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उरई डीएम ने शुरु किया था युवाओं का भविष्य सवांरने का प्रोग्राम, 26 जनवरी से पूरे प्रदेश में होगा लागू
Sat, 23 Jan 2021 09:11 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौन
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 23 Jan 2021 09:11 PM IST
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बच्चों को पढ़ाते एसडीएम
- फोटो : amar ujala
उरई का जीआईसी का पुस्तकालय भवन इन दिनों युवाओं का भविष्य संवारने में मदद कर रहा है। यहां पर पर चलने वाले मार्गदर्शन केंद्र (कॅरियर कोचिंग) ने अपने शुरुआती तीन साल में ही पंद्रह से अधिक ऐसे मेधावियों को सरकारी नौकरी से जोड़ा, जिनके सपनों के बीच उनकी आर्थिक स्थिति बाधा बन रही थी।
अच्छी बात यह भी है कि जनपद के इस मार्ग दर्शन केंद्र में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रतिभागियों का मार्ग दर्शन करने के लिए न सिर्फ शिक्षकों की नियुक्ति है, बल्कि स्वयं ही ऐसी परीक्षाओं में सफलता अर्जित करने वाले अधिकारी भी केंद्र में जाकर एक शिक्षक की भांति ही प्रतिभागियों को गाइड करते हैं।
जिलाधिकारी डॉ. मन्नान अख्तर के निर्देशन में शुरू हुए इस केंद्र के बारे में जानकारी देते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक भगवत पटेल ने बताया कि जुलाई 2018 में जब प्रशासन की ओर से उरई के डिग्री कालेज में युवाओं के लिए ‘डीएम टॉक शो’ का एक कार्यक्रम चल रहा था, तभी एक छात्रा ने जरूरतमंद मेधावियों के लिए प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर सवाल उठाया और जवाब मिलने से पहले ही उसकी आंखों में आंसू थे।
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बस उसी वक्त से ही डीएम के निर्देश पर मार्गदर्शन केंद्र स्थापित करने की तैयारी शुरू हुई और आज इस चौथे साल में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रहे करीब 60 प्रतिभाग कोचिंग का लाभ ले रहे हैं।
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अच्छी बात यह भी है कि जनपद के इस मार्ग दर्शन केंद्र में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रतिभागियों का मार्ग दर्शन करने के लिए न सिर्फ शिक्षकों की नियुक्ति है, बल्कि स्वयं ही ऐसी परीक्षाओं में सफलता अर्जित करने वाले अधिकारी भी केंद्र में जाकर एक शिक्षक की भांति ही प्रतिभागियों को गाइड करते हैं।
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जिलाधिकारी डॉ. मन्नान अख्तर के निर्देशन में शुरू हुए इस केंद्र के बारे में जानकारी देते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक भगवत पटेल ने बताया कि जुलाई 2018 में जब प्रशासन की ओर से उरई के डिग्री कालेज में युवाओं के लिए ‘डीएम टॉक शो’ का एक कार्यक्रम चल रहा था, तभी एक छात्रा ने जरूरतमंद मेधावियों के लिए प्रशासन की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर सवाल उठाया और जवाब मिलने से पहले ही उसकी आंखों में आंसू थे।
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बस उसी वक्त से ही डीएम के निर्देश पर मार्गदर्शन केंद्र स्थापित करने की तैयारी शुरू हुई और आज इस चौथे साल में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयारी कर रहे करीब 60 प्रतिभाग कोचिंग का लाभ ले रहे हैं।
डीएम की क्लास मिली तो बीडीओ बना मजदूर का बेटा
उरई। कहते हैं कि इरादे मजबूत हो तो मंजिल भी मिल ही जाती है, कदौरा के गांव चंदरसी निवासी मजदूर देवीदीन के बेटे रामू सिंह के लिए मार्गदर्शन केंद्र किसी वरदान से कम नहीं रहा है। रामू ने बताया कि उसने केंद्र का सबसे पहला बैच 2018 में ज्वाइन किया था, परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पांच भाइयों में एक राज मिस्त्री और बाकी के चार बेरोजगार ही थे। तभी मार्ग दर्शन कोचिंग का सहारा मिला।
यहां डीएम मन्नान अख्तर स्वयं ही क्लास लेने आते थे, उनकी बताई गई बातें, पढ़ाई की तरीके और उनके अपने अनुभव आदि कुछ ऐसी चीजें रही जिन्होंने उनके कॅरियर को आगे बढ़ाया। बकौल रामू उनका ग्राम विकास अधिकारी और रेलवे दोनों में चयन हो गया। फिलहाल वे रेलवे के ग्रुप डी की नौकरी कर रहे हैं, जल्द ही वे बीडीओ की ज्वाइनिंग भी लेंगे। रामू ने बताया कि वे अपने परिवार में एकलौते है, जिसे सरकारी नौकरी करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
केंद्र में पढ़े और अब बच्चों को पढ़ा रहे राजनारायण
उरई चुर्खी रोड के औंता गांव निवासी किसान जगन्नाथ के बेटे राजनारायण का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए लग नहीं रहा था कि कभी सरकारी नौकरी का सपना साकार भी होगा। फिर मार्ग दर्शन की पहली प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए और पहले बैच के चयनित 30 प्रतिभागियों में उनका भ ीनाम आया। राजनारायण ने बताया कि केंद्र की मदद से ही उनका रेलवे और शिक्षा विभाग दोनों में चयन हुआ।
फिलहाल वे परिषदीय विद्यालय में शिक्षक हैं। कहना है कि केंद्र सबसे अधिक बात यह थी कि वहां सभी जरूरतमंद प्रतिभागी ही थे, जिस कारण प्रतिस्पर्धा और बढ़ जाती थी। फिर केंद्र के शिक्षक हो या वहां आने वाले प्रशासन के अधिकारी एक ही बात कहते थे, कि जिस क्षेत्र में रुचि हो, उसी में कामयाबी पाने का प्रयास करना चाहिए। यही मंत्र हम साथियों के लिए सफलता की सीढ़ी भी बना।
उरई। कहते हैं कि इरादे मजबूत हो तो मंजिल भी मिल ही जाती है, कदौरा के गांव चंदरसी निवासी मजदूर देवीदीन के बेटे रामू सिंह के लिए मार्गदर्शन केंद्र किसी वरदान से कम नहीं रहा है। रामू ने बताया कि उसने केंद्र का सबसे पहला बैच 2018 में ज्वाइन किया था, परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पांच भाइयों में एक राज मिस्त्री और बाकी के चार बेरोजगार ही थे। तभी मार्ग दर्शन कोचिंग का सहारा मिला।
यहां डीएम मन्नान अख्तर स्वयं ही क्लास लेने आते थे, उनकी बताई गई बातें, पढ़ाई की तरीके और उनके अपने अनुभव आदि कुछ ऐसी चीजें रही जिन्होंने उनके कॅरियर को आगे बढ़ाया। बकौल रामू उनका ग्राम विकास अधिकारी और रेलवे दोनों में चयन हो गया। फिलहाल वे रेलवे के ग्रुप डी की नौकरी कर रहे हैं, जल्द ही वे बीडीओ की ज्वाइनिंग भी लेंगे। रामू ने बताया कि वे अपने परिवार में एकलौते है, जिसे सरकारी नौकरी करने का अवसर प्राप्त हुआ है।
केंद्र में पढ़े और अब बच्चों को पढ़ा रहे राजनारायण
उरई चुर्खी रोड के औंता गांव निवासी किसान जगन्नाथ के बेटे राजनारायण का कहना है कि परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए लग नहीं रहा था कि कभी सरकारी नौकरी का सपना साकार भी होगा। फिर मार्ग दर्शन की पहली प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए और पहले बैच के चयनित 30 प्रतिभागियों में उनका भ ीनाम आया। राजनारायण ने बताया कि केंद्र की मदद से ही उनका रेलवे और शिक्षा विभाग दोनों में चयन हुआ।
फिलहाल वे परिषदीय विद्यालय में शिक्षक हैं। कहना है कि केंद्र सबसे अधिक बात यह थी कि वहां सभी जरूरतमंद प्रतिभागी ही थे, जिस कारण प्रतिस्पर्धा और बढ़ जाती थी। फिर केंद्र के शिक्षक हो या वहां आने वाले प्रशासन के अधिकारी एक ही बात कहते थे, कि जिस क्षेत्र में रुचि हो, उसी में कामयाबी पाने का प्रयास करना चाहिए। यही मंत्र हम साथियों के लिए सफलता की सीढ़ी भी बना।