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Jalaun News: लूट में पिता-पुत्र को सात-सात साल की कैद
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उरई। छह साल पहले किसान के साथ मारपीट कर लूट करने वाले पिता-पुत्र को कोर्ट ने सात-सात साल की कैद सुनाई है। 22- 22 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा।
शहर कोतवाली क्षेत्र के इमिलिया गांव निवासी जगत सिंह ने एसपी को शिकायती पत्र दिया था। बताया था कि चार सितंबर 2018 को वह गांव से पुत्री के ससुराल शहर कोतवाली क्षेत्र के रगैदा गांव जा रहा था। रगैदा मोड़ पर ऑटो से उतरा तभी वहां पहले से मौजूद घनश्याम व उसका पुत्र ज्ञानचंद्र और रगैदा निवासी सुशील चौधरी व दो अज्ञात लोग तमंचा और डंडा लिए खड़े थे। उसे देखते ही उन लोगों ने उसके साथ मारपीट कर दी।
सुशील ने तमंचा लगाकर जान से मारने की धमकी दी और 47 सौ रुपये और सोने की जंजीर लूट ली। ज्ञानचंद ने उसके सिर में तमंचे की बट मार दी थी। शोर सुनकर रामनारायण व महेंद्र को आता देख हमलावर भाग गए। घटना के बाद जब वह कोतवाली पहुंचा तो पुलिस ने उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी। उसने अपना इलाज जिला अस्पताल में कराया था।
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पुलिस से रिपोर्ट दर्ज न होने पर पीड़ित ने डकैती कोर्ट में 18 सितंबर 2018 को वाद दायर किया। डकैती कोर्ट ने ज्ञानचंद, उसके पिता घनश्याम और सुशील चौधरी को तलब किया। कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज कर पुलिस ने तीनों को जेल भेज दिया था। छह साल कोर्ट में चले ट्रायल के बाद सोमवार को सुनवाई पूरी हुई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर स्पेशल जज डकैती कोर्ट डॉ. अंबरीश कुमार ने ज्ञानचंद और उसके पिता घनश्याम को दोषी करार दिया। सुशील चौधरी के खिलाफ सबूत न होने पर दोषमुक्त कर दिया।
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शहर कोतवाली क्षेत्र के इमिलिया गांव निवासी जगत सिंह ने एसपी को शिकायती पत्र दिया था। बताया था कि चार सितंबर 2018 को वह गांव से पुत्री के ससुराल शहर कोतवाली क्षेत्र के रगैदा गांव जा रहा था। रगैदा मोड़ पर ऑटो से उतरा तभी वहां पहले से मौजूद घनश्याम व उसका पुत्र ज्ञानचंद्र और रगैदा निवासी सुशील चौधरी व दो अज्ञात लोग तमंचा और डंडा लिए खड़े थे। उसे देखते ही उन लोगों ने उसके साथ मारपीट कर दी।
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सुशील ने तमंचा लगाकर जान से मारने की धमकी दी और 47 सौ रुपये और सोने की जंजीर लूट ली। ज्ञानचंद ने उसके सिर में तमंचे की बट मार दी थी। शोर सुनकर रामनारायण व महेंद्र को आता देख हमलावर भाग गए। घटना के बाद जब वह कोतवाली पहुंचा तो पुलिस ने उसकी रिपोर्ट नहीं लिखी। उसने अपना इलाज जिला अस्पताल में कराया था।
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पुलिस से रिपोर्ट दर्ज न होने पर पीड़ित ने डकैती कोर्ट में 18 सितंबर 2018 को वाद दायर किया। डकैती कोर्ट ने ज्ञानचंद, उसके पिता घनश्याम और सुशील चौधरी को तलब किया। कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज कर पुलिस ने तीनों को जेल भेज दिया था। छह साल कोर्ट में चले ट्रायल के बाद सोमवार को सुनवाई पूरी हुई। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस, गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर स्पेशल जज डकैती कोर्ट डॉ. अंबरीश कुमार ने ज्ञानचंद और उसके पिता घनश्याम को दोषी करार दिया। सुशील चौधरी के खिलाफ सबूत न होने पर दोषमुक्त कर दिया।