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Jalaun News: गोशाला में न टिनशेड, न चारा-पानी
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कदौरा। ब्लॉक की 47 गोशालाओं पर एनजीटी के जुर्माना लगाने के बाद भी ब्लॉक के जिम्मेदार उदासीन है। हाईवे किनारे और आसपास के गांवों की गोशालाओं में अधिकारी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की फोटो खिंचवा कर जिले के अधिकारियों और एनजीटी को गुमराह करते हैं। बीडीओ, सचिव या अन्य अधिकारी महीनों के हिसाब से देखने नहीं जाते है। इनमें कई गोशाला में टिनशेड तक नहीं हैं। भूसा चारे,पानी की व्यवस्था नहीं है। गोवंश कीचड़ और गंदगी में बैठने के लिए मजबूर हैं।
शनिवार को बजरंग दल के प्रखंड संयोजक भानुप्रताप करोसिया की अगुवाई में कार्यकर्ता कानाखेड़ा गांव स्थित गोशाला पहुंचे। गोशाला के अंदर कीचड़ गंदगी और घायल गोवंश को देखकर नाराजगी जताई। उन्होंने फोन से पशुपालन विभाग के डॉक्टर को अवगत कराया।
टिनशेड के नाम पर बबूल की लकड़ी के सहारे टिकी टीन देख कर पारा चढ़ गया। ग्रामीणों ने पदाधिकारियों को बताया कि टीनशेड लगवाने के नाम पर लाखों रुपये की धनराशि निकाली गई थी,बारिश में गोवंश भीगते है,बीमार हो जाते है। देखने वाला कोई नहीं है, भूसे चारे के लिए आने वाली धनराशि का बंदरबांट किया जाता है। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने चतेला और पथरेहटा गांव की गोशालाओं को भी देखा।
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पशु चिकित्साधिकारी कैलाश बाबू कुरील का कहना है कि उनको जानकारी मिली थी,घायल गोवंश का इलाज कराया गया है,अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सचिव और प्रधान की है।
अव्यवस्थाओं और लापरवाही पर दो सचिव हो चुके हैं निलंबित
गोशाला संचालन में औरलापरवाही गोवंशो के मरने की शिकायत पर डेढ़ वर्ष पहले मरगांया गांव में डीएम प्रियंका निरंजन ने मनोज वर्मा और बवीना में नोडल अधिकारी धीरज साहू ने सचिव सिकंदर सिंह को निलंबित किया था। जबकि चार प्रधानों को पंचायती राज अधिनियम के तहत नोटिस दिया गया था। तीन माह पूर्व डीएम चांदनी सिंह ने नोडल अधिकारियों को नामित कर गोशालाओं की क्रास चेकिंग कराई थी। जिसमे ब्लॉक के चार गांवों के सचिवों और चार प्रधानों को नोटिस थमाकर गोशाला के खातों को सीज किया था।
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शनिवार को बजरंग दल के प्रखंड संयोजक भानुप्रताप करोसिया की अगुवाई में कार्यकर्ता कानाखेड़ा गांव स्थित गोशाला पहुंचे। गोशाला के अंदर कीचड़ गंदगी और घायल गोवंश को देखकर नाराजगी जताई। उन्होंने फोन से पशुपालन विभाग के डॉक्टर को अवगत कराया।
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टिनशेड के नाम पर बबूल की लकड़ी के सहारे टिकी टीन देख कर पारा चढ़ गया। ग्रामीणों ने पदाधिकारियों को बताया कि टीनशेड लगवाने के नाम पर लाखों रुपये की धनराशि निकाली गई थी,बारिश में गोवंश भीगते है,बीमार हो जाते है। देखने वाला कोई नहीं है, भूसे चारे के लिए आने वाली धनराशि का बंदरबांट किया जाता है। बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने चतेला और पथरेहटा गांव की गोशालाओं को भी देखा।
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पशु चिकित्साधिकारी कैलाश बाबू कुरील का कहना है कि उनको जानकारी मिली थी,घायल गोवंश का इलाज कराया गया है,अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सचिव और प्रधान की है।
अव्यवस्थाओं और लापरवाही पर दो सचिव हो चुके हैं निलंबित
गोशाला संचालन में औरलापरवाही गोवंशो के मरने की शिकायत पर डेढ़ वर्ष पहले मरगांया गांव में डीएम प्रियंका निरंजन ने मनोज वर्मा और बवीना में नोडल अधिकारी धीरज साहू ने सचिव सिकंदर सिंह को निलंबित किया था। जबकि चार प्रधानों को पंचायती राज अधिनियम के तहत नोटिस दिया गया था। तीन माह पूर्व डीएम चांदनी सिंह ने नोडल अधिकारियों को नामित कर गोशालाओं की क्रास चेकिंग कराई थी। जिसमे ब्लॉक के चार गांवों के सचिवों और चार प्रधानों को नोटिस थमाकर गोशाला के खातों को सीज किया था।