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Jalaun News: जातीय समीकरणों के सहारे प्रमुख दल काटेंगे चुनावी फसल

Mon, 15 Apr 2024 02:26 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन
संवाद न्यूज एजेंसी, जालौन Updated Mon, 15 Apr 2024 02:26 AM IST
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Major parties will reap electoral harvest with the help of caste equations
उरई (जालौन)। सियासी गणित में जातीय समीकरणों की अहमियत राजनीतिक दलों के लिए खास मायने रखती है। प्रमुख दल उम्मीदवारों का चयन जातियों के गुणा-भाग के आधार पर तय करते रहे हैं। नगर निकाय चुनाव हो या फिर विधानसभा और लोकसभा चुनाव, प्रमुख दल जातिगत वोटों के सहारे सियासत की शतरंज बिछाते रहे है।
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अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित जालौन-गरौठा-भोगनीपुर सीट में इस बार भी दलों के त्रिकोणीय संघर्ष में जातिगत समीकरणों को अपने पक्ष में करने की होड़ दिख रही है। चुनावी तिलिस्म को तोड़ने के लिए राजनीतिक जानकार क्षेत्रीय क्षत्रपों के सहारे सियासत के समीकरण साधने में जुट गए हैं।
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लोकसभा की जालौन-गरौठा-भोगनीपुर सीट पर पांचवें चरण की 20 मई को मतदान होने है। भाजपा, इंडी गठबंधन और बसपा प्रत्याशियों ने क्षेत्र में चुनावी समीकरण बैठाने शुरू कर दिए है। प्रत्याशी अपनी जाति के वोटों के ध्रुवीकरण के साथ अन्य प्रमुख जातियों के मतदाताओं की रिझाने में लगे हैं।
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जातिगत आंकड़ों की बात करें तो जालौन गरौठा भोगनीपुर सीट में 3.50 लाख वोट दलित बिरादरी के है, लेकिन इस वोट बैंक का बंटवारा भी सबसे ज्यादा है। पार्टियों के प्रत्याशी अपनी जाति के वोट बैंक पर दावेदारी सुनिश्चित कर रही हैं। मुस्लिम, यादव फैक्टर के तहत 1.40 लाख मतदाता किसी भी दल का सियासी समीकरण बनाने और बिगाड़ने में सक्षम हैं।
वहीं भाजपा का वोट बैंक कहे जाने वाले कुशवाहा मतदाता भी चुनावी दंगल में दलों का समीकरण बनाने बिगाड़ने में सक्षम हैं। कांग्रेस और सपा के गठबंधन से इन दो दलों का वोट बैंक जातीय आधार पर एकजुट माना जा रहा है। भाजपा नगर निकाय अध्यक्ष, विधायक, जिला पंचायत की सीटों पर काबिज कोरी बिरादरी के वोट बैंक को अपने खाते में जोड़कर देख रही है। (संवाद)
भाजपा की सियासी गणित
भाजपा ने इस बार भी लगातार दो बार के विजयी सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री भानुप्रताप वर्मा को प्रत्याशी बनाया है। जातिगत समीकरणों के नजरिए से देखा जाए तो भानुप्रताप अपनी साधारण जीवनशैली व साफ सुथरी छवि की वजह से अपनी जाति के वोटबैंक का बड़ा प्रतिशत अपने खाते में जोड़ते रहे हैं। इसके साथ ही क्षत्रिय, वैश्य, लोधी और ब्राह्मण वोटों की बदौलत अपने समीकरणों को मजबूत बनाने में लगे हैं। कुर्मी, कुशवाहा और राठौर बिरादरी के मतदाताओं को रिझाने के लिए भाजपा की सदस्यता लेकर क्षेत्रीय क्षत्रप कहे जाने वाले ग्राम प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्यों के सहारे एक बड़े जातिगत वोट बैंक पर दावेदारी की जा रही है। हालांकि पिछली बार के चुनावी वायदों को लेकर मतदाता प्रत्याशी से सवाल भी कर रहे हैं।
जातीय वोटों के गठबंधन में जुटा इंडी गठबंधन
गठबंधन के सीट बंटवारे में सपा खेमे में आई जालौन-गरौठा-भोगनीपुर सीट से नारायणदास अहिरवार को प्रत्याशी बनाया गया है। बसपा में कोआर्डिनेटर के साथ राज्यमंत्री रह चुके नारायणदास राजनैतिक तजुर्बे और इलाकाई दांवपेंच से बखूबी वाकिफ हैं। बसपा के परंपरागत वोट बैंक कहलाने वाले अहिरवार, दोहरे, जाटव इस बार अपने खुद की बनाए जातीय समीकरणों को ध्वस्त करते हुए निर्णय लेते दिख सकते हैं। 1989 से लेकर 1997 तक बसपा के स्वर्णिम काल के दौरान क्षेत्र का प्रमुख चेहरे के रूप में पहचान रखने वाले नारायणदास अहिरवार कांग्रेस के परंपरागत वोट बैंक के साथ सपा के मुस्लिम, यादव फैक्टर को अपने हक में करने में सफल हो सकते हैं। इसके साथ ही पाल बिरादरी का 40 प्रतिशत राठौर, कुशवाहा, ब्राह्मण और क्षत्रिय वोट का कुछ प्रतिशत अपने पाले में करने को प्रयासरत दिख सकते हैं।


दलित वोट बंटवारे से बना अनिश्चितता का माहौल
वोटरों की चुप्पी चुनाव में हार जीत का समीकरण बैठाने वाले पुरोधाओं की भी समझ में नहीं आ रहा है। बसपा से भाजपा में शामिल हुए स्थानीय नेता अपनी जातियों का वोट समर्थन हासिल कर लेने की बात करते नजर आते हैं। बसपा ने सुरेश चंद्र गौतम को प्रत्याशी बनाया है। बसपा के समर्थक अपने विरासत के वोट बैंक को संभाले रखने की फिराक में हैं। बसपा के समर्थक इस बार बसपा सुप्रीमो मायावती की सभा का इंतजार कर रहे है। उन्हें लगता है कि उनका परंपरागत वोट बैंक एक बार फिर से एकजुट हो पाएगा। दलितों के वोट बैंक पर सेंधमारी में इंडी गठबंधन भी पीछे नहीं है। बसपा से सपा में शामिल हुए श्रीराम पाल जैसे कई और नेताओं के सहारे दलित वोट हथियाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड रहे हैं।
क्षेत्रीय जातिगत आंकड़े एक नजर में

मुसलमान-90 हजार
दलित-3.50 लाख
यादव-52000
ब्राह्मण-1.25 लाख

क्षत्रिय-80 हजार

वैश्य-70 हजार
लोधी-50 हजार
कुर्मी-45 हजार

कुशवाहा-70 हजार

राठौर-30 हजार
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