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रमजान में मिठास घोल रही घरों में बनी सेवई व सूतफेनी

Sun, 03 May 2020 11:39 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2020 11:39 PM IST
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Remains were household sweetness solution Ramzaan Sivin and Sutfeni
मुस्कान - फोटो : ORAI
एट (जालौन)। यूं तो रमजान माह शुरू होते ही रोजेदारों के चेहरे खिल जाते है। दिनभर के रोजे के बाद शाम को इफ्तार के वक्त लजीज दही बड़े और छोले, सुबह सहरी में स्वादिष्ट सेवई खाने का मजा ही कुछ और है। पहले रोजेदार चुनिंदा दुकानों से सभी पकवान घरों में लाकर रखते थे लेकिन इस बार कोरोना के चलते शुरुआत के एक दो दिन जरूर रोजेदार इन लजीज व्यंजनों से दूर रहे लेकिन फिर घरों की महिलाएं आगे आईं।
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कोई घर पर ही मशीन से सिवईं बनाने लगी तो कोई यू ट्यूब की मदद से बिरयानी बनाना सीखने लगी। इन महिलाओं का कहना है कि सभी मिलकर जब कोरोना के खिलाफ खड़े होंगे, तभी इसे हरा पाएंगे। लॉकडाउन का पूरा पालन किया जाएगा और रही बात खाने पीने के सामान की तो उसके लिए हम हैं न। बता दें कि हर बार रमजान माह शुरू होते ही मुस्लिम इलाकों के बाजारों में खाने पीने की दुकानें सज जाती थीं। जगह-जगह शाम के वक्त कढ़ाई में पकती सिवईं और बड़े से तवे पर पकती बिरयानी की महक रोजेदारों की दिन भर की भूख प्यास और बढ़ा देती थी लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते बाजारों में सन्नाटा पसरा है।
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ऐसे में घरों की महिलाओं ने ही कमर कसी और आपस में मिलकर घर-घर सिवईं और सूतफेनी बनानी शुरू की। एट के कजियाना मोहल्ले की आशिया और शाहजहां बताती हैं कि घर पर सिवईं बनाने के पुरानी मशीन रखी थी, बस फिर क्या था, गली की कुछ और महिलाएं भी आ गई और अब सभी घरों पर ही उम्दा सिवईं और सूतफेनी बनाने में जुटी हैं। बोलीं, पता नही लॉकडाउन कब खुले, बिना सिवईं और सूतफेनी के रमजान कैसे बीत जाने दें। कस्बा निवासी बुजुर्ग महिला आमना बेगम हंसते हुए कहती हैं कि महिलाओं को घर पर ही सिवईं बनाते देख अपने पुराने दिन याद आ गए। अब इसमें कोई दोराय नहीं कि कोई कोरोना के आगे नहीं झुकेगा, बीमारी को मुल्क छोड़कर भागना ही होगा।
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लजीज दही-बड़े, यू ट्यूब है न
कस्बा निवासी मुस्कान का कहना है कि घर के बने चटपटे दही-बड़े के लिए परेशान थे, इसलिए उसने झट से यू ट्यूब की मदद ली और अब शाम के वक्त सभी की प्लेट पर दही-बड़े रखते हुए बेहद खुशी होती है।

शुद्ध और किफायती व्यंजन बन रहे
कस्बा निवासी रेशमा का कहना कहती हैं कि घर पर पकवान बनाने में मेहनत तो लग रही है लेकिन इस बात की भी खुशी है कि कम से कम घर वालों को खाने पीने की चीजें शुद्ध तो मिल रही हैं। साथ ही किफायती भी हैं।

रेशमा

रेशमा- फोटो : ORAI

एट में काजियाना मोहल्ले में मशीन से सिव ई बनाती आशिया व शाहजहां

एट में काजियाना मोहल्ले में मशीन से सिव ई बनाती आशिया व शाहजहां- फोटो : ORAI

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