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रतजगा कर फसलें बचाने में लगे किसान फिर भी चट कर रहे हैं अन्ना मवेशी
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एसडीएम को शिकायती प्रार्थना पत्र देते ग्राम खैरी के ग्रामीण
- फोटो : ORAI
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कोंच (जालौन)। । ब्लाक क्षेत्र के खैरी के किसानों ने शुक्रवार को एसडीएम अशोक कुमार से गांव की गोशाला में चारा-पानी और देखरेख के अभाव में जानवर के बीमार होने की शिकायत की। किसानों ने ये भी आरोप लगाया कि गोशाला के जानवर कई किसानों की सैकड़ों बीघे फसल चर चुके हैं। एसडीएम ने बीडीओ को गोशाला में व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए हैं।
किसानों ने बताया कि खैरी में बनी गोशाला में लगभग 50 जानवर बंद हैं। उनके लिए चारा और पानी की व्यवस्था नहीं है। देखरेख के अभाव में कई जानवर बीमार हैं। गौशाला में कर्मचारी भी नहीं है। फैंसिंग के तार जगह जगह से टूट गए हैं। इससे जानवर गोशाला से निकलकर खेतों में पहुंच जाते हैं।
किसान राजू लंबरदार, राजकिशोर, मानवेंद्र सिंह, करनसिंह, मुश्ताक, जगमोहन, रमाकांत, राजेश, श्याम बिहारी, मनीष, आनंद, रमन, श्याम किशोर ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव गोशाला पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। एसडीएम ने बीडीओ को गांव जाकर गोशाला का निरीक्षण करने और व्यवस्था में सुधार कराने के साथ जानवरों की जियो टैगिंग कराने के निर्देश दिए।
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गोशाला में दम तोड़ रहे जानवर
किसान कौशल किशोर ने बताया कि गोशाला में भूसा, पानी और तिरपाल की व्यवस्था नहीं है। भूख प्यास के कारण जानवर दम तोड़ रहे हैं। मृत जानवरों के शव कुत्ते इधर उधर घसीटकर ले जाते हैं।
बोले किसान
किसान ब्रजेंद्र सिंह निरंजन अन्ना जानवरों से किसान परेेशान हैं। गांव में गोशाला होनेे का कोई मतलब नहीं है, तार फैंसिंग टूटी होने से जानवर निकलकर खेतों में पहुंच जाते हैं। अधिकारी किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
किसान कृष्ण अवतार सिंह ने कहा कि गोशाला में अन्ना जानवर बंद करने के आदेश जिले में बेअसर हैं। हर गांव में सैकड़ों की संख्या में जानवर अन्ना घूम रहे हैं। किसानों खेतों पर रतजगा कर फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
किसान अमित मिश्रा ने बताया परिवार के सदस्यों के साथ बारी बारी से खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। दूसरा कोई काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके बावजूद चूक होने पर अन्ना जानवर फसल चर जाते हैं।
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किसानों ने बताया कि खैरी में बनी गोशाला में लगभग 50 जानवर बंद हैं। उनके लिए चारा और पानी की व्यवस्था नहीं है। देखरेख के अभाव में कई जानवर बीमार हैं। गौशाला में कर्मचारी भी नहीं है। फैंसिंग के तार जगह जगह से टूट गए हैं। इससे जानवर गोशाला से निकलकर खेतों में पहुंच जाते हैं।
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किसान राजू लंबरदार, राजकिशोर, मानवेंद्र सिंह, करनसिंह, मुश्ताक, जगमोहन, रमाकांत, राजेश, श्याम बिहारी, मनीष, आनंद, रमन, श्याम किशोर ने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव गोशाला पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। एसडीएम ने बीडीओ को गांव जाकर गोशाला का निरीक्षण करने और व्यवस्था में सुधार कराने के साथ जानवरों की जियो टैगिंग कराने के निर्देश दिए।
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गोशाला में दम तोड़ रहे जानवर
किसान कौशल किशोर ने बताया कि गोशाला में भूसा, पानी और तिरपाल की व्यवस्था नहीं है। भूख प्यास के कारण जानवर दम तोड़ रहे हैं। मृत जानवरों के शव कुत्ते इधर उधर घसीटकर ले जाते हैं।
बोले किसान
किसान ब्रजेंद्र सिंह निरंजन अन्ना जानवरों से किसान परेेशान हैं। गांव में गोशाला होनेे का कोई मतलब नहीं है, तार फैंसिंग टूटी होने से जानवर निकलकर खेतों में पहुंच जाते हैं। अधिकारी किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
किसान कृष्ण अवतार सिंह ने कहा कि गोशाला में अन्ना जानवर बंद करने के आदेश जिले में बेअसर हैं। हर गांव में सैकड़ों की संख्या में जानवर अन्ना घूम रहे हैं। किसानों खेतों पर रतजगा कर फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
किसान अमित मिश्रा ने बताया परिवार के सदस्यों के साथ बारी बारी से खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। दूसरा कोई काम नहीं कर पा रहे हैं। इसके बावजूद चूक होने पर अन्ना जानवर फसल चर जाते हैं।