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कागजों में ही हो गई बोरिंग
ब्यूरो/ अमर उजाला, उरई
Updated Sun, 20 Dec 2015 11:13 PM IST
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बोरिंग में लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मनमानी अब उनके लिए ही फांस
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बनती जा रही है। पहले किसानों को शासन की योजनाओं का पूरा लाभ न देने और अब
गहरी व मध्यम गहरी बोरिंग का लक्ष्य पूरा न करने के मामले का जिन्न अब
बोतल से बाहर आ चुका है। किसान अब अधिकारियों पर बोरिंग के अनुदान का पैसा
हड़पने का आरोप लगा रहे
हैं। उनका कहना है कि सारी प्रक्रिया कागजों में ही पूरी कर दी गई है। वर्ष 2014-15 में ही कई जगहों पर फर्जी तरीके से गहरी बोरिंग का कार्य पूर्ण दिखाकर लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने शासन को लक्ष्य पूरा करने की रिपोर्ट भेज दी। इस पर किसानों ने अपनी आवाज बुलंद की और शासन-प्रशासन से शिकायत कर दी। इस मामले को शासन ने इसे गंभीरता
से लिया और जांच के लिए एक टीम का गठन भी कर दिया। जांच पड़ताल शुरू हुई तो जिले के विभागीय अधिकारी सकते में आ गए। अब अधिकारी मामले की लीपापोती का प्रयास कर रहे हैं। बता दें कि डकोर ब्लाक के गांव चक जगदेवपुर निवासी शिवरतन ने शासन की गहरी बोरिंग योजना के तहत अपनी पत्नी राजाबेटी के नाम वर्ष 2014-15 में आवेदन किया
था। महिला किसान की ओर से बनफरा मौजे में स्थित खेत पर बोरिंग के लिए डेढ़ लाख रुपये का अंशदान भी जमा किया गया। बिजली कनेक्शन के लिए भी 21 हजार रुपये जमा करा दिए। आरोप है कि कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद भी अधिकारियों ने बोरिंग जल्दी कराने के नाम पर पैसा ऐंठा। कुल मिलाकर किसान का दो लाख रुपये खर्च हो गया। इसके
बाद भी बोरिंग नहीं की गई। वित्तीय सत्र समाप्त हुआ तो फर्जी तरीके से कागजों में बोरिंग को पूरा दिखा दिया गया। किसान अधिकारियों के चक्कर लगाता रहा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पिछले दिनों शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच के
बाद अफसर जागे। मौजूदा वित्तीय वर्ष में आठ माह बीतने के बाद उन्हें बोरिंग कराने की याद आ गई। इसके लिए आनन फानन राजाबेटी के खेत पर मशीन भेजकर गहरी बोरिंग कराने का काम शुरू कर दिया गया है। विभागीय अधिकारी किसान को संतुष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं।
बोरिंग गहरी और मशीन छोटी
शासन की योजना के तहत खेत पर गहरी बोरिंग बड़ी मशीन से कराई जाती है। इस पर 80 हजार रुपये खर्च आता है और छोटी मशीन से बोरिंग में 35 हजार रुपये खर्च आता है। पैसा बचाने के चक्कर में विभागीय अधिकारी ने राजाबेटी के खेत पर बोरिंग करने के लिए छोटी मशीन भेज दी। मशीन दो दिन से खेत पर खड़ी है। बोरिंग के लिए गड्ढा भी खोद दिया गया लेकिन बोरिंग शुरू नहीं हुई।
जांच का विषय
कागजों पर राजाबेटी के खेत की बोरिंग कागजों में आठ माह पूर्व ही पूर्ण हो चुकी है। माना जा रहा है कि जांच टीम ने यदि इस बिंदु का जांच में शामिल किया तो निश्चित रूप से जिम्मेदारों की गर्दन फंसेगी।
वर्जन
गहरी हो या फिर मध्यम गहरी बोरिंग, किसान के खेत पर नहीं हुई है और कागजों में उसे पूर्ण दर्शाया जा रहा है तो यह बड़ी अनियमितता है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।-देवेंद्र नाथ शुक्ला,अधीक्षण अभियंता, लघु सिंचाई विभाग झांसी मंडल
हैं। उनका कहना है कि सारी प्रक्रिया कागजों में ही पूरी कर दी गई है। वर्ष 2014-15 में ही कई जगहों पर फर्जी तरीके से गहरी बोरिंग का कार्य पूर्ण दिखाकर लघु सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने शासन को लक्ष्य पूरा करने की रिपोर्ट भेज दी। इस पर किसानों ने अपनी आवाज बुलंद की और शासन-प्रशासन से शिकायत कर दी। इस मामले को शासन ने इसे गंभीरता
से लिया और जांच के लिए एक टीम का गठन भी कर दिया। जांच पड़ताल शुरू हुई तो जिले के विभागीय अधिकारी सकते में आ गए। अब अधिकारी मामले की लीपापोती का प्रयास कर रहे हैं। बता दें कि डकोर ब्लाक के गांव चक जगदेवपुर निवासी शिवरतन ने शासन की गहरी बोरिंग योजना के तहत अपनी पत्नी राजाबेटी के नाम वर्ष 2014-15 में आवेदन किया
था। महिला किसान की ओर से बनफरा मौजे में स्थित खेत पर बोरिंग के लिए डेढ़ लाख रुपये का अंशदान भी जमा किया गया। बिजली कनेक्शन के लिए भी 21 हजार रुपये जमा करा दिए। आरोप है कि कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद भी अधिकारियों ने बोरिंग जल्दी कराने के नाम पर पैसा ऐंठा। कुल मिलाकर किसान का दो लाख रुपये खर्च हो गया। इसके
बाद भी बोरिंग नहीं की गई। वित्तीय सत्र समाप्त हुआ तो फर्जी तरीके से कागजों में बोरिंग को पूरा दिखा दिया गया। किसान अधिकारियों के चक्कर लगाता रहा लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। पिछले दिनों शिकायतों के बाद शुरू हुई जांच के
बाद अफसर जागे। मौजूदा वित्तीय वर्ष में आठ माह बीतने के बाद उन्हें बोरिंग कराने की याद आ गई। इसके लिए आनन फानन राजाबेटी के खेत पर मशीन भेजकर गहरी बोरिंग कराने का काम शुरू कर दिया गया है। विभागीय अधिकारी किसान को संतुष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं।
बोरिंग गहरी और मशीन छोटी
शासन की योजना के तहत खेत पर गहरी बोरिंग बड़ी मशीन से कराई जाती है। इस पर 80 हजार रुपये खर्च आता है और छोटी मशीन से बोरिंग में 35 हजार रुपये खर्च आता है। पैसा बचाने के चक्कर में विभागीय अधिकारी ने राजाबेटी के खेत पर बोरिंग करने के लिए छोटी मशीन भेज दी। मशीन दो दिन से खेत पर खड़ी है। बोरिंग के लिए गड्ढा भी खोद दिया गया लेकिन बोरिंग शुरू नहीं हुई।
जांच का विषय
कागजों पर राजाबेटी के खेत की बोरिंग कागजों में आठ माह पूर्व ही पूर्ण हो चुकी है। माना जा रहा है कि जांच टीम ने यदि इस बिंदु का जांच में शामिल किया तो निश्चित रूप से जिम्मेदारों की गर्दन फंसेगी।
वर्जन
गहरी हो या फिर मध्यम गहरी बोरिंग, किसान के खेत पर नहीं हुई है और कागजों में उसे पूर्ण दर्शाया जा रहा है तो यह बड़ी अनियमितता है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। इसमें जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।-देवेंद्र नाथ शुक्ला,अधीक्षण अभियंता, लघु सिंचाई विभाग झांसी मंडल