{"_id":"5967be8e4f1c1b50668b479d","slug":"prabhu-incarnate-when-unrighteousness-grows","type":"story","status":"publish","title_hn":"अधर्म बढ़ने पर अवतार लेते हैं प्रभू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अधर्म बढ़ने पर अवतार लेते हैं प्रभू
जालाौन
Updated Fri, 14 Jul 2017 12:10 AM IST
विज्ञापन
भागवत कथा कहते पं. अनुज शास्त्री
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोंच। गुदरिया मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में गुरुवार को कथा व्यास अनुज शास्त्री ने कहा कि जब भी पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है या भक्तों पर संकट आता है तब परमात्मा अवतार धारण कर पृथ्वी और भक्तों के कष्टों को हरते हैं। गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाते हुए कहा कि जब प्राणिमात्र के सभी सगे संबंधी उसका साथ बुरे वक्त में छोड़ देते हैं. तब ईश्वर ही उनकी मदद के लिए आते हैं। कथा में रामावतार और कृष्णावतार की कथा भी सुनाईं।
कहा कि प्राणिमात्र को केवल परमात्मा पर ही विश्वास करना चाहिए। सांसारिक बंधन तो स्वार्थपूर्ण होते हैं। ग्राह ने जब गजेन्द्र को सरोवर में खींच लिया तो उस समय वहां उपस्थित गजेन्द्र के परिवार के किसी भी सदस्य ने उसकी सहायता नहीं की तब उसने करुणा के सागर परमात्मा का स्मरण किया और भगवान ने भी उनकी मदद की। एक पल की भी देर लगाये बिना वहां आकर गजेंद्र को ग्राह के बंधन से मुक्त कराया। उन्होंने राम अवतार की कथा में बताया कि जब पृथ्वी पर रावण जैसे राक्षसों के अत्याचार ज्यादा बढ़े तो भगवान राम ने अयोध्या में राजा दशरथ के यहां अवतार लिया। कृष्णावतार की कथा में कहा कि कंस के बढते अत्याचारों से पृथ्वी कराहने लगी तो उसने गौ का रूप धारण कर क्षीर सागर में भगवान विष्णु को अपनी व्यथा सुनाई और परमात्मा ने सोलह कलाओं के साथ मथुरा स्थित कंस के कारागार में देवकी और वसुदेव के यहां अवतार धारण किया। कथा के साथ नंदोत्सव भी मनाया और प्रसाद वितरित किया गया। परीक्षित मुकेश विदुआ ने भागवतजी की आरती उतारी। अंत में प्रसाद वितरित किया गया। विद्वत् मंडल के संजय रावत, बिष्णुकांत शास्त्री, मुकेश तिवारी, रूपेश तिवारी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
कहा कि प्राणिमात्र को केवल परमात्मा पर ही विश्वास करना चाहिए। सांसारिक बंधन तो स्वार्थपूर्ण होते हैं। ग्राह ने जब गजेन्द्र को सरोवर में खींच लिया तो उस समय वहां उपस्थित गजेन्द्र के परिवार के किसी भी सदस्य ने उसकी सहायता नहीं की तब उसने करुणा के सागर परमात्मा का स्मरण किया और भगवान ने भी उनकी मदद की। एक पल की भी देर लगाये बिना वहां आकर गजेंद्र को ग्राह के बंधन से मुक्त कराया। उन्होंने राम अवतार की कथा में बताया कि जब पृथ्वी पर रावण जैसे राक्षसों के अत्याचार ज्यादा बढ़े तो भगवान राम ने अयोध्या में राजा दशरथ के यहां अवतार लिया। कृष्णावतार की कथा में कहा कि कंस के बढते अत्याचारों से पृथ्वी कराहने लगी तो उसने गौ का रूप धारण कर क्षीर सागर में भगवान विष्णु को अपनी व्यथा सुनाई और परमात्मा ने सोलह कलाओं के साथ मथुरा स्थित कंस के कारागार में देवकी और वसुदेव के यहां अवतार धारण किया। कथा के साथ नंदोत्सव भी मनाया और प्रसाद वितरित किया गया। परीक्षित मुकेश विदुआ ने भागवतजी की आरती उतारी। अंत में प्रसाद वितरित किया गया। विद्वत् मंडल के संजय रावत, बिष्णुकांत शास्त्री, मुकेश तिवारी, रूपेश तिवारी आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन