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दिलों में दरारें न डाल सकी मजहब की दीवारें
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कालपी में चौराहे पर तैनात पुलिस फोर्स
- फोटो : ORAI
उरई (जालौन)। हर साल की 6 दिसंबर की तरह 9 नवंबर यानी शनिवार की सुबह कुछ तनाव भरी जरूर रही है, तनाव होता भी क्यों न, आखिर तीस साल पुराने विवादित राम मंदिर पर फैसला जो आना था। घड़ी की सुइयां अपनी लय में भले ही आगे बढ़ रही थी किंतु फैसले की घड़ी तक कहीं भी किसी को आने वाले घंटों में किसी भी तरह के उत्पात या बवाल की कोई आशंका नहीं थी। और हुआ भी कुछ ऐसा ही, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद न तो किसी के हाव भाव पर मंदिर बनने का मलाल नहीं था तो मस्जिद का दावा खत्म होने का चेहरे पर जुबां पर कोई गम ही था। कुल मिलाकर शहर ने यह साबित कर दिया कि अब मजहब की दीवारें उनके बीच दरारें नहीं डाल पाएंगी। शहर के अमन चैन व भाईचारे ने साबित कर दिया कि चाहे मंदिर बने या मस्जिद यहां के लोग अब एक हैं और रहेंगे।
हालांकि शुक्रवार की रात को जब लोगों को पता चला कि मंदिर निर्माण पर शनिवार की सुबह ही फैसला आना है तो दोनों वर्गों में एक बेचैनी सी जरूर दिखाई दे रही थी। चर्चाओं को बाजार गर्म नहीं हुआ लेकिन ऐसा भी नहीं था कि चर्चाएं बिल्कुल भी न हुई हों, पर इस फैसले को लेकर चर्चाएं भी कुछ अलग थीं। सभी का रात से ही कहना था कि कहीं कुछ नहीं होगा, शांति बनी रहेगी।
शनिवार की सुबह हुई तो दिखा भी कुछ वैसा ही, कालपी रोड, शहीद भगत सिंह चौराहे, घंटाघर, जिला परिषद रोड, कोंच रोड, जेल रोड और स्टेशन रोड की चाय पान की दुकानें खुली, लोगों ने एकत्र होकर समाचार पत्र भी पढ़े और बुदबुदाते हुए अपने ही शहर के ही नहीं बल्कि पूरे देश के हालात और खासतौर पर अयोध्या की स्थिति पर चर्चा जरूर की।
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जैसे ही घड़ी की सुइयां दस बजने के करीब पहुंची, तो व्यस्त रहने वाले झांसी रोड, करमेर रोड, अजनारी रोड, स्टेशन रोड, राठ रोड पर सन्नाटा पसरने लगा। पेट्रोल पंपों पर भी चहल पहल रोज की अपेक्षा कम रही। चाय, सैलून की दुकानों पर लगे टीवी सेट के आगे आंखें टिकने लगीं। जितनी धीमी टीवी की आवाज रही उतनी ही 11 और फिर 12 बजते बजते उतनी धीमी प्रतिक्रिया लोगों में रही। घरों में भी मंदिर मस्जिद पर फैसले के बाद न कहीं जश्न मना और न ही अफसोस जताया गया। तकरीबन यही स्थिति जनपद की कोंच, कालपी, माधौगढ़ और जालौन तहसीलों की भी रही।
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हालांकि शुक्रवार की रात को जब लोगों को पता चला कि मंदिर निर्माण पर शनिवार की सुबह ही फैसला आना है तो दोनों वर्गों में एक बेचैनी सी जरूर दिखाई दे रही थी। चर्चाओं को बाजार गर्म नहीं हुआ लेकिन ऐसा भी नहीं था कि चर्चाएं बिल्कुल भी न हुई हों, पर इस फैसले को लेकर चर्चाएं भी कुछ अलग थीं। सभी का रात से ही कहना था कि कहीं कुछ नहीं होगा, शांति बनी रहेगी।
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शनिवार की सुबह हुई तो दिखा भी कुछ वैसा ही, कालपी रोड, शहीद भगत सिंह चौराहे, घंटाघर, जिला परिषद रोड, कोंच रोड, जेल रोड और स्टेशन रोड की चाय पान की दुकानें खुली, लोगों ने एकत्र होकर समाचार पत्र भी पढ़े और बुदबुदाते हुए अपने ही शहर के ही नहीं बल्कि पूरे देश के हालात और खासतौर पर अयोध्या की स्थिति पर चर्चा जरूर की।
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जैसे ही घड़ी की सुइयां दस बजने के करीब पहुंची, तो व्यस्त रहने वाले झांसी रोड, करमेर रोड, अजनारी रोड, स्टेशन रोड, राठ रोड पर सन्नाटा पसरने लगा। पेट्रोल पंपों पर भी चहल पहल रोज की अपेक्षा कम रही। चाय, सैलून की दुकानों पर लगे टीवी सेट के आगे आंखें टिकने लगीं। जितनी धीमी टीवी की आवाज रही उतनी ही 11 और फिर 12 बजते बजते उतनी धीमी प्रतिक्रिया लोगों में रही। घरों में भी मंदिर मस्जिद पर फैसले के बाद न कहीं जश्न मना और न ही अफसोस जताया गया। तकरीबन यही स्थिति जनपद की कोंच, कालपी, माधौगढ़ और जालौन तहसीलों की भी रही।

एसडीएम से जानकारी लेते डीएम मन्नान अख्तर एसपी सतीश कुमार- फोटो : ORAI