कोंच/कोटरा। कोविड की छाया में सप्ताह भर घरों में विराजमान गणपति का शनिवार को बिना शोर शराबेे के विसर्जन हो गया। इसी के साथ नम आंखों के बीच गणपति उत्सव का समापन हो गया। गणपति प्रतिमाओं के विसर्जन में शासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए शोभायात्रा भी नहीं निकाली गई और न ही ढोल नगाड़ों का शोर सुनाई दिया। सुबह से शुरू हुआ विसर्जन का तांता देर शाम तक जारी रहा। सैकड़ों गणपति प्रतिमाओं को पूरे धनुताल में प्रतिमाएं विसर्जित कीं।
नगर व क्षेत्र में दर्जनों की संख्या में गणेश प्रतिमाएं पंडालों में विराजमान की जाती थी। सप्ताह भर धार्मिक आयोजन चलते रहते थे। लेकिन अबकी बार गणेश महोत्सव पूरी तरह से कोविड की छाया में मनाया गया। पंडालों में विराजमान कराए जाने के बजाए घरों मेें प्रतिमाएं बिठाईं गईं थीं और शनिवार की सुबह से ही प्रतिमाओं को बिना शोभायात्रा के एकला चल के तहत धनुताल ले जाया गया जहां आरती पूजा के बाद उनका नम आंखों के बीच विसर्जन कर दिया गया। इस दौरान हल्के फुल्के गणपति बप्पा मोरया के उद्घोष भी सुनाई दिए। प्राचीन गढी पर विराजमान गणपति, भुंजरया तिराहे की गणेश प्रतिमा, किराना कमेटी के गणेश, सर्राफा कमेटी, रेडीमेड कमेटी, रामगंज बाजार, मोबाइल व्यवसायियों, नई बस्ती डेरा, तिलक नगर, पटेल नगर, लवली चौराहा आदि के गणेश भी धनुताल के पवित्र जल में विसर्जित कर किए गए। विसर्जन स्थल धनुताल पर एसडीएम अशोक कुमार, इंसपेक्टर क्राइम उदयभान गौतम, रमेश तिवारी आदि पुलिस फोर्स के साथ मौजूद रहे। उधर, ग्रामीण इलाकों से भी गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन कर दिया गया है। नदीगांव में गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारे के साथ नम आंखों से विदाई दी गई। कस्बे में रखी गई गणेश प्रतिमाओं को पहूज नदी में विसर्जित किया गया। कस्बा कोटरा में भी सादगी से बेतवा नदी में प्रतिमाएं विसर्जित की गई।

विसर्जन को जाते गणपति- फोटो : ORAI