{"_id":"5f4aa2438ebc3e3d11673ab9","slug":"ramleela-manchan-awaits-the-government-s-guideline-orai-news-knp5795964145","type":"story","status":"publish","title_hn":"रामलीला मंचन को शासन की गाइडलाइन का इंतजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रामलीला मंचन को शासन की गाइडलाइन का इंतजार
विज्ञापन
कोंच में होने वाली रामलीला की फाइल फोटो
- फोटो : ORAI
कोंच। कोरोना संक्रमण के चलते धार्मिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर सरकार ने पाबंदी लगा रखी है जिसके चलते गणेश महोत्सव, मोहर्रम, ईद, बकरीद से लेकर छोटे बड़े सभी त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से मनाए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में देश के सबसे बड़े पर्व रामलीला के आयोजन को लेकर तस्वीर अभी धुंधली है। कोंच की विश्व प्रसिद्ध पौने दो सौ वर्ष पुरानी ऐतिहासिक रामलीला के आयोजन को लेकर धर्मादा रक्षिणी सभा को शासन की गाइडलाइन का इंतजार है।
वैसे रामलीला में किरदार निभाने वाले रंगकर्मियों में उत्साह की कोई नहीं है और वे शासन की पाबंदियों और कोविड नियमों का पालन करते हुए मंचन के विकल्पों पर भी ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। कलाकारों का कहना है कि सीमित एक्टरों के साथ सोशल डिस्टेंसिंग आदि का पालन करते हुए मंचन करने में फिलहाल कोई दिक्कत नहीं आएगी। ऑनलाइन के विकल्प पर भी कलाकार मंथन कर रहे हैं लेकिन इसके लिए यह भी जरूरी मान रहे हैं कि पात्रों का चयन अभी से कर उन्हें पाठ वितरित कर दिए जाएं ताकि उन्हें अपनी पूरी स्क्रिप्ट कंठस्थ करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकें और मंचन में उन्हें संकेतक का सहयोग केवल कथानक को आगे ले जाने में लेना पड़े।
क्या इस साल गूंज पाएगा रावण का अट्टहास
कोंच। पर्वों और त्योहारों पर लगे कोविड के ग्रहण को लेकर इस साल कस्बावासियों की उत्सुक निगाहें कोंच की ऐतिहासिक रामलीला पर भी टिकीं हैं कि क्या इस विश्व विख्यात रामलीला को भी कोरोना का ग्रहण लगने वाला है। अगर शासन की रामलीला को लेकर आने वाली गाइडलाइन में रामलीला पर प्रतिबंध लगता है तो लोगों के कानों तक रावण के अट्टहास नहीं पहुंचने वाले हैं।
विज्ञापन
दशरथ-कैकेयी के मनुहार और प्रणय गीतों के दीवाने हैं दर्शक
कोंच। कोंच की रामलीला की सबसे सशक्त प्रस्तुति राम वनवास लीला है जिसे देखने के लिए उमड़ने वाली भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैै इसके लिए रामलीला ग्राउंड भी छोटा पड़ जाता है। कैकेयी बाग में सखियों संग जब प्रणय गीत पर तालियों की गूंज दूर तक सुनाई देती है। इस बार दर्शकों की लालसा पूरी होती हैै कि नहीं, यह आने वाली परिस्थितियों पर निर्भर है।
विज्ञापन
वैसे रामलीला में किरदार निभाने वाले रंगकर्मियों में उत्साह की कोई नहीं है और वे शासन की पाबंदियों और कोविड नियमों का पालन करते हुए मंचन के विकल्पों पर भी ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। कलाकारों का कहना है कि सीमित एक्टरों के साथ सोशल डिस्टेंसिंग आदि का पालन करते हुए मंचन करने में फिलहाल कोई दिक्कत नहीं आएगी। ऑनलाइन के विकल्प पर भी कलाकार मंथन कर रहे हैं लेकिन इसके लिए यह भी जरूरी मान रहे हैं कि पात्रों का चयन अभी से कर उन्हें पाठ वितरित कर दिए जाएं ताकि उन्हें अपनी पूरी स्क्रिप्ट कंठस्थ करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकें और मंचन में उन्हें संकेतक का सहयोग केवल कथानक को आगे ले जाने में लेना पड़े।
विज्ञापन
क्या इस साल गूंज पाएगा रावण का अट्टहास
कोंच। पर्वों और त्योहारों पर लगे कोविड के ग्रहण को लेकर इस साल कस्बावासियों की उत्सुक निगाहें कोंच की ऐतिहासिक रामलीला पर भी टिकीं हैं कि क्या इस विश्व विख्यात रामलीला को भी कोरोना का ग्रहण लगने वाला है। अगर शासन की रामलीला को लेकर आने वाली गाइडलाइन में रामलीला पर प्रतिबंध लगता है तो लोगों के कानों तक रावण के अट्टहास नहीं पहुंचने वाले हैं।
विज्ञापन
दशरथ-कैकेयी के मनुहार और प्रणय गीतों के दीवाने हैं दर्शक
कोंच। कोंच की रामलीला की सबसे सशक्त प्रस्तुति राम वनवास लीला है जिसे देखने के लिए उमड़ने वाली भीड़ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैै इसके लिए रामलीला ग्राउंड भी छोटा पड़ जाता है। कैकेयी बाग में सखियों संग जब प्रणय गीत पर तालियों की गूंज दूर तक सुनाई देती है। इस बार दर्शकों की लालसा पूरी होती हैै कि नहीं, यह आने वाली परिस्थितियों पर निर्भर है।