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मअडी शुल्क में कमी से किसान खुश तो आढ़ती नाखुश
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उरई (जालौन)। प्रदेश सरकार की ओर से मंडी शुल्क में एक प्रतिशत की कमी का किसानों ने तो स्वागत किया है लेकिन आढ़ती अभी भी खुश नहीं हैं। आढ़ती टैक्स छूट में अभी और कमी चाहते हैं। अभी तक किसानों को 2.5 प्रतिशत मंडी शुल्क देना पड़ता था। इसमें एक प्रतिशत की कमी होने से 1.5 फीसदी देना होगा। आढ़ती मध्य प्रदेश की तरह एक प्रतिशत मंडी शुल्क चाहते हैं। उनका कहना है कि मांग पूरी होने तक विरोध जारी रखेंगे।
किसान बोले, होगी बचत
महेवा के किसान लरकेंद्र सिंह का कहना है कि मंडी में उपज बेचने में करीब 2.5 प्रतिशत टैक्स लगता था। टैक्स कम होने से किसानों को एक प्रतिशत की बचत होगी।
महेवा के किसान पप्पू सिंह बैरई का कहना है कि फसलों का समर्थन मूल्य काफी कम है, मंडी में अत्यधिक मंडी शुल्क देना पड़ता था। अब कुछ राहत मिलेगी।
रामपुरा के डिकौली जाएगा गांव के प्रगतिशील किसान सत्तेन्द्र सिंह मंडी शुल्क घटने के फैसला स्वागत किया है। कहा कि किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।
कुठौंद के किसान जनक सिंह ने कहा कि डीजल, जोताई आदि के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इससे कृषि लागत बढ़ रही है। मंडी शुल्क घटने से उपज बेचने पर कुछ बचत हो जाएगी।
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पहाड़ गांव के किसान कृपाशंकर पालीवाल ने कहा कि मंडी शुल्क अधिक होने से किसान बिचौलियों उपज बेचते थे, अब वह सीधे मंडी में बेचेंगे।
मुहम्मदाबाद के किसान श्याम सुंदर अधिक शुल्क की वजह से किसान मंडी में माल बचने में रुचि नहीं लेते थे, अब किसान मंडी में ही उपज बेचेंगे।
पूरा मंडी शुल्क माफ हो
कालपी मंडी व्यापार संघ के अध्यक्ष शिशु यादव ने कहा कि टैक्स कम करने से व्यापारियों को रहत मिलने वाली नहीं है। पूरा टैक्स माफ नहीं होता तब तक व्यापारी का कोई नहीं है।
व्यापारी संघ के महामंत्री रूप सिंह का कहना है कि अन्य राज्यों की मंडियों में 50 पैसे मंडी शुल्क और 50 पैसे विकास शुल्क लिया जाता है। प्रदेश में माफी के बाद भी 1.50 रुपये टैक्स देना पड़ेगा।
कोंच। गल्ला व्यापारी समिति के पूर्व अध्यक्ष अजय गोयल का कहना है कि सरकार की नीति व्यापारियों के हित में नहीं है। गलत नीति से गल्ला व्यवसाय पहले ही चौपट हो चुका है।
गल्ला व्यापारी समिति के अध्यक्ष अजय रावत का कहना है कि जब तक मंडी शुल्क मध्य प्रदेश की तरह नहीं लागू होगा तब तक गल्ला व्यापारी नाखुश ही रहेंगे।
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किसान बोले, होगी बचत
महेवा के किसान लरकेंद्र सिंह का कहना है कि मंडी में उपज बेचने में करीब 2.5 प्रतिशत टैक्स लगता था। टैक्स कम होने से किसानों को एक प्रतिशत की बचत होगी।
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महेवा के किसान पप्पू सिंह बैरई का कहना है कि फसलों का समर्थन मूल्य काफी कम है, मंडी में अत्यधिक मंडी शुल्क देना पड़ता था। अब कुछ राहत मिलेगी।
रामपुरा के डिकौली जाएगा गांव के प्रगतिशील किसान सत्तेन्द्र सिंह मंडी शुल्क घटने के फैसला स्वागत किया है। कहा कि किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।
कुठौंद के किसान जनक सिंह ने कहा कि डीजल, जोताई आदि के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इससे कृषि लागत बढ़ रही है। मंडी शुल्क घटने से उपज बेचने पर कुछ बचत हो जाएगी।
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पहाड़ गांव के किसान कृपाशंकर पालीवाल ने कहा कि मंडी शुल्क अधिक होने से किसान बिचौलियों उपज बेचते थे, अब वह सीधे मंडी में बेचेंगे।
मुहम्मदाबाद के किसान श्याम सुंदर अधिक शुल्क की वजह से किसान मंडी में माल बचने में रुचि नहीं लेते थे, अब किसान मंडी में ही उपज बेचेंगे।
पूरा मंडी शुल्क माफ हो
कालपी मंडी व्यापार संघ के अध्यक्ष शिशु यादव ने कहा कि टैक्स कम करने से व्यापारियों को रहत मिलने वाली नहीं है। पूरा टैक्स माफ नहीं होता तब तक व्यापारी का कोई नहीं है।
व्यापारी संघ के महामंत्री रूप सिंह का कहना है कि अन्य राज्यों की मंडियों में 50 पैसे मंडी शुल्क और 50 पैसे विकास शुल्क लिया जाता है। प्रदेश में माफी के बाद भी 1.50 रुपये टैक्स देना पड़ेगा।
कोंच। गल्ला व्यापारी समिति के पूर्व अध्यक्ष अजय गोयल का कहना है कि सरकार की नीति व्यापारियों के हित में नहीं है। गलत नीति से गल्ला व्यवसाय पहले ही चौपट हो चुका है।
गल्ला व्यापारी समिति के अध्यक्ष अजय रावत का कहना है कि जब तक मंडी शुल्क मध्य प्रदेश की तरह नहीं लागू होगा तब तक गल्ला व्यापारी नाखुश ही रहेंगे।