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साहित्य के लिए पुस्तकालय जरूरी
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जालौन। प्रदेश सरकार खेल मैदान, शौचालय व आवास तो बनवा रही है। पर पुस्तकालय का निर्माण नहीं कर रही है। नगर में एक पुस्तकालय की कमी काफी समय से महसूस की जा रही है। पुस्तकालय न होने से गरीब तबका अच्छे साहित्य से वंचित है। नगर के समाजसेवियों ने नगर में पुस्तकालय खोलने की मांग सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा व पालिकाध्यक्ष गिरीश गुप्ता से भी की है। ताकि क्षेत्र के लोगों को साहित्य की जानकारी और जरूरतमंद मेधावियों अच्छी पुस्तकें उपलब्ध हो सके। पुस्तकालय न होने से सामाजिक, आर्थिक, वैचारिक, विज्ञान, फैंटेसी, कथा, कहानी, निबंध, उपन्यास जैसी विधाओं के विलक्षण साहित्यकारों से नगर की युवा पीढ़ी वंचित बनी हुई है। पुस्तकालय न होने पर लोगों की प्रतिक्रियाएं कुछ इस प्रकार हैं -
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फोटो 01-प्रतीककांत चंसौलिया।
पुस्तकों के साहित्य से मिलती प्रेरणा
शिक्षक प्रतीककांत चंसौलिया का कहना है कि पुस्तकालय में अच्छा साहित्य मिलेगा तो लोग अवश्य ही उसको पढ़कर प्रेरणा लेंगे। यह समाज के लिए अच्छा ही होगा। वैसे भी सोशल मीडिया के दौर ने विशेषतौर पर युवाओं को साहित्य से दूर कर रखा है।
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फोटो-02-लोकेंद्र सिंह यादव।
जरूरतमंद युवाओं के लिए जरूरी
छात्र लोकेंद्र सिंह यादव कहते हैं कि महंगाई के दौर में अच्छी किताबें खरीदना हर एक के बस की बात नहीं है। यदि पुस्तकालय मिलेगा तो जरूरतमंद युवाओं को किताबों के माध्यम से नौकरी मिलने में आसानी होगी। इस पर विचार होना चाहिए।
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फोटो-03 अफजाल अहमद।
एकमात्र वाचनालय भी बंद
शिक्षक अफजाल अहमद ने बताया कि पालिका का एक वाचनालय था जो बंद है। पुस्तकालय से युवाओं के लिए रोजगार परक, साहित्यिक और पढ़ाई संबंधी पुस्तकों उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। शीघ्र ही इस पर काम होना चाहिए।
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फोटो- 04 सुहेल अख्तर।
मोबाइल से बेहतर किताबों का ज्ञान
छात्र सुहेल अख्तर कहते हैं कि पुस्तकालय न होने का नतीजा है कि खासतौर पर युवा सोशल मीडिया के माध्यमों से घिरता जा रहा है। हकीकत यह है कि किताबों से ज्ञान प्राप्त करने में जो आनंद है, वह मोबाइल पर आंखे खराब कर भी नहीं मिल सकता।
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फोटो 01-प्रतीककांत चंसौलिया।
पुस्तकों के साहित्य से मिलती प्रेरणा
शिक्षक प्रतीककांत चंसौलिया का कहना है कि पुस्तकालय में अच्छा साहित्य मिलेगा तो लोग अवश्य ही उसको पढ़कर प्रेरणा लेंगे। यह समाज के लिए अच्छा ही होगा। वैसे भी सोशल मीडिया के दौर ने विशेषतौर पर युवाओं को साहित्य से दूर कर रखा है।
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फोटो-02-लोकेंद्र सिंह यादव।
जरूरतमंद युवाओं के लिए जरूरी
छात्र लोकेंद्र सिंह यादव कहते हैं कि महंगाई के दौर में अच्छी किताबें खरीदना हर एक के बस की बात नहीं है। यदि पुस्तकालय मिलेगा तो जरूरतमंद युवाओं को किताबों के माध्यम से नौकरी मिलने में आसानी होगी। इस पर विचार होना चाहिए।
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फोटो-03 अफजाल अहमद।
एकमात्र वाचनालय भी बंद
शिक्षक अफजाल अहमद ने बताया कि पालिका का एक वाचनालय था जो बंद है। पुस्तकालय से युवाओं के लिए रोजगार परक, साहित्यिक और पढ़ाई संबंधी पुस्तकों उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। शीघ्र ही इस पर काम होना चाहिए।
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फोटो- 04 सुहेल अख्तर।
मोबाइल से बेहतर किताबों का ज्ञान
छात्र सुहेल अख्तर कहते हैं कि पुस्तकालय न होने का नतीजा है कि खासतौर पर युवा सोशल मीडिया के माध्यमों से घिरता जा रहा है। हकीकत यह है कि किताबों से ज्ञान प्राप्त करने में जो आनंद है, वह मोबाइल पर आंखे खराब कर भी नहीं मिल सकता।