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Jalaun News: जांच पर जांच, फिर नहीं मिल रहा महिला को इलाज
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फोटो-27 नर्सिंग होम के बाहर खड़ी रजिया व उसकी बेटी। संवाद
उरई। कालपी के मोहल्ला मनीगंज निवासी एक महिला 23 जनवरी से इलाज के लिए भटक रही है। वह पेट की समस्या का इलाज कराने 23 जनवरी को मेडिकल कॉलेज पहुंची जहां उसे एक से दूसरे और तीसरे डॉक्टर के पास भेज दिया गया। कई बार जांचें कराई गईं सही इलाज नहीं मिल पा रहा है।
आरोप है कि 23 जनवरी से सातवीं बार मेडिकल कॉलेज पहुंची तो फिर टरका दिया गया। इस पर एक डॉक्टर के बाहर खड़े कर्मचारी से पूछा कि भैया बता दो इलाज होगा या नहीं या फिर ऐसे ही चक्कर लगाने होंगे तो एक निजी नर्सिंग होम का पता बता दिया गया।
कालपी के मोहल्ला मनीगंज निवासी रजिया (41) के मुताबिक उसे पेट में दर्द रहता था, इसलिए वह 23 जनवरी को मेडिकल कॉलेज पहुंची तो महिला चिकित्सक को दिखाया, उन्होंने जांच आदि लिख दी। इसके बाद जांच कराई तो 30 जनवरी को महिला डॉक्टर ने उन्हें एक अन्य डॉक्टर के पास भेज दिया। डॉक्टर ने फिर जांच करा दी। 11 फरवरी को फिर डॉक्टर के पास पहुंची तो उन्होंने एक अन्य चिकित्सक के पास भेज दिया। उसने बाहर का अल्ट्रासाउंड लिख दिया। आठ सौ रुपये का अल्ट्रासाउंड कराया। इसके बाद आज फिर मेडिकल कॉलेज पहुंची तो चिकित्सक ने टकरा दिया। परेशान होकर वह कमरे से बाहर निकल आई और बाहर खड़े कर्मचारी से पूछा कि ऐसे ही घुमाया जाएगा या फिर इलाज भी होगा। इस पर कर्मचारी ने एक कागज पर नर्सिंग का पता लिखकर वहां जाने की सलाह दी। महिला अपनी बेटी अनमता के साथ नर्सिंग होम पहुंची। मां-बेटी का आरोप है कि वह सात बार मेडिकल कॉलेज के चक्कर काट चुकी है, उनके पास इतने पैसे नहीं है कि प्राइवेट चिकित्सक से इलाज करा सके।
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वर्जन
इलाज के लिए आई रजिया की सर्जरी होनी है। इनफेक्टेड केस में सर्जरी से पहले घाव भरने और अन्य सभी समस्याओं को पहले दूर किया जाता है। मेडिकल की मेडिसिन ओपीडी में किसी ने महिला को गुमराह कर बाहर के नर्सिंग होम का रास्ता दिखा दिया। कल 11 बजे महिला को बुलाकर उसे ट्रीटमेंट और इलाज जो भी जरूरत पड़ेगी उसकी सभी प्रकार से इलाज कर मदद की जाएगी।
डॉ.अरविंद त्रिवेदी, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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आरोप है कि 23 जनवरी से सातवीं बार मेडिकल कॉलेज पहुंची तो फिर टरका दिया गया। इस पर एक डॉक्टर के बाहर खड़े कर्मचारी से पूछा कि भैया बता दो इलाज होगा या नहीं या फिर ऐसे ही चक्कर लगाने होंगे तो एक निजी नर्सिंग होम का पता बता दिया गया।
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कालपी के मोहल्ला मनीगंज निवासी रजिया (41) के मुताबिक उसे पेट में दर्द रहता था, इसलिए वह 23 जनवरी को मेडिकल कॉलेज पहुंची तो महिला चिकित्सक को दिखाया, उन्होंने जांच आदि लिख दी। इसके बाद जांच कराई तो 30 जनवरी को महिला डॉक्टर ने उन्हें एक अन्य डॉक्टर के पास भेज दिया। डॉक्टर ने फिर जांच करा दी। 11 फरवरी को फिर डॉक्टर के पास पहुंची तो उन्होंने एक अन्य चिकित्सक के पास भेज दिया। उसने बाहर का अल्ट्रासाउंड लिख दिया। आठ सौ रुपये का अल्ट्रासाउंड कराया। इसके बाद आज फिर मेडिकल कॉलेज पहुंची तो चिकित्सक ने टकरा दिया। परेशान होकर वह कमरे से बाहर निकल आई और बाहर खड़े कर्मचारी से पूछा कि ऐसे ही घुमाया जाएगा या फिर इलाज भी होगा। इस पर कर्मचारी ने एक कागज पर नर्सिंग का पता लिखकर वहां जाने की सलाह दी। महिला अपनी बेटी अनमता के साथ नर्सिंग होम पहुंची। मां-बेटी का आरोप है कि वह सात बार मेडिकल कॉलेज के चक्कर काट चुकी है, उनके पास इतने पैसे नहीं है कि प्राइवेट चिकित्सक से इलाज करा सके।
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इलाज के लिए आई रजिया की सर्जरी होनी है। इनफेक्टेड केस में सर्जरी से पहले घाव भरने और अन्य सभी समस्याओं को पहले दूर किया जाता है। मेडिकल की मेडिसिन ओपीडी में किसी ने महिला को गुमराह कर बाहर के नर्सिंग होम का रास्ता दिखा दिया। कल 11 बजे महिला को बुलाकर उसे ट्रीटमेंट और इलाज जो भी जरूरत पड़ेगी उसकी सभी प्रकार से इलाज कर मदद की जाएगी।
डॉ.अरविंद त्रिवेदी, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज