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Jalaun News: सुंदरीकरण में लाखों खर्च, शुरू होने की आस में पुस्तकालय हो गया बदहाल
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उरई। शहर का गौरव कहे जाने वाला घंटाघर और उसके ऊपर बना अटल बिहारी वाचनालय एवं पुस्तकालय बदहाली का शिकार है। लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद यह पुस्तकालय शुरू ही नहीं हो सका। अब हालत यह है कि यहां लगाया गया फर्नीचर, एसी, पंखे और इन्वर्टर तक चोरी हो चुके हैं। पालिका के जिम्मेदार सिर्फ एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ रहे हैं।
शहर के लोगों के लिए घंटाघर की अहमियत सिर्फ एक इमारत भर नहीं है, बल्कि यह शहर की पहचान और गौरव माना जाता रहा है। करीब 1965 में यहां कुएं को पाटकर घंटाघर का निर्माण किया गया था। चारों ओर लगी बड़ी-बड़ी घड़ियां उस समय पूरे बाजार को जीवन देती थीं। दुकानदारों से लेकर राहगीर तक इसी घड़ी से समय देखते थे।
करीब पांच साल पहले इसके ऊपरी तल का निर्माण किया गया। 65 लाख रुपये की लागत से भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी पुस्तकालय और वाचनालय बनाया गया। उद्देश्य था कि यह स्थान विद्यार्थियों और बुजुर्गों के ज्ञान व अध्ययन का केंद्र बने। बाद में 22 लाख रुपये और सुंदरीकरण पर खर्च किए गए। किताबें, फर्नीचर, एसी, इन्वर्टर और पंखे लगाए गए, लेकिन आज तक उद्घाटन तक नहीं हो पाया।
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पुस्तकालय के निर्माण से लेकर सुंदरीकरण तक हर बार विवाद सामने आया। सभासदों ने आरोप लगाया कि लोहे की सीढ़ियों और सुंदरीकरण के नाम पर घोटाला हुआ है। लंबे समय तक हंगामा चलता रहा। विवाद थमने के बाद लोगों को उम्मीद जगी कि अब पुस्तकालय चालू होगा, लेकिन वह दिन कभी नहीं आया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह पूरा प्रकरण सिर्फ खाने-खिलाने का खेल बनकर रह गया। किताबों का नाम लेकर जेबें भरी गईं और ज्ञान का केंद्र बनने वाला भवन ताले में जकड़ा रह गया।
चोरी ने खोली पोल
22 मई को जब चोरी की घटना सामने आई तो प्रशासन और पालिका की लापरवाही की पोल खुल गई। चोर पुस्तकालय से एसी, पंखे, इन्वर्टर और फर्नीचर उठा ले गए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि चोरी कब हुई, कैसे हुई, किसकी जिम्मेदारी थी। किसी को कुछ पता ही नहीं चला। सभासदों ने सवाल उठाया कि जब यह भवन शहर के मुख्य चौराहे पर है तो इतनी बड़ी चोरी कैसे हो गई। जिम्मेदार चुप्पी साधते रहे। पुलिस ने खानापूरी कर तहरीर लिख ली, लेकिन कार्रवाई आज तक ठंडे बस्ते में है।
गलत समय बता रहीं घंटाघर की घड़ियां
घंटाघर की पहचान रही चारों ओर की बड़ी घड़ियां भी लंबे समय से बंद पड़ी रहीं। करीब एक साल पहले एक निजी कोचिंग सेंटर ने इन्हें ठीक कराया, लेकिन पालिका की लापरवाही के कारण अब यह भी गलत समय बताने लगी हैं। लोग कहते हैं कि शहर की पहचान बताने वाली घड़ी गलत समय दिखाती है और पुस्तकालय ताले में पड़ा रहता है, इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी।
पालिका का नया तर्क...पुस्तकालय की जगह ही गलत
पालिका अध्यक्ष गिरजा चौधरी का कहना है कि पुस्तकालय की जगह ही गलत है। ऊंचाई पर होने की वजह से बुजुर्ग वहां नहीं जा सकते, इसलिए यह उपयुक्त स्थान नहीं है। नई योजना बनाई जा रही है। पुस्तकालय कहीं और बनेगा। बोर्ड बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा।
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शहर के लोगों के लिए घंटाघर की अहमियत सिर्फ एक इमारत भर नहीं है, बल्कि यह शहर की पहचान और गौरव माना जाता रहा है। करीब 1965 में यहां कुएं को पाटकर घंटाघर का निर्माण किया गया था। चारों ओर लगी बड़ी-बड़ी घड़ियां उस समय पूरे बाजार को जीवन देती थीं। दुकानदारों से लेकर राहगीर तक इसी घड़ी से समय देखते थे।
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करीब पांच साल पहले इसके ऊपरी तल का निर्माण किया गया। 65 लाख रुपये की लागत से भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी पुस्तकालय और वाचनालय बनाया गया। उद्देश्य था कि यह स्थान विद्यार्थियों और बुजुर्गों के ज्ञान व अध्ययन का केंद्र बने। बाद में 22 लाख रुपये और सुंदरीकरण पर खर्च किए गए। किताबें, फर्नीचर, एसी, इन्वर्टर और पंखे लगाए गए, लेकिन आज तक उद्घाटन तक नहीं हो पाया।
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पुस्तकालय के निर्माण से लेकर सुंदरीकरण तक हर बार विवाद सामने आया। सभासदों ने आरोप लगाया कि लोहे की सीढ़ियों और सुंदरीकरण के नाम पर घोटाला हुआ है। लंबे समय तक हंगामा चलता रहा। विवाद थमने के बाद लोगों को उम्मीद जगी कि अब पुस्तकालय चालू होगा, लेकिन वह दिन कभी नहीं आया। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह पूरा प्रकरण सिर्फ खाने-खिलाने का खेल बनकर रह गया। किताबों का नाम लेकर जेबें भरी गईं और ज्ञान का केंद्र बनने वाला भवन ताले में जकड़ा रह गया।
चोरी ने खोली पोल
22 मई को जब चोरी की घटना सामने आई तो प्रशासन और पालिका की लापरवाही की पोल खुल गई। चोर पुस्तकालय से एसी, पंखे, इन्वर्टर और फर्नीचर उठा ले गए। सबसे हैरानी की बात यह रही कि चोरी कब हुई, कैसे हुई, किसकी जिम्मेदारी थी। किसी को कुछ पता ही नहीं चला। सभासदों ने सवाल उठाया कि जब यह भवन शहर के मुख्य चौराहे पर है तो इतनी बड़ी चोरी कैसे हो गई। जिम्मेदार चुप्पी साधते रहे। पुलिस ने खानापूरी कर तहरीर लिख ली, लेकिन कार्रवाई आज तक ठंडे बस्ते में है।
गलत समय बता रहीं घंटाघर की घड़ियां
घंटाघर की पहचान रही चारों ओर की बड़ी घड़ियां भी लंबे समय से बंद पड़ी रहीं। करीब एक साल पहले एक निजी कोचिंग सेंटर ने इन्हें ठीक कराया, लेकिन पालिका की लापरवाही के कारण अब यह भी गलत समय बताने लगी हैं। लोग कहते हैं कि शहर की पहचान बताने वाली घड़ी गलत समय दिखाती है और पुस्तकालय ताले में पड़ा रहता है, इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी।
पालिका का नया तर्क...पुस्तकालय की जगह ही गलत
पालिका अध्यक्ष गिरजा चौधरी का कहना है कि पुस्तकालय की जगह ही गलत है। ऊंचाई पर होने की वजह से बुजुर्ग वहां नहीं जा सकते, इसलिए यह उपयुक्त स्थान नहीं है। नई योजना बनाई जा रही है। पुस्तकालय कहीं और बनेगा। बोर्ड बैठक में इस पर निर्णय लिया जाएगा।