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बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर किए गए हैं खास सुरक्षा इंतजाम
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उरई। चित्रकूट के भरतकूप से इटावा के कुदरैल तक 296 किमी लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं। हादसा रोकने के लिए इस पर तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ लोगों को जागरूक करने की व्यवस्था की गई है। एक्सप्रेसवे पर बीच में और किनारे पर लगाई गई मैटल बीम, रडार सॉफ्टवेयर और वाहन की रफ्तार पता करने वाले कैमरे इसको खास बना रहे हैं। दूसरे एक्सप्रेसवे पर हो रहे हादसों को ध्यान में रखते हुए बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे पर सुरक्षा की अधिकतर खामियों को दूर करने का प्रयास किया गया है। एक्सप्रेस वे के दोनों तरफ और डिवाइडर पर मैटल बीम लगाई गई है। इसका उद्देश्य है कि यदि कोई वाहन दुर्घटनाग्रस्त होता है तो वह डिवाइडर तोड़कर दूसरी विपरीत लेन में न जा सके। ताकि दूसरे वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने से बच सकें।
पहली बार मीडियन और शोलडर दोनों तरफ एक्सप्रेसवे के पूरे हिस्से में रिब्ड मार्किंग की गई है। यह रिब्ड मार्किंग ड्राइवर यदि लेन पर वाहन चलाने में लापरवाही बरतता है तो उसे ये सावधान करेंगी। एक्सप्रेसवे पर दृश्यता बढ़ाने के लिए स्ट्रीट लाइट के लिए सोडियम वेपर लैंप का उपयोग किया जाएगा। ये वैपर लैंप कोहरा अथवा धुंध में विशेष प्रभावी रहते हैं। एक्सप्रेसवे की दृश्यता बढ़ाने के लिए रोड मार्किंग के साथ सोलर ब्लिंकर भी लगाए जाएंगे। रात में विपरीत दिशा से आ रहे वाहनों की लाइट का प्रभाव कम करने के लिए डिवाइडर पर पौधरोपण किया गया है। जंगली और आवारा जानवरों को सड़क पर आने से रोकने के लिए एक्सप्रेसवे के किनारे कंटीले तारों की बाड़ भी लगाई गई है।
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पुलिस को रडार का प्रशिक्षण
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे के थानों में पदस्थ पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को फरीदाबाद में विशेष प्रशिक्षण दिया गया हैं। इसमें रडार सॉफ्टवेयर के साथ-साथ दुर्घटना होने पर क्या-क्या सावधानियां बरतनी हैं, क्या-क्या कदम उठाने हैं। इसके अलावा रडार के माध्यम से दुर्घटना के कारणों का कैसे पता करना है, इसका प्रशिक्षण दिया गया।
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ग्रामीणों और पुलिस को दिया गया प्रशिक्षण
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के खास इंतजाम के साथ-साथ लोगों में जागरुकता लाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। एक्सप्रेसवे के दो किमी के दायरे में आने वाले स्कूलों और गांवों में प्रभाव फाउंडेशन के माध्यम से लोगों को जानकारियां दी गईं। इसमें सर्विस रोड का इस्तेमाल कैसे करना है। सड़क संबंधी चिह्नों के बारे में बताया गया। इसके अलावा सड़क पर किन-किन लापरवाहियों की वजह से मौतें हो रहीं हैं ये भी बताया गया। बताया गया कि एक्सप्रेस वे पर पास के गांवों के लोगों की यदि बेवजह की आवाजाही अथवा व्यवधान पैदा करने की वजह से किसी की जान भी जा सकती है।
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पहली बार मीडियन और शोलडर दोनों तरफ एक्सप्रेसवे के पूरे हिस्से में रिब्ड मार्किंग की गई है। यह रिब्ड मार्किंग ड्राइवर यदि लेन पर वाहन चलाने में लापरवाही बरतता है तो उसे ये सावधान करेंगी। एक्सप्रेसवे पर दृश्यता बढ़ाने के लिए स्ट्रीट लाइट के लिए सोडियम वेपर लैंप का उपयोग किया जाएगा। ये वैपर लैंप कोहरा अथवा धुंध में विशेष प्रभावी रहते हैं। एक्सप्रेसवे की दृश्यता बढ़ाने के लिए रोड मार्किंग के साथ सोलर ब्लिंकर भी लगाए जाएंगे। रात में विपरीत दिशा से आ रहे वाहनों की लाइट का प्रभाव कम करने के लिए डिवाइडर पर पौधरोपण किया गया है। जंगली और आवारा जानवरों को सड़क पर आने से रोकने के लिए एक्सप्रेसवे के किनारे कंटीले तारों की बाड़ भी लगाई गई है।
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पुलिस को रडार का प्रशिक्षण
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के किनारे के थानों में पदस्थ पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को फरीदाबाद में विशेष प्रशिक्षण दिया गया हैं। इसमें रडार सॉफ्टवेयर के साथ-साथ दुर्घटना होने पर क्या-क्या सावधानियां बरतनी हैं, क्या-क्या कदम उठाने हैं। इसके अलावा रडार के माध्यम से दुर्घटना के कारणों का कैसे पता करना है, इसका प्रशिक्षण दिया गया।
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ग्रामीणों और पुलिस को दिया गया प्रशिक्षण
बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के खास इंतजाम के साथ-साथ लोगों में जागरुकता लाने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया। एक्सप्रेसवे के दो किमी के दायरे में आने वाले स्कूलों और गांवों में प्रभाव फाउंडेशन के माध्यम से लोगों को जानकारियां दी गईं। इसमें सर्विस रोड का इस्तेमाल कैसे करना है। सड़क संबंधी चिह्नों के बारे में बताया गया। इसके अलावा सड़क पर किन-किन लापरवाहियों की वजह से मौतें हो रहीं हैं ये भी बताया गया। बताया गया कि एक्सप्रेस वे पर पास के गांवों के लोगों की यदि बेवजह की आवाजाही अथवा व्यवधान पैदा करने की वजह से किसी की जान भी जा सकती है।