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लमसर गांव में भी बकरी पालकों को नहीं मिला क्लेम

Sat, 25 Jun 2016 11:52 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जालौन
अमर उजाला ब्यूरो, जालौन Updated Sat, 25 Jun 2016 11:52 PM IST
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Lmsri goat farmers in the village did not claim
बकरी पालकों से बातचीत करते टीम के सदस्य - फोटो : अमर उजाला

बुंदेलखंड पैकेज से कराए गए विकास कार्यों की जांच को आई विशेष टीम ने आखिरी दिन शनिवार को औपचारिकताएं ही पूरी कीं। पूरे दिन में टीम पशुपालन विभाग की बकरी पालन योजना का ही हाल जान पाई। इसके अलावा डीएम व सीडीओ को निरीक्षण की प्रगति प्रस्तुत की। उरई से कालपी और कदौरा के बीच कई विभागों के कार्य बुंदेलखंड पैकेज से हुए हैं।

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जिन्हें देखना टीम ने उचित नहीं समझा। यही वजह रही कि नियोजन विभाग के वरिष्ठ शोध अधिकारी डा. नागेंद्र यादव, ऋषिनाथ व आशीष लमसर गांव में बकरी पालकों से बात करके सीधे लखनऊ निकल गए।
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बुंदेलखंड पैकेज से कराए गए कार्यों की हकीकत जानने को जनपद में चार दिवसीय दौरे पर आई विशेष टीम ने तीन दिन तो निरीक्षण में तेजी दिखाई। सुबह के समय ही निरीक्षण को निकल पड़ते और शाम को छह, सात बजे तक लौटते। इस दौरान कई विभागों के कार्य देखे गए, लेकिन आखिरी दिन टीम पूरी तरह से सुस्त नजर आई।
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जिसके चलते कदौरा ब्लाक के लमसर गांव में पशु पालन विभाग की बकरी पालन योजना का ही हाल जान सके। यहां पर दो पशु पालकों की बकरियां भी मौके पर मिली, लेकिन क्लेम के मामले परेछा गांव जैसा ही यहां भी हाल है। पांच लोगों से बातचीत की गई, इसमें से तीन ने बताया कि उनकी बकरी मर गईं लेकिन कोई क्लेम नहीं मिला।

जबकि एक ने बताया कि बकरी तो मर गई, लेकिन उसका पोस्ट मार्टम वह नहीं करा सका। जिसकी वजह से क्लेम दायर नहीं किया जा सका। जगन्नाथ ने बताया कि उसकी एक बकरी मर गई थी। जिसका क्लेम उसे मिल गया। लमसर गांव में तकरीवन 46,500 रुपये का बजट 15 यूनिट बकरियों पर खर्च हुआ।

यहां पर जांच टीम ने पशु चिकित्साधिकारी डा. जगरूप सिंह से योजना के संदर्भ में जानकारी ली। यहां से सीधे टीम जोल्हूपुर पहुंची और फिर एक होटल पर खाना खाया और लखनऊ को रवाना हो गई। इस दौरान अपर जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी विनोद कुमार सिंह भी मौजूद रहे।

राज्य व केंद्र सरकार को भेजेंगे रिपोर्ट
विशेष जांच टीम के डा. नागेंद्र यादव, ऋषिनाथ ने बताया कि जिले में चार दिन में जो कार्य देखें है, उसकी रिपोर्ट केंद्र व प्रदेश सरकार को सौपेंगे। निरीक्षण के दौरान की गतिविधियां और प्रगति रिपोर्ट जिला प्रशासन को भी सौंपी है। इसके अलावा टीम ने कुछ भी नहीं बताने से इंकार कर दिया।

कान में लगा टैग भी मिला गायब
लमसर गांव में बकरी पालन योजना की हकीकत जानने पहुंची टीम ने जब रत्तो की बकरियों को देखा तो उनमें से एक को छोड़कर सभी के कान से बीमा कंपनी की ओर से लगाया गया टैग गायब था। इस पर बताया गया कि चरने के दौरान ही कहीं गिर गया। इस संदर्भ में पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि स्टील का टैग अधिकांश गिर जाता है। बीमा कंपनी से प्लास्टिक के टैग की डिमांड की थी, जिस पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

उपकेंद्र मिला बंद
लमसर गांव में पशु उपकेंद्र बंद मिला। टीम जब दोपहर बाद तकरीवन डेढ़ बजे पहुंची तब अस्पताल में ताला लटक रहा था। इसके बाद टीम को गांव के ही संजय के दरवाजे पर बैठकर ही बकरी पालकों से बातचीत करनी पड़ी। पशु चिकित्साधिकारी डा. जगरूप सिंह ने बताया कि ड्रेसर के परिवार में अचानक किसी का स्वास्थ्य बिगड़ गया जिसकी वजह से वह चला गया।


साहब कब मिलेगा क्लेम
जांच पड़ताल कर रही विशेष टीम के सामने गांव के धर्मवीर सिंह ने बताया कि तीन बकरी मर गई लेकिन अब तक क्लेम नहीं मिला। बलखंडी ने भी बताया कि उसकी तीन बकरियां मर गई थीं, इसमें एक तो मिल गई पर दो का क्लेम अभी नहीं मिला है।

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