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Jalaun News: माटी के मोल हुआ प्याज, निकाल रहा किसानों के आंसू

Mon, 01 Jun 2026 12:37 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 12:37 AM IST
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Onions are becoming dirt cheap, making farmers cry.
फोटो - 01 खराब हो रही प्याज को साफ करते किसान। संवाद
उरई। कभी किसानों के लिए मुनाफे की उम्मीद माना जाने वाला प्याज इस बार घाटे और मायूसी की फसल बन गया है। प्याज के दाम इस कदर गिर गए हैं कि खेत किराये पर लेकर खेती करने वाले बलकट किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच गए हैं। सबसे ज्यादा मार बलकट के किसानों को पड़ी है। 52 हजार की लागत के बाद मात्र सात हजार रुपये ही निकल सके हैं।
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जिले में करीब 1500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्याज की खेती हुई है। अच्छी पैदावार के बावजूद किसानों के चेहरे पर खुशी नहीं है। कुछ महीने पहले जो प्याज 20 से 50 रुपये किलो तक बिक रहा था, वही आज 5 से 7 रुपये किलो के भाव पर पहुंच गया है। ऐसे में सबसे ज्यादा संकट उन किसानों पर आया है जिन्होंने बलकट पर खेत लेकर प्याज बोया था।
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किसानों के अनुसार एक बीघा खेत बालकट पर लेने के लिए करीब 12 हजार रुपये देने पड़ते हैं। इसके बाद बीज, खाद, दवा, सिंचाई, मजदूरी और फसल तैयार करने में लगभग 40 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। इस तरह एक बीघा में कुल लागत 52 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। लेकिन जब फसल बेचने की बारी आई तो पूरा प्याज बेचने के बाद भी मुश्किल से छह से सात हजार रुपये ही हाथ आए।
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किसान रामस्वरूप की आंखों में मायूसी साफ दिखाई देती है। वह बताते हैं कि इस बार उन्होंने उम्मीद के साथ प्याज की खेती की थी। परिवार को भरोसा था कि फसल बिकेगी तो घर की आर्थिक हालत सुधरेगी, लेकिन अब लागत का एक छोटा हिस्सा भी वापस नहीं मिल पा रहा। उनका कहना है, दिन-रात खेत में मेहनत की, पानी लगाया, दवा डाली, मजदूर लगाए, लेकिन मंडी में पहुंचते ही सारी उम्मीदें टूट गईं।

हरिओम बताते हैं कि उन्होंने उधार लेकर खेती की थी। अब फसल की कीमत इतनी कम है कि कर्ज चुकाना तो दूर, घर का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। वह कहते हैं कि सोचा था प्याज बिकेगी तो बेटी की पढ़ाई और घर का खर्च चल जाएगा, लेकिन अब समझ नहीं आ रहा कि नुकसान की भरपाई कैसे होगी।

कई किसानों का कहना है कि मंडी तक प्याज पहुंचाने का किराया और मजदूरी भी नहीं निकल रही। कुछ किसान तो मजबूरी में फसल को खेत में ही छोड़ने या औने-पौने दामों पर बेचने को विवश हैं। उनका दर्द है कि जिस फसल को तैयार करने में महीनों की मेहनत और हजारों रुपये लगे, आज उसकी कीमत मिट्टी से भी कम मिल रही है।


खराब हो रही प्याज को मजदूरी चुकाने के लिए कर रहे साफ

इस बार प्याज के दाम गिर के साथ साथ मौसम भी किसानों का साथ नहीं दे रहा है। सैंकड़ों क्विंटल रखी प्याज अब उमस से खराब होने लगा है। किसानों का कहना है कि अगर रेट अच्छे होते तो वह उन्हें बेच देते, लेकिन स्टोर करके रख दिया था कि बाद में बेच देंगे, लेकिन मौसम के खराब हो जाने से प्याज बोरी में रखी खराब हो रही है। इससे किसान मजदूरी चुकाने के लिए प्रतिदिन साफ कर रहे हैं, उनका कहना है कि इतनी तो बची रहे कि जिन लोगों ने खेतों में काम किया है, उनकी मेहनत दे दी जाए।
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