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जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन सिलेंडर की कमी नहीं
अमर उजाला जालाौन
Updated Sat, 12 Aug 2017 11:53 PM IST
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अस्पताल मे आक्सीजन देती नर्स।
- फोटो : अमर उजाला
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उरई। गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन की कमी से 50 से अधिक मरीजों की मौत के बाद जिले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी सतर्क हो गए हैं। शनिवार को मेडिकल कॉलेज के साथ ही जिला पुरुष व महिला अस्पताल में आक्सीजन सिलेंडर की उपलब्धता की अधिकारियों ने जांच की। फिलहाल तीनों ही अस्पतालों में कोई दिक्कत नहीं है। जरूरत के हिसाब से हमेशा आक्सीजन सिलेंडर मौजूद रहते हैं।
जिला पुरुष अस्पताल में औसतन रोज दो सिलेंडर और महीने में करीब 50 आक्सीजन सिलेंडर खर्च होते हैं। इसी तरह जिला महिला अस्पताल में 15 से 20 सिलेंडर हर महीने खपत होती है। दोनों अस्पतालों में 106 आक्सीजन सिलेंडरों का स्टाक है। इसमें पुरुष अस्पताल में 10 बड़े व 60 छोटे सहित 70, जिसमें रहते हैं जबकि महिला अस्पताल में 36 छोटे सिलेंडरों का स्टाक मौजूद है। इमरजेंसी में भी 10 सिलेंडर हर समय उपलबध रहते हैं। बड़े सिलेंडर में 3.5 किलो और छोटे में 1.7 किलो आक्सीजन रहती है। सीएमएस ने बताया कि बीस-पच्चीस सिलेंडर के खत्म होते अस्पताल प्लांट भेजकर भरे सिलेंडर मंगा लिए जाते हैं। छोटा सिलेंडर 125 रुपये और बड़ा 350 रुपये में भरा जाता है। फिलिंग प्राइवेट कंपनियों से कराई जाती है। कंपनी को इसका नगद भुगतान किया जाता है। फिलहाल अस्पताल का कंपनी पर कोई बकाया नहीं है। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य आरके सिंह ने बताया कि कॉलेज में छोटे 40 और बड़े 10 सिलेंडर मौजूद हैं। सप्लाई का ठेका एक स्थानीय एजेंसी को दे रखा। करीब आधे सिलेंडर खाली होने पर एजेंसी से सप्लाई मंगा ली जाती है। 20-25 सिलेंडर आक्सीजन हमेशा स्टाक में रहती है।
संकट बढ़ा सकता है हाईवे का जाम
जिला पुरुष और महिला के लिए लगभग पंद्रह दिन में ऑक्सीजन सिलेंडरों की खेप झांसी या कानपुर से मंगाई जाती है। हालांकि अभी तक कोई दिक्कत नहीं हुई लेकिन हाईवे पर जाम में अक्सर सिलेंडर लगी गाड़ी फंस जाती है। कानपुर की ओर कालपी और झांसी की ओर एट के पास अक्सर हादसे में ट्रक आदि के खराब होने से घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है। इस जाम में आक्सीजन सिलेंडर लाने वाली गाड़ियां भी फंस जाती हैं। हालांकि अभी तक कोई दिक्कत नहीं आई लेकिन अगर जाम लंबा लगा और बीमारियों व हादसे के कारण मरीजों की संख्या बढ़ी तो बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगर कानपुर और झांसी की तरह जिले में आक्सीजन का प्लांट लग जाए तो फिलिंग के लिए भागदौड़ की झंझट खत्म हो सकती है।
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एनआईसीयू में चार कंसलट्रेटर मशीनें भी हैं
सिलेंडरों के अलावा महिला अस्पताल स्थित एनआईसीयू में नवजात बच्चों के लिए चार आक्सीजन कंसलट्रेटर मशीनें लगी हैं। इनका प्रयोग उन बच्चों के लिए किया जाता है जो पैदा होते ही बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक एक मशीन से एक बार में तीन बच्चों को आक्सीजन सप्लाई की जा सकती है।
अब तक नहीं आई कोई दिक्कत
महिला अस्पताल की सीएमएस सुनीता बनौधा का कहना है कि दोनों अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन सिलेंडर हर वक्त रहते हैं। रही बात जाम की तो इसमें अस्पताल प्रशासन क्या कर सकता है। फिर भी अस्पताल को कभी सिलेंडरों से खाली नहीं रखा जाता। यही वजह है कि अभी तक आक्सीजन सिलेंडर की वजह से तो किसी की जान पर नहीं बनी।
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जिला पुरुष अस्पताल में औसतन रोज दो सिलेंडर और महीने में करीब 50 आक्सीजन सिलेंडर खर्च होते हैं। इसी तरह जिला महिला अस्पताल में 15 से 20 सिलेंडर हर महीने खपत होती है। दोनों अस्पतालों में 106 आक्सीजन सिलेंडरों का स्टाक है। इसमें पुरुष अस्पताल में 10 बड़े व 60 छोटे सहित 70, जिसमें रहते हैं जबकि महिला अस्पताल में 36 छोटे सिलेंडरों का स्टाक मौजूद है। इमरजेंसी में भी 10 सिलेंडर हर समय उपलबध रहते हैं। बड़े सिलेंडर में 3.5 किलो और छोटे में 1.7 किलो आक्सीजन रहती है। सीएमएस ने बताया कि बीस-पच्चीस सिलेंडर के खत्म होते अस्पताल प्लांट भेजकर भरे सिलेंडर मंगा लिए जाते हैं। छोटा सिलेंडर 125 रुपये और बड़ा 350 रुपये में भरा जाता है। फिलिंग प्राइवेट कंपनियों से कराई जाती है। कंपनी को इसका नगद भुगतान किया जाता है। फिलहाल अस्पताल का कंपनी पर कोई बकाया नहीं है। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य आरके सिंह ने बताया कि कॉलेज में छोटे 40 और बड़े 10 सिलेंडर मौजूद हैं। सप्लाई का ठेका एक स्थानीय एजेंसी को दे रखा। करीब आधे सिलेंडर खाली होने पर एजेंसी से सप्लाई मंगा ली जाती है। 20-25 सिलेंडर आक्सीजन हमेशा स्टाक में रहती है।
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संकट बढ़ा सकता है हाईवे का जाम
जिला पुरुष और महिला के लिए लगभग पंद्रह दिन में ऑक्सीजन सिलेंडरों की खेप झांसी या कानपुर से मंगाई जाती है। हालांकि अभी तक कोई दिक्कत नहीं हुई लेकिन हाईवे पर जाम में अक्सर सिलेंडर लगी गाड़ी फंस जाती है। कानपुर की ओर कालपी और झांसी की ओर एट के पास अक्सर हादसे में ट्रक आदि के खराब होने से घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है। इस जाम में आक्सीजन सिलेंडर लाने वाली गाड़ियां भी फंस जाती हैं। हालांकि अभी तक कोई दिक्कत नहीं आई लेकिन अगर जाम लंबा लगा और बीमारियों व हादसे के कारण मरीजों की संख्या बढ़ी तो बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगर कानपुर और झांसी की तरह जिले में आक्सीजन का प्लांट लग जाए तो फिलिंग के लिए भागदौड़ की झंझट खत्म हो सकती है।
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एनआईसीयू में चार कंसलट्रेटर मशीनें भी हैं
सिलेंडरों के अलावा महिला अस्पताल स्थित एनआईसीयू में नवजात बच्चों के लिए चार आक्सीजन कंसलट्रेटर मशीनें लगी हैं। इनका प्रयोग उन बच्चों के लिए किया जाता है जो पैदा होते ही बीमारी की चपेट में आ जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक एक मशीन से एक बार में तीन बच्चों को आक्सीजन सप्लाई की जा सकती है।
अब तक नहीं आई कोई दिक्कत
महिला अस्पताल की सीएमएस सुनीता बनौधा का कहना है कि दोनों अस्पतालों में पर्याप्त मात्रा में आक्सीजन सिलेंडर हर वक्त रहते हैं। रही बात जाम की तो इसमें अस्पताल प्रशासन क्या कर सकता है। फिर भी अस्पताल को कभी सिलेंडरों से खाली नहीं रखा जाता। यही वजह है कि अभी तक आक्सीजन सिलेंडर की वजह से तो किसी की जान पर नहीं बनी।