हम सभी राष्ट्रीय बालिका दिवस मना रहे हैं। यह सराहनीय है। संदेश दिया कि अभिभावक बेटियों को बेहतर शिक्षा दिलाने में योगदान दें। अन्य वक्ताओं ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण इलाकों में किसान भाई बेटियों को खेती के काम में लगा देते हैं, जो उनके भविष्य के
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साथ खिलवाड़ करने से कम नहीं है। सरकार शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वह सरकार की ओर से बच्चों को निशुल्क शिक्षा दिलाने के किए जा रहे प्रयास को सफल बनाने में सहयोग दें और बेटियों का दाखिल स्कूलों में कराए। कार्यशाला को चिकित्साधिकारी विनोद राजपूत, डा. रामकरन गौर संबोधित किया। इस मौके पर विवेक सचान, संदीप दिवाकर, डा. हरेंद्र, डा. सर्वेश, मंजू सक्सेना, राजेंद्र श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।